आमतौर पर जिस उम्र में बुज़ुर्ग बिस्तर पर पड़े रहते हैं और उनके लिए अपने रोज़मर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है, उस उम्र में बुलंदशहर के किसान ओम प्रकाश पालीवाल Hi-tech Dairy Farm चला रहे हैं। 80 साल के ओम प्रकाश अपने जिले के किसानों के लिए रोल मॉडल बन गए हैं। उन्होंने सिर्फ़ दो गायों से शुरुआत की थी और आज उनके पास Holstein Friesian, Jersey, Ayrshire के साथ ही उन्नत नस्ल की कई देसी गायें हैं। उनकी कुछ गाय तो रोज़ाना 20-30 लीटर तक दूध देती है। उनके फार्म की एक खासियत है कि न सिर्फ़ वो हाई-टेक है बल्कि बहुत साफ-सुधरा है और गायों की सुविधा का यहां पूरा ध्यान रखा जाता है। अपने हाई-टेक फ़ार्मिंग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर उन्होंने चर्चा की किसान ऑफ़ इंडिया का संवाददाता सर्वेश बुंदेली के साथ।
80 की उम्र में युवाओं वाला जोश
चाहे खेती हो या पशुपालन हर क्षेत्र में किसान अब नई हाईटेक तकनीकों का इस्तेमाल करके सफ़लता के नए आयाम गढ़ रहे हैं। पारंपरिक तरीकें से हटकर आधुनिक तकनीक के उपयोग से न सिर्फ उन्हें अच्छा मुनाफ़ा होता है, बल्कि काम भी पहले से आसान हो जाता है। बुलंदशहर के 80 साल के किसान ओम प्रकाश मे भी तकनीक को अपना साथी बनाया और आज वो अपना डेयरी फ़ार्म अच्छी तरह चला रहे हैं। इस उम्र में भी उनका जोश किसी युवा से कम नहीं है और सबसे बड़ी बात ये कि इस उम्र में ओम प्रकाश नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अपनी असफ़लताओं से सीखकर वो आगे बढ़े हैं और अब दूसरे पशुपालकों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।
कब की शुरुआत?
डेयरी फ़ार्मिंग शुरू करने से पहले ओम प्रकाश अपनी 9 एकड़ ज़मीन पर खेती किया करते थे। अपने फ़ार्मिंग के सफ़र के बारे में ओम प्रकाश बताते हैं कि 1982 में सरकार की तरफ़ से वो गुजरात, महाराष्ट्र टूर पर गए थे। टूर के दौरान चर्चा होती थी कि किसानों को खेती के साथ ही उससे संबंधित कुछ काम करने चाहिए जिससे आमदनी बढ़े। फिर चाहे वो मछलीपालन हो, बकरी पालन, मुर्गी पालन या पशुपालन हो। आगे वो कहते हैं कि टूर से लौटने के बाद उन्होंने भी 2 गायों के साथ अपना डेयरी फ़ार्म शुरू किया। मगर उस वक्त डेयरी फ़ार्मिंग के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं होने की वजह से वो असफ़ल रहे।
दोबारा की शुरुआत
ओम प्रकाश कहते हैं कि एक बार असफ़ल होने पर कुछ साल के लिए वो चुप बैठ गए, मगर फिर 4 गायों के साथ उन्होंने दोबारा डेयरी फ़ार्म शुरू किया, मगर इस बार सही जानकारी के साथ ही तकनीक के इस्तेमाल ने उन्हें सफ़ल पशुपालक बना दिया। ओम प्रकाश पंजाब डेवलपमेंट फार्मर एसोसिएशन के मेंबर भी हैं।
पिंजड़ें में रखते हैं बछिया
आपने शायद ही किसी डेयरी फार्म में पिंजड़ा देखा होगा, मगर ओम प्रकाश के फ़ार्म में पिंजड़ा है जिसमें वो नए जन्में गाय के बच्चे/बछिया को रखते हैं। दरअसल, बच्चे को जन्म लेते ही गाय से अलग कर दिया जाता है और उसे पिंजड़ें में रखकर उसकी देखभाल की जाती है। 3 महीने तक बछियों को पिंजड़े में रखा जाता है और रोज़ाना सुबह-शाम 2.5-2.5 लीटर दूध निप्पल से पिलाया जाता है ताकि इनका स्वास्थ्य अच्छा रहे। फिर 14 महीने में बछिया को Artificial Insemination किया जाता है।
फ़ार्म में हैं दो हिस्से
