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भारत, जिसकी 7,500 किलोमीटर लंबी कोस्टल लाइन (costal line) और लगभग 2.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर का विशाल Exclusive Economic Zone (EEZ) है, अब समुद्री संसाधनों (Blue Economy) के मैनेजमेंट और दोहन (Management and exploitation of marine resources) के तरीके में एक ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय बजट 2025-26 (Union Budget 2025-26) में घोषित और नए EEZ Rule, केवल Fisheries के regulation से कहीं आगे की बात करते हैं। ये एक समृद्ध और समावेशी समुद्री अर्थव्यवस्था (Inclusive Ocean Economy) के निर्माण की दिशा में एक बहुआयामी रणनीति हैं।
Cooperative Societies और Technology का मेल
इस पॉलिसी की सबसे बड़ी खूबी है Fishermen’s Cooperative Societies और मछली किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) को प्रायोरिटी देना। ये सोंच मछुआरों की मुश्किलों को समझते हुए सामूहिक ताकत पर जोर देता है। गहरे समुद्र में मछली पकड़ने जैसे बड़े और जोखिम भरे कामों के लिए टेक्विकल तरीके से उन्नत जहाजों की ज़रूरत होती है, जिसे एकल मछुआरे पूरा नहीं कर सकते। सहकारी समितियों और FFPOs के ज़रिये से छोटे मछुआरे रिसोर्स को जोड़ सकते हैं, advanced technologies अपना सकते हैं और बाजार में बेहतर सौदेबाजी की ताकत हासिल कर सकते हैं। सरकार की ओर से PMMSY और FIDF जैसी स्कीम के तहत लोन सुविधा देना इस मॉडल को Financial Form से बेहतर बनाता है।
गेम-चेंजर इनोवेशन
ये पॉलिसी अपने साथ एक Innovative ‘Mother and Child Ship’ कॉन्सेप्ट लेकर आई है। इसमें एक बड़ा मदर शिप गहरे समुद्र में छोटे बोट्स के लिए एक temporary basis के रूप में काम करेगा। ये सिस्टम मछुआरों को लंबे वक्त तक समुद्र में रहने, मछली को तुरंत प्रोसेस करने और उसकी क्वालिटी बनाए रखने में सक्षम (capable) बनाएगी। इसका सीधा फायदा ये होगा कि द्वीपीय क्षेत्रों (insular areas) जैसे अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप से पकड़ी गई हाई क्वालिटी वाली मछली बिना खराब हुए इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंच सकेगी। ये भारत के Seafood export में बढ़ोतरी करेगा।
Ecological Protection पर जोर
नए रूल साफ तौर से दिखाते हैं कि सरकार डेवलपमेंट और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना चाहती है। LED लाइट फिशिंग, पेयर ट्रॉलिंग और बुल ट्रॉलिंग जैसी मछली पकड़ने की तबह करने वाले प्रेक्टिस पर पूरी तरह से रोक एक बड़ा है। ये प्रेक्टिस समुद्री तल को नुकसान पहुंचाती हैं और बाय-कैच के बड़े पैमाने पर ख़ात्मे का कारण बनती हैं। समुद्री पिंजरा पालन और समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देकर, नीति मछुआरों के लिए ऑप्शनल आमदनी के सोर्स खोलती है, जिससे तटीय इलाकों में मछली पकड़ने के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
Digitalization और Safety
ReALCRaft पोर्टल के ज़रिये से शुरू किया गया Digital Access Pass System पारदर्शिता और शासन में सुधार लाएगा। MPEDA और EIC के साथ समायोजन से एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल मार्केट की मांग के आधार पर Traceability and Eco-labelling Certificate हासिल करने में आसानी होगी। इसके अलावा, अनिवार्य ट्रांसपोंडर और QR-कोडेड आईडी कार्ड न केवल मछुआरों की सुरक्षा को मज़बूती देंगे बल्कि भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल को National water में संदिग्ध गतिविधियों (suspicious activities) पर नजर रखने में मदद करके नेशनल सेफ्टी को भी मजबूत करेंगे।
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