Table of Contents
ज़रा सोचिए, एक दशक पहले तक देश के सामने सबसे बड़ा सवाल ये था कि क्या हम अपनी बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त अनाज (food grain production)पैदा कर पाएंगे? आज, उस सवाल का जवाब एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में सामने है। कृषि मंत्रालय (Ministry of Agriculture) के ताजा आंकड़े देश के किसानों के साहस और मेहनत का सुनहरा चैप्टर हैं। साल 2024-25 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 357.73 मिलियन टन (The total food grain production of the country is 357.73 million tonnes.) तक पहुंच गया है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ठोस नींव है।
पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त, 10 साल में ऐतिहासिक छलांग
ये उपलब्धि और भी शानदार इसलिए है क्योंकि ये पिछले साल (2023-24) के 332.30 मिलियन टन के मुकाबले लगभग 8 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी है। लेकिन असली चमत्कार तब देखने को मिलता है जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं। साल 2015-16 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन (food grain production) 251.54 मिलियन टन था। इसका मतलब है कि पिछले 10 सालों में हमने 106 मिलियन टन से भी ज्यादा की ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। ये कोई छोटी उपलब्धि नहीं, बल्कि एक कृषि क्रांति है जिसने देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया है।
चावल और गेहूं में रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन
इस सफलता की कहानी के मेन हीरो चावल और गेहूं हैं।
चावल: चावल का उत्पादन 1501.84 लाख टन के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है, जो पिछले साल से 123.59 लाख टन ज्यादा है।
गेहूं: गेहूं में भी शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस साल गेहूं उत्पादन 1179.45 लाख टन रहा, जो पिछले साल से 46.53 लाख टन अधिक है।
तिलहन और दलहन में ‘आत्मनिर्भरता’ के संकेत
सरकार के ‘तिलहन मिशन’ ने भी शानदार नतीजे दिए हैं। कुल तिलहन उत्पादन 429.89 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले साल से 8 फीसदी से भी अधिक की वृद्धि है। इसमें मूंगफली (119.42 लाख टन) और सोयाबीन (152.68 लाख टन) का रिकॉर्ड उत्पादन मुख्य रहा। ये उपलब्धि इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे देश को खाद्य तेलों (edible oils) के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता साफ होता है।
दलहन यानी दालों के क्षेत्र में भी स्थिति बेहतर हुई है। कुल दलहन उत्पादन 256.83 लाख टन रहा। चना (111.14 लाख टन), मूंग (42.44 लाख टन) और तूर (36.24 लाख टन) जैसी प्रमुख दालों का उत्पादन बढ़ा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तूर, उड़द, चना और मूंग जैसी दालों पर एमएसपी खरीद की गारंटी से बड़ी संख्या में किसानों को फायदा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अब ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ से दालों के उत्पादन में और तेजी आएगी।
दूसरी प्रमुख फसलों का बेहतर प्रदर्शन
-
मक्का: 434.09 लाख टन
-
श्री अन्न (मोटे अनाज): 185.92 लाख टन
-
गन्ना: 4546.11 लाख टन
-
कपास: 297.24 लाख गांठें
सफलता के पीछे का रहस्य
ये सफलता महज एक संयोग नहीं है। ये सरकार की नीतियों, किसानों की कड़ी मेहनत और वैज्ञानिक तरीकों के मेलजोल का नतीजा है। एमएसपी में बढ़ोतरी, किसान क्रेडिट कार्ड, बेहतर बीज, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और किसानों तक वक्त पर सलाह पहुंचाना जैसे कदमों ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
इसे भी पढ़िए: American Market में भारतीय किसानों के लिए सुनहरा मौका! Tariff छूट से मसालों और चाय के एक्सपोर्ट को बढ़ावा

