महाराष्ट्र के बीड ज़िले के सिरसला में शिवराज सिंह चौहान का किसानों के नाम संदेश

शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र में किसानों को फ़सल बीमा, राहत पैकेज और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की नई दिशा दी।

शिवराज सिंह चौहान shivraj singh chouhan

महाराष्ट्र के बीड ज़िले के सिरसला में आयोजित ग्लोबल विकास ट्रस्ट (GVT) कृषिकुल सम्मेलन में केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 20,000 से अधिक किसानों को संबोधित किया। अपने जोशीले भाषण में उन्होंने किसानों की समस्याओं, फ़सल बीमा, प्राकृतिक खेती और जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।

किसानों के साथ सीधा संवाद

कार्यक्रम की शुरुआत में शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से सीधे संवाद किया। किसानों ने उनसे अपने अनुभव साझा किए कि कैसे रेशम पालन, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और नई तकनीकों के उपयोग से उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है। किसानों की बात सुनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन सफल मॉडलों को पूरे देश के गांवों में फैलाया जाएगा ताकि हर किसान आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने कहा,

“किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि जीवनदाता है। हमारा हर कदम किसानों की आय बढ़ाने और आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं को रोकने की दिशा में है।”

हर किसान को मिलेगा फ़सल बीमा का पूरा लाभ

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना के तहत हर किसान को उसका हक़ मिलना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में दिल्ली में बीमा कंपनियों और महाराष्ट्र के किसानों के साथ बैठक की, ताकि बीमा दावों के निपटारे में पारदर्शिता और तेजी लाई जा सके।

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हर किसान को उसका हर रुपया मिलेगा। यदि ज़रूरत हुई तो किसानों से सीधा संवाद कर सुनिश्चित किया जाएगा कि उन्हें उनका पूरा मुआवज़ा मिले,” उन्होंने कहा।

महाराष्ट्र को मिलेगा विशेष राहत पैकेज

हाल ही में अतिवृष्टि और अनियमित मौसम से महाराष्ट्र के कई किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इस पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा,

“राज्य सरकार को तत्काल मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया है, और यदि आवश्यक हुआ तो केंद्र सरकार विशेष राहत पैकेज भी देगी।”
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से भी अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।

जलवायु परिवर्तन और नई बीज किस्मों की ज़रूरत

शिवराज सिंह चौहान ने जलवायु परिवर्तन को कृषि के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि अब ऐसे बीज विकसित करने की ज़रूरत है जो सूखा और अधिक वर्षा—दोनों परिस्थितियों में टिक सकें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती और देशी गो आधारित पद्धतियों को अपनाना भविष्य की आवश्यकता है।

“अत्यधिक रासायनिक खाद और कीटनाशक हमारी मिट्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हमें गोबर, गोमूत्र और जीवामृत आधारित प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा,” उन्होंने कहा।

किसानों को मिलेंगी पारदर्शी सब्सिडी और बाज़ार की सुविधा

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार जल्द ही खाद सब्सिडी को किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर करने पर विचार कर रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि किसान पारंपरिक फ़सलों के साथ-साथ फल, फूल, सब्जी और एग्रोफॉरेस्ट्री को भी अपनाएं।

“क्लस्टर आधारित खेती और गांव स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाकर किसानों की आय को दोगुना किया जा सकता है,” उन्होंने कहा।

MGNREGA फंड से जल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

जल संकट पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के तहत मिलने वाली निधि का 65 प्रतिशत हिस्सा सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण कार्यों पर खर्च करने का निर्णय लिया है। इससे सिंचाई सुविधाओं को मज़बूती मिलेगी और किसानों की निर्भरता वर्षा पर कम होगी।

नकली खाद और बीज पर सख्त कार्रवाई

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को नकली खाद, बीज और कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने घोषणा की कि आगामी बजट सत्र में इस विषय पर एक नया कानून लाया जाएगा, जिससे दोषियों को सख्त सजा दी जा सके।

किसानों के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता

कार्यक्रम के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा,

“हमारे किसान देश की शान हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर किसान को सम्मान, समृद्धि और आत्मनिर्भरता दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर किसानों और देशवासियों को बधाई भी दी।

निष्कर्ष

शिवराज सिंह चौहान का महाराष्ट्र दौरा केवल एक सम्मेलन नहीं था, बल्कि किसानों के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक था। फ़सल बीमा से लेकर प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण से लेकर आवास योजनाओं तक — उनके हर संदेश में एक ही भावना झलक रही थी:
“किसानों की समृद्धि ही भारत की असली प्रगति है।”

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