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पंजाब खेती के मामले में एक संपन्न राज्य हैं, जहां के किसान खुशहाल है और ज़मीन बहुत उपजाऊ। आमतौर पर पंजाब में गेहूं, मक्का, सरसों, गन्ना और धान की खेती की जाती है, मगर अब वहां के प्रगतिशील किसान पारपंरिक खेती से इतर नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। जहां कुछ किसान नई क़िस्म की फ़सलों के साथ एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं, वहीं गुरविंदर सिंह जैसे किसान फूलों की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं।
पंजाब के पटियाला ज़िले के खेड़ीमला गांव के प्रगतिशील किसान गुरविंदर सिंह 11-12 एकड़ में जाफरी गेंदा और बिजली (सफ़ेद रंग का फूल) जैसे फूलों की खेती करके सालभर उत्पादन ले रहे हैं। कैसे करते हैं वो फूलों की खेती और कैसे तैयार करते हैं नर्सरी? इस बारे में उन्होंने विस्तार से चर्चा की किसान ऑफ़ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली से।
कब शुरू की गेंदे की खेती?
खेड़ीमला गांव के किसान गुरविंदर सिंह बताते हैं कि उनके पिता ने 1998-99 में छोटे से क्षेत्र से फूलों की खेती की शुरुआत की थी, जो आज 11-12 एकड़ में फैल चुकी है। गुरविंदर बताते हैं कि वो जाफरी गेंदा और बिजली (सफ़ेद रंग का फूल) की खेती करते हैं। ख़ास बात ये है कि वो पूरे साल फूलों की खेती करते हैं। उनका कहना है कि वो त्योहारों के हिसाब से फूल लगाते हैं। वैसे भी फूलों की हर क़िस्म के उगने का समय अलग-अलग होता है, तो इसका पता लगाकर वो उसी हिसाब से पौधे लगाते हैं।
मिट्टी और पानी की ज़रूरत
गुरविंदर सिंह बताते हैं कि जिस ज़मीन पर फूल लगाना है उसकी मिट्टी का स्तर दूसरी ज़मीन से थोड़ा ऊपर होना चाहि। जाफरी गेंदे की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी होनी चाहिए। फूलों के पौधों को गर्मियों के मौसम में 4-5 दिन में पानी देने की ज़रूरत पड़ती है, जबकि सर्दियों 15-20 दिन में पानी देना होता है।
खुद ही तैयार करते हैं बीज और नर्सरी
गुरविंदर सिंह बताते हैं वो खुद ही बीज बनाते हैं और फूलों की नर्सरी तैयार करते हैं। खेत में पौध लगाने के बाद 70-80 दिनों में फूल आने लगते हैं। वो बताते हैं कि जाफरी गेंदा जुलाई से नवंबर महीने में लगता है। फिर वो कलकत्ते वाला लड्डू गेंदा लगाते हैं। इसे पूरे साल लगा सकते हैं, मगर इसमें भी अलग-अलग क़िस्में होती हैं। सभी क़िस्में मौसम के हिसाब से ही लगती हैं। जाफरी गेंदे की भी 5 क़िस्में होती है जिसे जुलाई से नवंबर के बीच लगाया जा सकता है। फूलों के पौध से पौध की दूरी 15-16 इंच होती है जबकि लाइन से लाइन की दूरी 3 फुट के क़रीब रखी जाती है।
फूलों में होने वाली समस्याएं
गुरविंदर बताते हैं कि फूलों की खेती में फंगस की समस्या सबसे अधिक आती है। इसके अलावा मौसम के हिसाब से बीमारियां भी लगती है जिसे कीटनाशकों से नियंत्रित किया जा सकता है।
कितना होता है उत्पादन?
गुरविंदर बताते हैं कि एक एकड़ में 80-90 क्विंटल तक उत्पादन मिलता है। इतना उत्पादन ढाई-तीन महीने में होता है। जहां तक दूसरी फ़सलों से अधिक मुनाफ़े का सवाल है तो गुरविंदर कहते हैं कि फूलों की खेती में मेहनत ज़्यादा लगती है। मगर बाज़ार में इसकी क़ीमत कम होने पर भी मुनाफ़ा हो ही जाता है।
कैसे तैयार करते हैं नर्सरी?