ओम प्रकाश ने अपने फ़ार्म को दो हिस्सों में बांट रखा हैं। इस बारे में वो बताते हैं कि एक तरफ गर्भवती गायों को रखा जाता है और उनकी पूरी देखभाल की जाती है, उनके आहार का ध्यान रखा जाता है और दूसरी तरफ ब्यात वाली गायों को रखा जाता है। गर्भवती गायों की डिलीवरी होते ही बछिया को अलग हटा देते हैं और मशीन से गाय का दूध निकालने लगते हैं। इससे गाय को अपने बच्चे से ज़्यादा लगाव नहीं होता है तो दूध न देने वाली समस्या भी नहीं होती है। डिलीवरी के एक हफ्ते बाद गायों को दूसरी तरफ़ शिफ्ट कर दिया जाता है।
रखा जाता है गाय की सुविधा का पूरा ध्यान
गायों को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए ओम प्रकाश ने फार्म में नीचे मैंट बिछाए हुए है ताकि गाय आराम से उस पर बैठ सके। गायों को गर्मी न लगे इसके लिए पंखें और कूलर की भी व्यवस्था है। यही नहीं फार्म में साफ़-सफ़ाई का भी पूरा ध्यान रखा गया है, कहीं आपको गंदगी नहीं नज़र आएगी। इसके अलावा उनके पास Hoof Trimmer (Hoof Cutter) मशीन भी है। गायों के खुर बढ़ जाने पर उसे Hoof Trimmer (Hoof Cutter) से साफ़ कराया जाता है। ओम प्रकाश बताते हैं कि जब गाय चलती फिरती नहीं है तो उसके खुर बढ़ जाते हैं और इस वजह से वो दूध भी कम देती है, इसलिए इस मशीन में उसके खुर को साफ़ किया जाता है। इस मशीन की कीमत 65 से 70 हजार रुपए है।
चारा कटाई की मशीन
ओम प्रकाश ने पशुओं के आहार की भी पूरी व्यवस्था की हुई है। भूसा रखने की अलग व्यवस्था है जिसमें 100-150 मन भूसा आ जाता है। इसके अलावा हरा चारा कटाई की मशीन है और एक दूसरी मशीन भी है जिसमें गेहूं के साथ ही किसी भी तरह के अनाज का दलिया आसानी से बनाय जा सकता है। यह टू इन वन मशीन है जो कटाई के साथ ही अनाज का दलिया भी बना सकती है।
उन्नत नस्ल की गायें
ओम प्रकास बताते हैं कि उनके पास Holstein Friesian, Jersey, Ayrshire के साथ ही उन्नत नस्ल की कुछ देसी गाय भी हैं। जिनमें से कुछ गाय तो एक दिन में 20-30 लीटर दूध देती है। उनका मानना है कि यदि कोई व्यक्ति पूरी जानकारी जुटाने के बाद अच्छी नस्ल की गायों के साथ डेयरी फ़ार्मिंग की शुरुआत करता है, तो सफ़ल ज़रूर होगा।
डेयरी फ़ार्मिंग में सफ़लता के लिए इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप भी पशुपालन के क्षेत्र में आना चाहते हैं, तो इस व्यवसाय में सफ़लता के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा-
- गाय खरीदते समय नस्ल का ध्यन रखें और हमेशा अच्छी दूध देने वाली नस्ल ही चुनें। साथ गायों का समय पर टीकाकरण भी ज़रूरी है।
- पशुओं की सेहत का खास ध्यान रखें। उन्हें पौष्टिक आहार देने के साथ ही पीने के साफ़ पानी की व्यवस्था करें और जहां उन्हें रखा जाना है उस जगह को भी साफ़-सुधरा बनाएं। बीमार होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
- पशुओं के रहने की जगह हवादार हो, फर्श साफ-सुधरा रहे और जगह इतन बड़ी हो कि पशु आराम से वहां रह सकें।
- पशुओं के अपशिष्ट का सही प्रबंधन करना भी ज़रूरी है ताकि आप फ़ार्म और पर्यावरण दोनों साफ़ रहे।
- दूध की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पशुओं को पौष्टिक आहार के साथ ही विशेषज्ञ की सलाह पर प्रोटीन सप्लीमेंट भी दे सकते हैं।
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