Climate Change से मुकाबला: वैज्ञानिक Dr. Naved Sabir ने बताया कैसे नई टेक्नोलॉजी और समझदारी से खेती बनेगी मुनाफे का सौदा!

Kisan of India Samman 2025 के मंच पर एक बड़ा सवाल उठा- Climate change के इस दौर में पारंपरिक फसलें टिक नहीं पा रहीं, तो किसान क्या करे? इसका जवाब दिया Indian Agricultural Research Institute (IARI) के Principal Scientist Dr. Naved Sabir ने ।

Climate Change से मुकाबला: वैज्ञानिक Dr. Naved Sabir ने बताया कैसे नई टेक्नोलॉजी और समझदारी से खेती बनेगी मुनाफे का सौदा!

किसान ऑफ इंडिया सम्मान 2025 (Kisan of India Samman 2025) के मंच पर एक बड़ा सवाल उठा-जलवायु परिवर्तन (Climate change) के इस दौर में पारंपरिक फसलें टिक नहीं पा रहीं, तो किसान क्या करे? इसका जवाब देते हुए Indian Agricultural Research Institute (IARI) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नावेद सबीर (Principal Scientist Dr. Naved Sabir) ने ‘क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर’ को विकसित भारत @2047 (Climate-Smart Agriculture: Road to Viksit Krishi Bharat @2047) तक पहुंचने की मुख्य सड़क बताया।

डॉ. सबीर के मुताबिक, आज किसान संकट में है क्योंकि चुनौतियां बढ़ी हैं और संसाधन घटे हैं। मिट्टी में कार्बन कम हो रहा है, पानी की कमी है, गर्मी बढ़ रही है, लेकिन आबादी बढ़ने से प्रोडक्शन की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। ऐसे में, केवल नई टेक्नोलॉजी और समझदारी ही किसान को इस संकट से उबार सकती है।

Technology ही चाभी, लेकिन सही टेक्नोलॉजी

डॉ. सबीर ने कहा कि Technology तो बहुत आ रही है- नैनो यूरिया, ड्रोन, प्रिसिजन फार्मिंग, एआई, सेंसर आधारित सिस्टम (Nano urea, drones, precision farming, AI, sensor-based systems) लेकिन सवाल है कि ये तकनीक किसान के लिए कितनी उचित, कितनी सस्ती और कितनी समझने लायक है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, ‘हर दिन कोई न कोई हाइड्रोपोनिक्स का बिजनेस शुरू करने आता है, लेकिन मैं उन्हें रोकता हूं क्योंकि उसकी मार्केट सीमित है।’

उनके अनुसार, किसान कोई भी तकनीक तुरंत अपना लेता है, अगर वो सीधा और क्लियर फायदा दिखाए। नई किस्म का बीज तुरंत अपनाया जाता है। ड्रोन भी इस्तेमाल हो जाएगा अगर सर्विस सस्ती और सहज मिले। असली मुद्दा तकनीक के महंगे, जटिल और कम इस्तेमाल वाले होने का है।

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बैलेंस है जरूरी: लाभ, स्वास्थ्य और पर्यावरण

डॉ. सबीर ने जोर देकर कहा कि आधुनिक खेती का टारगेट सिर्फ पैदावार बढ़ाना नहीं, बल्कि एक बैलेंस कायम करना है। ये बैलेंस चार खंभों पर टिका होना चाहिए- 

1.किसान का फायदा 

2.उपभोक्ता का स्वास्थ्य  

3.पर्यावरण का संतुलन  

4.सामाजिक मान्यता

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‘अगर तकनीक हमें कम ज़मीन से ज्यादा उत्पादन दे सकती है, तो बची हुई ज़मीन को हम पर्यावरण के संतुलन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं,’ उन्होंने समझाया।

आगे का रास्ता 

डॉ. सबीर ने भविष्य की राह बताते हुए तीन बातों  पर फोकस करने को कहा-

  • Competence: किसान को सशक्त बनाने वाली तकनीक।
  • Integrity: हर पहलू – पानी, मिट्टी, फसल, बाजार – को जोड़ने वाली सोंच ।
  • Balance: आर्थिक लाभ, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच तालमेल।

उन्होंने एक गहरी बात कही, ‘अगर तकनीक महंगी है, तो अभी भी बहुत काम बाकी है।’ यानी वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं (Scientists and policymakers) का लक्ष्य ऐसी सस्ती, कारगर और आसान तकनीक विकसित करना है जो किसान की जेब पर भारी न पड़े।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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