वो कहते हैं कि फूलों की नर्सरी जुलाई से अक्टूबर तक खुले में ही तैयार करते हैं। आगे वो सर्दियों में नर्सरी तैयार करने के लिए पॉलीहाउस लगाने की तैयारी कर रहे हैं, साथ ही इसमें वो सब्ज़ियों की भी नर्सरी तैयार करने की सोच रहे हैं।
किसानों की सबसे बड़ी समस्या
गुरविंदर का कहना है कि फूलों की खेती करने वाले नए किसानों के लिए मंडी एक बड़ी समस्या है। क्योंकि उनके इलाके में फूलों की कोई मंडी नहीं है। क्योंकि वो कई सालों से खेती कर रहे हैं तो उन्हें ज़्यादा समस्या नहीं आती है और उनका पूरा फूल पंजाब में ही बिक जाता है। दूसरे राज्यों से भी मांग आती है, मगर उनके पास फूल ही नहीं बचते हैं।
वो बताते हैं कि कभी उनका सपना था कि जब भी किसी होल सेलर का फोन आए फूलों के लिए तो उनके पास पर्याप्त फूल होने चाहिए और ये सपना अब पूरा हो गया है, क्योंकि अब उनके पास हर महीने फूल रहते हैं, जब तक कोई कुदरती आपदा न आए।
गुरविंदर को अपनी प्रगतिशील खेती के लिए कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। अब उनकी योजना फूलों की खेती में नई-नई तकनीक को इस्तेमाल करने की है। वो बीज खुद ही तैयार कर रहे हैं और उनकी कोशिश है कि इसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाया जाए। नए किसानो को वो सलाह देते हैं कि फूलों की खेती हमेशा छोटे पैमाने पर ही शुरू करें। इसमें शुरूआत में थोड़ी दिक्कत आएगी, मगर 1-2 साल में ठीक हो जाएगी, तो किसान हिम्मत न हारे और काम जारी रखें।
क्या है जाफरी गेंदा?
जाफरी गेंदा गेंदे की ही एक क़िस्म है। यह बड़े आकार का आकर्षक पीले और नारंगी रंग का होता है। ये फूल काफी समय तक ताज़ा रहता है इसलिए इसकी मांग बहुत अधिक है। इसका उपयोग सजावट, पूजा-पाठ और औषधीय गुणों के लिए किया जाता है। जैविक खेती में भी इसका उपयोग किया जाता है। सर्दियों में ये फूल खूब खिलता है और इसे आसानी से उगाया जा सकता है।
कोई चाहे तो इसे अपने घर पर गमले में भी आसानी से उगा सकता है, बस पौधे को अच्छी धूप मिलनी चाहिए। इसके पौधों में महीने में एक बार वर्मीकम्पोस्ट देने पर फूल अच्छे आते हैं। इसकी खेती से किसान अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं, क्योंकि ये फूल अधिक पैदावार देता है, जिससे छोटे किसान जिनके पास कम ज़मीन है, उन्हें भी अच्छा उत्पादन मिल सकता है।
फ़ायदेमंद है फूलों की खेती
पारंपरिक फ़सलों से अलग अगर किसान कुछ और करना चाहता है, तो फूलों की खेती एक अच्छा विकल्प है। गेंदे के अलावा गुलाब की खेती भी वो कर सकते हैं, क्योंकि गुलाब के फूलों की मांग हमेशा रहती है और बाज़ार में इसकी क़ीमत भी अधिक मिलती है। इसके अलावा रजनीगंधा की खेती भी किसान कर सकते हैं। इस खुशबूदार फूल का इस्तेमाल सजावट में खूब होता है और इसकी मांग भी अच्छी है। लैवेंडर की खेती करना भी किसानों के लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। इसका इस्तेमाल तेल और सौंदर्य प्रसाधन बनाने में किया जाता है।
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