Pesticide Management Bill 2025: कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 में पुराने कानून की जगह क्या बदलेगा?

Pesticide Management Bill 2025 के ज़रिए सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक, पारदर्शी व्यवस्था और नक़ली उत्पादों पर सख़्ती देना चाहती है।

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 Pesticide Management Bill 2025

केंद्र सरकार ने देश में कीटनाशकों के नियमन को समयानुकूल और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) का मसौदा सार्वजनिक कर दिया है और इस पर किसानों, उद्योग जगत, वैज्ञानिकों व अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। सरकार का कहना है कि इस विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले सभी पक्षों की राय को शामिल किया जाएगा, ताकि एक संतुलित और व्यावहारिक कानून बनाया जा सके।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) पर सुझाव देने की अंतिम तिथि 4 फ़रवरी 2026 तय की गई है। इसके बाद इसे आगामी बजट सत्र में संसद में पेश किए जाने की तैयारी है।

पुराने कानूनों की जगह लेगा नया विधेयक

नया कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) मौजूदा कीटनाशक अधिनियम, 1968 और उसके अंतर्गत बने कीटनाशक नियम, 1971 को पूरी तरह से प्रतिस्थापित करेगा। सरकार का मानना है कि लगभग 6 दशक पुराने इन कानूनों में मौजूदा तकनीकी, वैज्ञानिक और व्यावसायिक ज़रूरतों के अनुसार बदलाव ज़रूरी हो गया था। इसी आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने एक नया और संशोधित ढांचा तैयार किया है, जिससे किसानों को सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक उपलब्ध कराए जा सकें।

किसान-केंद्रित कानून होने का दावा

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) पूरी तरह किसान-केंद्रित है। इसमें पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी जैसे प्रावधान जोड़े गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कीटनाशक कहां बना, कैसे वितरित हुआ और किस गुणवत्ता का है।

सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों से किसानों के लिए जीवन सुगमता बढ़ेगी और उन्हें नक़ली या घटिया कीटनाशकों से होने वाले नुक़सान से बचाया जा सकेगा। यही कारण है कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) को सुधारोन्मुख कानून के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

Pesticide Management Bill 2025: कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 में पुराने कानून की जगह क्या बदलेगा?

नक़ली और अवमानक कीटनाशकों पर सख़्ती

ड्राफ्ट के अनुसार कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) में नक़ली और अवमानक कीटनाशकों पर नियंत्रण के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि नक़ली कीटनाशकों से न केवल किसानों को आर्थिक नुक़सान होता है, बल्कि फ़सल, मिट्टी और पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ता है। इसके साथ ही छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने का भी प्रस्ताव है, जिससे Ease of Living और Ease of Doing Business को बढ़ावा मिले।

कंपाउंडिंग और प्रशासनिक सुधार

नए विधेयक में अपराधों के निपटारे के लिए कंपाउंडिंग का प्रावधान रखा गया है। कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 के तहत राज्य-स्तरीय प्राधिकारी को यह अधिकार दिया जाएगा कि वह निवारक प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त दंड तय करे। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत होगा और अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से बचा जा सकेगा, जिससे किसानों और कारोबारियों दोनों को राहत मिलेगी।

प्रयोगशालाओं की अनिवार्य मान्यता

ड्राफ्ट में परीक्षण प्रयोगशालाओं के अनिवार्य प्रत्यायन का भी प्रावधान शामिल किया गया है। कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) के तहत यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि किसानों तक केवल जांची-परखी और गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक ही पहुंचें। हालांकि, उद्योग जगत का कहना है कि प्रयोगशालाओं के लिए NABL या GLP जैसी मान्यताओं को लेकर विधेयक में और स्पष्टता होनी चाहिए।

2020 का मसौदा और कानूनी सवाल

यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह का विधेयक लाने की कोशिश की हो। वर्ष 2020 में भी पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट बिल का मसौदा जारी किया गया था, लेकिन वह अमल में नहीं आ सका। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) में कई प्रावधान पुराने मसौदे से मिलते-जुलते हैं।

इसके अलावा, कुछ कानूनी विसंगतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ धाराओं में अब भी पुराने कानूनों का उल्लेख है, जबकि देश में नए आपराधिक कानून लागू हो चुके हैं।

उद्योग जगत की राय और चिंताएं

एग्रो केमिकल उद्योग से जुड़े संगठनों ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) को नियामक व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम बताया है। उनका कहना है कि पहले कई बार बिना पर्याप्त ढांचे वाले संस्थानों को भी पंजीकरण मिल जाता था, जिससे गुणवत्ता से समझौता होता था। हालांकि, उद्योग जगत यह भी चाहता है कि विधेयक में यह साफ हो कि केवल उन्हीं आवेदकों को पंजीकरण मिले, जिनके पास सत्यापित और पर्याप्त उत्पादन सुविधाएं हों।

Pesticide Management Bill 2025: कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 में पुराने कानून की जगह क्या बदलेगा?

डेटा प्रोटेक्शन और निवेश का मुद्दा

उद्योग की एक और मांग रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन (RDP) को लेकर है। उनका मानना है कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) में यदि डेटा प्रोटेक्शन का प्रावधान जोड़ा जाता है, तो कंपनियां नए और ऑफ-पेटेंट मॉलिक्यूल्स में निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगी। इससे न केवल स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों को भी बेहतर और सुरक्षित विकल्प मिल सकेंगे।

सुझाव देने का मौका, 4 फ़रवरी तक समय

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) का मसौदा पूर्व-विधायी परामर्श प्रक्रिया के तहत सार्वजनिक किया गया है। इच्छुक हितधारक कृषि मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रारूप के अनुसार 4 फ़रवरी 2026 तक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।

सरकार का कहना है कि सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ही कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 (Pesticide Management Bill 2025) को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि यह कानून किसानों, उद्योग और पर्यावरण—तीनों के हितों के बीच संतुलन बना सके।

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