उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के लिए अब चारे की समस्या धीरे-धीरे ख़त्म होने की ओर है। प्रदेश सरकार ने गो-आश्रय स्थल में रहने वाले पशुओं को साल भर पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए एक बड़ी और ठोस योजना पर काम शुरू किया है। इसके तहत पूरे उत्तर प्रदेश में सरकारी गोचर और चारागाह की ज़मीनों को अवैध क़ब्ज़ों से मुक्त कराकर उन पर तेजी से हरा चारा उगाया जा रहा है।
इस पहल का मकसद सिर्फ़ गोवंश को पर्याप्त भोजन देना ही नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोज़गार के नए मौके पैदा करना भी है।
क़ब्ज़ा मुक्त ज़मीन पर लहलहा रहा हरा चारा
प्रदेश सरकार के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश में कुल 61,118 हेक्टेयर चारागाह भूमि दर्ज़ है। इनमें से अब तक 7,140.37 हेक्टेयर ज़मीन को क़ब्ज़ा मुक्त कराया जा चुका है। इस ज़मीन पर अब पशुओं के लिए हरे चारे की खेती शुरू हो चुकी है।
यह चारा सीधे गो-आश्रय स्थल में रहने वाले निराश्रित गोवंश को दिया जा रहा है, जिससे उनके भोजन की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और बाहर से चारा खरीदने पर होने वाला ख़र्च भी कम हो रहा है।
अगले दो सालों में 35,000 हेक्टेयर का बड़ा लक्ष्य
पशुपालन विभाग इस योजना को और तेज़ करने की तैयारी में है। विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि आने वाले दो वर्षों में 35,000 हेक्टेयर क़ब्ज़ा मुक्त और सिंचित भूमि पर हरा चारा उगाने का लक्ष्य तय किया गया है।
फिलहाल 1,691.78 हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड नेपियर घास लगाई जा चुकी है, जबकि 5,448.59 हेक्टेयर में जई और बरसीम जैसे अन्य हरे चारे की बुआई हो चुकी है। इन फ़सलों से गो-आश्रय स्थल में रहने वाले गोवंश को संतुलित और पोषण से भरपूर आहार मिल सकेगा।
ग्रामीण रोज़गार को भी मिल रहा बढ़ावा
इस पूरी योजना से ग्रामीण इलाकों में रोज़गार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। चारागाह की ज़मीनों को समतल करने, बाड़ लगाने और खाई खोदने जैसे काम मनरेगा के तहत कराए जा रहे हैं।
इससे एक तरफ गो-आश्रय स्थल के लिए चारा उत्पादन आसान हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों को काम भी मिल रहा है। सरकार का मानना है कि यह मॉडल गांवों की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में भी मदद करेगा।
चारा उत्पादन में आगे निकले ये ज़िले
उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों ने इस योजना में शानदार काम किया है। हरदोई, सुल्तानपुर, कानपुर नगर और रामपुर हरे चारे के उत्पादन में शीर्ष चार ज़िलों के रूप में सामने आए हैं।
इन ज़िलों में टैग की गई गोचर भूमि पर शत-प्रतिशत हरा चारा उगाया जा रहा है। यहां से तैयार चारा सीधे नजदीकी गो-आश्रय स्थल तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे वहां रहने वाले पशुओं को नियमित और ताज़ा आहार मिल रहा है।
गोवंश के स्वास्थ्य पर भी सरकार का फ़ोकस
सरकार सिर्फ़ भोजन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गोवंश के स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर है। उत्तर प्रदेश में पड़ रही कड़ाके की ठंड और शीतलहर को देखते हुए सभी गो-आश्रय स्थल में विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन निर्देशों में पशुओं को बोरे या चट्ट ओढ़ाना, ठंडी हवा से बचाव के लिए तिरपाल लगाना और रात के समय सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना शामिल है, ताकि गोवंश ठंड से बीमार न पड़े।
साल भर चारा मिलने से सुधरेगी स्थिति
हरे चारे की नियमित उपलब्धता से गो-आश्रय स्थल में रहने वाले पशुओं की सेहत में साफ़ सुधार देखने को मिल रहा है। पहले कई जगहों पर चारे की कमी के कारण गोवंश कमज़ोर हो जाता था, लेकिन अब स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है।
सरकार का मानना है कि जब स्थानीय स्तर पर चारा उगाया जाएगा, तो उसकी गुणवत्ता बेहतर होगी और लागत भी कम आएगी। इससे लंबे समय तक इस व्यवस्था को टिकाऊ बनाए रखना आसान होगा।
अवैध क़ब्ज़ों पर भी लग रही रोक
इस योजना का एक बड़ा फ़ायदा यह भी है कि चारागाह और गोचर की ज़मीनों से अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं। इससे न केवल गो-आश्रय स्थल को चारे की स्थायी व्यवस्था मिल रही है, बल्कि सरकारी ज़मीनों का सही उपयोग भी सुनिश्चित हो रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे अभियानों को जारी रखा जाएगा, ताकि चारागाह भूमि को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके।
गो-आश्रय स्थल व्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में कदम
इस पूरी पहल से साफ़ है कि उत्तर प्रदेश सरकार गो-आश्रय स्थल की व्यवस्था को लंबे समय तक मज़बूत बनाना चाहती है। हरा चारा, बेहतर देखभाल और ठंड से बचाव जैसे उपायों से निराश्रित गोवंश की हालत में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि आने वाले समय में और ज़्यादा ज़मीन को क़ब्ज़ा मुक्त कराकर चारा उत्पादन बढ़ाया जाएगा, ताकि प्रदेश के हर गो-आश्रय स्थल को पर्याप्त भोजन मिल सके।
ग्रामीण विकास और पशु कल्याण साथ-साथ
कुल मिलाकर यह योजना पशु कल्याण और ग्रामीण विकास—दोनों को एक साथ आगे बढ़ा रही है। एक तरफ गो-आश्रय स्थल में रहने वाले गोवंश को पौष्टिक आहार और बेहतर देखभाल मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों को रोज़गार के मौके भी मिल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल दिखाती है कि सही योजना और ज़मीन के सही इस्तेमाल से पशुओं और इंसानों—दोनों की ज़िंदगी बेहतर बनाई जा सकती है।
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