Agricultural Waste And Bio-Bitumen: क्रांतिकारी तकनीक के ज़रीये अब फसल अवशेष से बनेगी सड़क

‘पायरोलिसिस’ (Pyrolysis) वैज्ञानिक प्रोसेस (Scientific process) के जरिए Agricultural residues से बायो-बिटुमेन (Bio-bitumen) बनाने में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। सीएसआईआर (Council of Scientific and Industrial Research) के वैज्ञानिकों के अनथक प्रयासों से ये संभव हुआ।

Agricultural Waste And Bio-Bitumen: क्रांतिकारी तकनीक के ज़रीये अब फसल अवशेष से बनेगी सड़क

क्या आप जानते हैं कि जिस पराली या कृषि कचरे (Agricultural waste) को जलाने से दिल्ली-एनसीआर का आसमान धुंधला हो जाता है, अब वही देश की शानदार सड़कें बनाएगा? हां, ये कोई कल्पना नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक हकीकत है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Union Road Transport Minister Nitin Gadkari) ने एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक (Revolutionary technology) का अनावरण किया है, जो ‘कचरे को सोना’ बना देगी और ‘विकसित भारत @2047’ (‘Developed India @2047’) के सपने को साकार करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

भारत ने बनाया ‘Bio-Bitumen’

‘पायरोलिसिस’ (Pyrolysis) वैज्ञानिक प्रोसेस (Scientific process) के जरिए Agricultural residues से बायो-बिटुमेन (Bio-bitumen) बनाने में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। सीएसआईआर (Council of Scientific and Industrial Research) के वैज्ञानिकों के अनथक प्रयासों से ये संभव हुआ। केंद्रीय मंत्री गडकरी के मुताबिक, ये उपलब्धि इतनी बड़ी है कि भारत दुनिया का पहला देश बन गया है जो व्यावसायिक पैमाने (Commercial scale) पर बायो-बिटुमेन (Bio-bitumen) बनाएगा।

Agricultural Waste And Bio-Bitumen: क्रांतिकारी तकनीक के ज़रीये अब फसल अवशेष से बनेगी सड़क

आख़िर क्या है यह ‘जादू’ और कैसे काम करता है?

1.समस्या से समाधान: हर साल लाखों टन पराली और कृषि अवशेष जलाए जाते हैं, जिससे भयानक वायु प्रदूषण होता है। इसी कचरे को अब एकत्र किया जाएगा।

2.वैज्ञानिक परिवर्तन: इन अवशेषों को ‘पायरोलिसिस’ प्रक्रिया से गुजारा जाएगा। इसमें बिना ऑक्सीजन के उच्च तापमान पर सामग्री को तोड़ा जाता है, जिससे बायो-ऑयल मिलता है।

3.बायो-बिटुमेन का निर्माण: इस बायो-ऑयल से शुद्धिकरण और प्रसंस्करण के बाद बायो-बिटुमेन तैयार होगा, जो पेट्रोलियम से बने पारंपरिक बिटुमेन जैसा ही होगा।

4.सड़क निर्माण: इस बायो-बिटुमेन को अब सड़क बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। शुरुआत में इसे 15% तक पारंपरिक बिटुमेन के साथ मिलाकर उपयोग किया जाएगा।

देश को होगा चौतरफा फायदा

  • किसानों की आमदनी बढ़ेगी: किसानों को अब पराली जलाने के बजाय बेचकर अतिरिक्त आय होगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
  • प्रदूषण पर अंकुश: पराली जलाना बंद होगा, तो वायु प्रदूषण में भारी कमी आएगी, खासकर उत्तरी भारत में।
  • विदेशी मुद्रा की बचत: भारत हर साल हजारों करोड़ रुपये का कच्चा तेल आयात करता है। बायो-बिटुमेन के 15% इस्तेमाल से ही लगभग 4500 करोड़ रुपये सालाना की बचत होने का अनुमान है।
  • आत्मनिर्भर भारत: इससे तेल आयात पर निर्भरता घटेगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मार्ग प्रशस्त होगा।
  • सर्किल इकोनॉमिक: ये ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और चक्रीय अर्थव्यवस्था का शानदार उदाहरण है, जहां कचरा दोबारा मूल्यवान संसाधन बन जाता है।

ये भी पढ़ें : ICAR की डेवलप 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्मों को भारत सरकार ने राष्ट्र को किया समर्पित, जानें विस्तार से

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top