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भारत और यूरोपीय संघ (India And The European Union) ने आखिरकार लंबे वक्त से चल रही बातचीत पूरी करके एक Free Trade Agreements (FTA) को अंतिम रूप देने का ऐलान कर दिया। ये भारत के लिए 19वां और सबसे बड़े बिज़नेस पार्टनरशिप के साथ किया गया सबसे अहम समझौता है। 27 यूरोपीय देशों के इस समूह के साथ ये डील इंडियन एक्सपोर्ट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का काम करेगी।
क्यों है ये FTA इतना ज़रूरी?
दरअसल, पूरी दुनिया आज अमेरिका की ओर से लगाए गए High import duties (टैरिफ) के कारण व्यापारिक उथल-पुथल (Commercial turmoil) का सामना कर रही है। भारत को भी अमेरिका से 50 फीसदी तक ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है, जिससे एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है। ऐसे में, EU के साथ FTA भारत के लिए एक नया ‘Trade Safety Net’ साबित होगा। इससे न सिर्फ भारतीय निर्यातकों को अपने बाजार बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि चीन पर निर्भरता घटाने में भी सफलता मिलेगी। EU भी अमेरिकी टैरिफ के ख़तरे से बचने के लिए भारत जैसे बड़े बाजार की तरफ देख रहा था।
क्या-क्या बदलेगा? आम आदमी से लेकर किसानों को क्या मिलेगा?
FTA का मतलब है आयात शुल्क में भारी कटौती (Reduction In Import Duties) या खत्म। इससे यूरोपीय सामान भारत में सस्ते होंगे और भारतीय सामान यूरोप में आसानी से पहुंचेंगे। ख़ासकर कृषि और खाद्य उत्पादों (Agriculture and food products) पर बड़ा फैसला हुआ है-
1.ज़ैतून का तेल, मार्जरीन, वनस्पति तेल: इन पर लगने वाली 45 फीसदी तक की ड्यूटी अगले 5 साल में पूरी तरह खत्म हो जाएगी। यानी, इन जरूरी चीजों के दाम काफी घटेंगे।
2.प्रोसेस्ड फूड: ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट जैसी चीजों पर 50 फीसदी तक के ऊंचे टैरिफ हटेंगे, जिससे ये ज्यादा किफायती होंगी।
3.फलों के जूस और नॉन-अल्कोहलिक बीयर: 55 फीसदी तक के टैरिफ घटाकर शून्य कर दिए जाएंगे।
4.कीवी और नाशपाती जैसे फल: 33 प्रतिशत की ड्यूटी कोटा सिस्टम के तहत कम होकर 10 फीसदी रह जाएगी।
कुल मिलाकर, यूरोपीय कृषि उत्पादों पर 36 फीसदी से ज्यादा के औसत टैरिफ हटेंगे या कम होंगे। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को क्वालिटी प्रोडक्ट्स की अधिक पसंद मिलेगी और कीमतें कम होंगी।
किन उद्योगों को मिलेगा फायदा?
ये समझौता सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं है। फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, मशीनरी और तकनीक (टेक्नोलॉजी) जैसे प्रमुख उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। भारतीय दवा कंपनियों, कार निर्माताओं और कपड़ा उद्योग को यूरोप के विशाल बाजार में एंट्री आसान होगी।
भारत और EU के बीच सामान का व्यापार 136.53 अरब डॉलर
ये समझौता एक मज़बूत आधार पर खड़ा है। 2024-25 में भारत और EU के बीच सामान का व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर था। इसके साथ ही EU भारत का सबसे बड़ा सामान व्यापार भागीदार बन गया है। EU, भारत के कुल निर्यात का 17% और कुल आयात का 9 फीसदी है।
1.भारत के मुख्य निर्यात: पेट्रोलियम उत्पाद (डीजल, ATF), इलेक्ट्रॉनिक्स (स्मार्टफोन), कपड़ा, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, आभूषण। (Petroleum products (diesel, ATF), electronics (smartphones), textiles, machinery, pharmaceuticals, jewelry)
2.भारत के मुख्य आयात: मशीनरी, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स, विमान, वैज्ञानिक उपकरण, कारें। (Machinery, computers, electronic parts, aircraft, scientific instruments, cars)
‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए एक बड़ी छलांग
2014 के बाद से, भारत ने मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, UAE, UK, ओमान, EFTA देशों और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है। EU के साथ यह FTA इस रणनीति का सबसे बड़ा और सबसे अहम स्टेप है। ये सिर्फ एक Business deal नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक साख (Global economic credibility), रणनीतिक साझेदारी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को मज़बूती देने वाला कदम है।
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