जानवरों से इंसानों में आने वाली Zoonotic Disease क्या है और कैसे करें इनसे बचाव ? जानिए

Zoonotic Disease के खतरे को भांपते हुए, दुनिया भर में और भारत में भी इस पर काबू पाने की तैयारी शुरू हो गई है। "NOHM" (नेशनल वन हेल्थ मिशन) जैसे मिशन शुरू किए गए हैं। एक बड़ी योजना के तहत तीन स्तरों पर काम किया जा रहा है

जानवरों से इंसानों में आने वाली Zoonotic Disease क्या है और कैसे करें इनसे बचाव ? जानिए

कोरोना, इबोला, जीका, बर्ड फ्लू (Coronavirus, Ebola, Zika, Bird flu)… ये सभी नाम अब हमारी रोज़ की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सभी जानलेवा बीमारियां हमें पशु-पक्षियों से मिली हैं? और ये ज़रूरी नहीं कि आप संक्रमित जानवर (Infected animals) के पास जाएं तभी ये बीमारी हो। कई बार अन्य वजहों से भी ये वायरस (Virus) हम तक पहुंच जाते हैं। एक बार यह बीमारी जानवर से इंसान में आ जाए, तो यह आग की तरह फैलती है। इन बीमारियों को ‘Zoonotic’ या ‘Zoonosis’ कहा जाता है। हैरानी की बात यह है कि दुनिया की 70 फीसदी बीमारियां इसी कैटेगरी में आती हैं, यानी जानवरों से इंसानों में फैलती हैं।

कितना बड़ा है ख़तरा?

आंकड़े चौंका देने वाले हैं:

  • एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के जंगलों में 17 लाख से ज़्यादा वायरस फैले हैं।

  • इनमें से बहुत से वायरस Zoonotic हैं।

  • दुनिया में हर साल 100 करोड़ से ज़्यादा ज़ूनोटिक केस सामने आते हैं।

  • हर साल 10 लाख लोगों की मौत इन्हीं बीमारियों से हो जाती है।

यानी, खतरा बहुत गंभीर है। कोविड-19 इसका ताज़ा और सबसे बड़ा उदाहरण है।

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सरकार और दुनिया क्या कर रही है?

खतरे को भांपते हुए, दुनिया भर में और भारत में भी इस पर काबू पाने की तैयारी शुरू हो गई है। “NOHM” (नेशनल वन हेल्थ मिशन) जैसे मिशन शुरू किए गए हैं। एक बड़ी योजना के तहत तीन स्तरों पर काम किया जा रहा है:

1.तैयारी: राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर महामारी की जांच के लिए संयुक्त टीमें बनाई गई हैं। पशुओं में बीमारी पर नज़र रखने का सिस्टम तैयार किया गया है।

2.चेतावनी और रोकथाम: महामारी फैलने से पहले ही लोगों को चेतावनी देने के लिए सिस्टम बनाया जा रहा है। रेगुलेटरी सिस्टम मज़बूत किए जा रहे हैं।

3.रिस्पॉन्स और रिसर्च: महामारी फैलने पर संयुक्त टीमें तुरंत कार्रवाई करेंगी। ज़रूरी बीमारियों के टीके और इलाज विकसित करने के लिए रिसर्च तय की गई है। बीमारी का तुरंत पता लगाने के लिए जीनोमिक और पर्यावरण निगरानी के फॉर्मूले भी बनाए जा रहे हैं।

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आम लोग क्या कर सकते हैं?

सिर्फ सरकारी तैयारी काफी नहीं है। हर आम नागरिक की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह सतर्क रहे। यह सोच गलत है कि सिर्फ पशुपालकों को ही बायो-सिक्योरिटी का ध्यान रखना है। हम सभी को यह बातें अमल में लानी होंगी:

1.सफाई सबसे बड़ा बचाव: किसी भी पशु-पक्षी को छूने के पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोना या सैनिटाइज़ करना बेहद ज़रूरी है।

2.जागरूकता: ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, जो इन्फ्लूएंजा जैसे हों (बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ)।

3.मीट का सेवन: मांस खरीदते और पकाते समय पूरी साफ-सफाई और सावधानी बरतें। अच्छी तरह पका हुआ मांस ही खाएं।

4.पालतू जानवर: अपने पालतू जानवरों का समय-समय पर चेकअप और टीकाकरण ज़रूर करवाएं।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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