Economic Survey 2025-26 :आर्थिक सर्वेक्षण ने बताए कृषि के चार सूत्र, इनपुट क्वालिटी में इज़ाफा, Irrigation से लेकर Diversification तक

भारत का आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey 2025-2026) देश की अर्थव्यवस्था की एक सालाना रिपोर्ट है। इसे देश का "आर्थिक रिपोर्ट कार्ड" भी कहा जाता है।

Economic Survey 2025-26 :आर्थिक सर्वेक्षण ने बताए कृषि के चार सूत्र, इनपुट क्वालिटी में इज़ाफा, Irrigation से लेकर Diversification तक

गुरुवार 29 जनवरी 2026 को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (Economic Survey 2025-26) ने किसानों की ताकत और चुनौतियों की गहरी पड़ताल की है। Economic Survey ने साफ कहा है कि ‘Viksit Bharat’ का सपना तभी साकार होगा, जब हमारा किसान मज़बूत होगा। खेती सिर्फ अनाज पैदा करने का ज़रिया नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका और समावेशी विकास का सेंटर प्वाइंट है। सर्वेक्षण ने कृषि को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए चार बड़े उपाय सुझाए हैं, जिन पर 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2026 ( Budget 2026) में नज़र रखनी होगी।

Four-Point Strategy: Irrigation से लेकर Diversification तक

सर्वेक्षण ने जो चार मेन आइडियाज़ बताए हैं, वे समस्याओं की जड़ में जाकर हल ढूंढते हैं- 

सिंचाई व्यवस्था को मज़बूती: ‘पानी ही ज़िदगी है’ – ये कहावत खेती के लिए सबसे सच है। सर्वेक्षण ने पानी की उपलब्धता को सबसे पहली प्राथमिकता बताया है। इसमें पुराने जलाशयों को दोबारा से जिंदा करना और मॉर्डन ड्रिप व स्प्रिंकलर इरगेशन को बढ़ावा देना शामिल है। खुशी की बात है कि Gross irrigated area बढ़कर 55.8 फीसदी हो गया है।

कृषि अनुसंधान को बढ़ावा: Climate change और नई बीमारियों से लड़ने के लिए रिसर्च ज़रूरी हथियार है। सर्वे ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को मिलकर Climate resilient, ज़्यादा उपज वाली बीज किस्मों पर काम करने को कहा है। बीज उप-मिशन के तहत अब तक 2.85 करोड़ किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज मिले हैं।

उर्वरकों के इस्तेमाल में सुधार: जमीन की सेहत बिगड़ रही है। इसके लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) एक बड़ी पहल है। अब तक 25.55 करोड़ कार्ड जारी हो चुके हैं। टारगेट है कि केमिकल खाद के साथ जैविक खाद का संतुलित इस्तेमाल बढ़े, ताकि मिट्टी में कार्बन बढ़े और पोषक तत्वों का संतुलन ठीक हो।

फसलों का विविधीकरण: सिर्फ गेहूं-धान पर निर्भरता घटानी होगी। पानी की उपलब्धता के हिसाब से अलग-अलग फसलें, बागवानी, मछली पालन, डेयरी जैसे क्षेत्रों पर फोकस करना होगा। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और किसान की आमदनी के सोर्स भी।

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राज्यों के इनोवेशन: सीखने लायक मिसालें

Economic Survey 2025-26 ने देश भर के राज्यों की सफल पहलों को भी अंडरलाइन किया है, जो दिखाता है कि लोकल लेवल पर इनोवेशन कितना कारगर हो सकता है- 

  • आंध्र प्रदेश: ड्रोन और जीआईएस तकनीक से डिजिटल भूमि पट्टे जारी कर 86,000 से ज्यादा भूमि विवाद सुलझाए।
  • मध्य प्रदेश: ‘सौदा पत्रक’ डिजिटल प्लेटफॉर्म से किसानों से सीधी एमएसपी खरीद कर भुगतान में पारदर्शिता लाई।
  • असम: नई सिंचाई योजनाओं से सिंचाई क्षेत्र में 24.28 फीसदी की उल्लेखनीय बढ़ोतरी की।
  • कर्नाटक: ‘Fruits’ प्लेटफॉर्म से 55 लाख किसानों का डेटाबेस बनाकर योजनाओं का फायदा सीधे पहुंचाया।

चुनौतियां और भविष्य का रास्ता

हालांकि कृषि क्षेत्र ने डेयरी, मत्स्य पालन और बागवानी (Dairy, fisheries and horticulture) में शानदार प्रगति की है, लेकिन जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून और भूजल का गिरता स्तर (Climate change, erratic monsoons, and falling groundwater levels) बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। 

सर्वे इनसे निपटने के लिए प्रिसिजन एग्रीकल्चर, डिजिटल टूल्स और डेटा एनालिटिक्स (Precision agriculture, digital tools and data analytics) के इस्तेमाल पर ज़ोर देता है।

ई-नाम जैसे प्लेटफॉर्म से 1.79 करोड़ किसान जुड़ चुके हैं। 10,000 किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाने का लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया गया है। 

कृषि अवसंरचना कोष (Agricultural Infrastructure Fund) के जरिए 1.23 लाख करोड़ रुपये जुटाकर हजारों वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट बनाई जा रही हैं।

बजट पर टिकी हैं नजरें

Economic Survey 2025-26 ने रास्ता दिखा दिया है। अब बजट 2026 में इन सिफारिशों के लिए कितना पैसा और कैसी Policy commitment मिलती है, ये देखना होगा। किसानों को सस्ता कर्ज, बेहतर बीमा, एमएसपी का विस्तार और प्रोसेसिंग बिज़नेस को प्रोत्साहन जैसे कदमों का इंतज़ार है। अगर सर्वेक्षण में बताए गए ये चार मंत्र—पानी, रिसर्च, संतुलित खाद और विविध फसल, बजट में मजबूती से उतरते हैं, तो ज़रूरी है कि भारत का किसान देश को ‘विकसित भारत’ बनाने की ओर एक नई उड़ान भरेगा।

आर्थिक सर्वेक्षण क्या है ? 

भारत का आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) देश की अर्थव्यवस्था की एक सालाना रिपोर्ट है। इसे देश का “आर्थिक रिपोर्ट कार्ड” भी कहा जाता है।

मुख्य बातें:

कौन तैयार करता है? केंद्र सरकार का वित्त मंत्रालय, मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) की अगुवाई में।

कब पेश होता है? आमतौर पर केंद्रीय बजट से ठीक एक दिन पहले संसद में वित्त मंत्री द्वारा। (जैसे, 2025-26 का सर्वेक्षण 29 जनवरी 2026 को पेश हुआ था)।

क्या होता है इसमें? ये पिछले एक साल में देश की आर्थिक हालत का पूरा ब्यौरा देता है। इसमें आर्थिक विकास (GDP), महंगाई (मुद्रास्फीति), रोजगार, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट, विदेशी मुद्रा भंडार जैसे अहम आंकड़ें Analysis होते हैं।

भविष्य का अनुमान: ये आने वाले साल के लिए अर्थव्यवस्था की संभावनाएं और चुनौतियां भी बताता है।

इसका क्या यूज़ है? ये रिपोर्ट सरकार के लिए बाध्यकारी (कानूनी रूप से जरूरी) तो नहीं होती, लेकिन ये अगले बजट की रूपरेखा तय करने और नीतियां बनाने के लिए एक अहम आधार बनती है।

इतिहास: भारत का पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में पेश हुआ था। 1964 से पहले इसे बजट के साथ ही पेश किया जाता था, लेकिन अब इसे अलग से पेश किया जाता है।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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