AMR के सख़्त नियमों के बाद भी यूरोप में भारत की ऐतिहासिक सफलता, मछली से लेकर डेयरी प्रोडक्ट्स मार्केट पूरी तरह रहेगा खुला

यूरोपीय यूनियन के नए AMR नियमों के बावजूद भारत के कृषि और सहायक क्षेत्रों के निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मछली, अंडा, शहद और पशु उत्पाद यूरोप भेजे जाते रहेंगे। इससे किसानों, मछुआरों और कृषि से जुड़े उद्योगों को बड़ी राहत मिली है।

AMR के सख़्त नियमों के बाद भी यूरोप में भारत की ऐतिहासिक सफलता, मछली से लेकर डेयरी प्रोडक्ट्स मार्केट पूरी तरह रहेगा खुला

यूरोप का बाज़ार (European market) दुनिया के लिए सबसे ‘Difficult Exam’ माना जाता है। वहां के नियम इतने सख़्त हैं कि कई देशों के एक्सपोर्टर्स के पसीने छूट जाते हैं। सितंबर 2026 से यूरोपीय संघ (European Union) ने एक और कड़ा कानून लागू करने का ऐलान किया है। इसका नाम है-Antimicrobial Resistance Regulation (AMR)। इसका मकसद ये  देखना है कि खाने-पीने की चीज़ों (जैसे मछली, अंडा, शहद, दूध) में एंटीबायोटिक्स जैसी दवाओं के ख़तरनाक अवशेष न हों, ताकि लोगों में दवा प्रतिरोधक क्षमता (drug resistance) न बढ़े।

AMR कानून की ग्लोबल बिज़नेस में हलचल और भारत  

इस नए कानून ने ग्लोबल बिज़नेस में हलचल मचा दी। कई देशों को डर सताने लगा कि उनके करोड़ों-अरबों के निर्यात पर पाबंदी लग सकती है। भारत के लिए ये ख़तरा और भी बड़ा था, क्योंकि सिर्फ मछली और समुद्री प्रोडक्ट्स का ही यूरोप को निर्यात 9,300 करोड़ रुपये सालाना से ज़्यादा का है। पूरा व्यापार ठप होने का ख़तरा था। लेकिन भारत ने अपनी तैयारी और मेहनत से यह जंग जीत ली है। 

यूरोप के इस कदम से घबराने की बजाय, भारत ने इसे एक चुनौती और मौके के रूप में लिया। पिछले कई सालों से भारत की Export System को मज़बूत करने पर जोर था। AMR की चुनौती ने उस तैयारी को आज़माने का मौका दिया।

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शिकायत के बजाय सल्यूशन पर बात

Farsighted Preparation And Shrewd Diplomacy

 जब यूरोप ने नए नियमों का प्रस्ताव रखा, तभी से भारत सरकार के वाणिज्य विभाग और यूरोपीय आयोग (Department of Commerce and the European Commission) के बीच गहरी बातचीत शुरू हो गई। भारत ने यूरोप की चिंताओं को गंभीरता से लिया और उन्हें ये भरोसा दिलाया कि हमारी व्यवस्था पहले से ही मज़बूत है और हम और सुधार करने को तैयार हैं। भारत ने शिकायत करने की बजाय सल्यूशन पर बात की।

Export Inspection Council  (EIC) की अहम भूमिका

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी संस्थाएं हैं। EIC ने European standards के मुताबिक देश भर में निरीक्षण, टेस्टिंग और प्रमाणन (Inspection, testing and certification) की पूरी चेन को और चाक-चौबंद बनाया। अब प्रोडक्ट ‘Farm to Fork’ यानी खेत से लेकर यूरोप की प्लेट तक, हर कदम पर कड़ी जांच से गुजरता है। हर बैच का रिकॉर्ड रखा जाता है, ताकि किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

MPEDA और APEDA जैसी एजेंसियों का योगदान

सिर्फ कानून बनाने से काम नहीं चलता। मत्स्य पालन निर्यात विकास प्राधिकरण (Marine Products Export Development Authority) और कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण Processed Food Products Export Development Authority) ने निर्यातकों, किसानों और प्रोसेसिंग यूनिट्स को ट्रेनिंग दी है। उन्हें बताया गया कि यूरोप के नए मानकों पर ख़रा उतरने के लिए प्रोडक्शन प्रोसेस में क्या बदलाव करने होंगे।

भारत यूरोप की ‘White List’ में शामिल

इन कोशिशों का नतीजा जादुई रहा। यूरोप ने भारत को उन चुनिंदा देशों की ‘White List’ में शामिल कर लिया, जो सितंबर 2026 के बाद भी बिना किसी रुकावट अपने Product Exports कर सकते हैं।

1-समुद्री मछली पालन (Aquaculture), अंडे, शहद और चमड़ा जैसे प्रोडक्ट्स के लिए बाज़ार पूरी तरह खुला रहेगा।

2-डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के लिए भी एक्सपोर्ट जारी रह सकता है, बशर्ते भारत अपनी निगरानी जारी रखे।

सिर्फ पैसा नहीं, भरोसे की जीत

ये सिर्फ़ Commercial victory नहीं है, बल्कि भारत की Quality And Reliability पर एक मोहर है।

  • Strengthening Self-Reliance: ये ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सही मिसाल है, दुनिया की मांगों के अनुसार खुद को इतना मज़बूत बनाना कि हर चुनौती को अवसर में बदल दें।
  • Global Image: पूरी दुनिया ने देखा कि भारत न सिर्फ नियम बना सकता है, बल्कि दुनिया के सबसे सख्त नियमों को पूरा करने की क्षमता भी रखता है।
  • Small Farmers Benefit: इससे हजारों मछली पालक, मुर्गी पालक, शहद उत्पादक और डेयरी किसानों को एक स्थिर और मुनाफे वाला बाज़ार मिला रहेगा, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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