बदलते मौसम में अब नहीं होगा नुकसान, अब AI तय करेगा कब बोएं, कब सींचें और कहां बेचें फसल!

अब AI खेत-खलिहान में उतरकर किसानों की तकदीर बदलने वाला है। केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी (Union Agriculture Secretary Devesh Chaturvedi) ने हाल ही में 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट' (India AI Impact Summit) में इस क्रांतिकारी बदलाव का खुलासा किया।

बदलते मौसम में अब नहीं होगा नुकसान, अब AI तय करेगा कब बोएं, कब सींचें और कहां बेचें फसल!

तकनीक (Technology) ने एक बार फिर से ये साबित कर दिया है कि वो इंसान की जिंदगी बदलने की ताकत रखती है। अब यह ताकत भारत के अन्नदाता यानी किसानों की मुट्ठी में आ गई है। अब तक आपने AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI means Artificial Intelligence) को गाड़ियों में, मोबाइल में या चैटबॉट में देखा होगा, लेकिन अब यही AI खेत-खलिहान में उतरकर किसानों की तकदीर बदलने वाला है। केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी (Union Agriculture Secretary Devesh Chaturvedi) ने हाल ही में ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ (India AI Impact Summit) में इस क्रांतिकारी बदलाव का खुलासा किया।

केंद्र सरकार ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अब वो किसानों को सिर्फ मौसम की ख़बर ही नहीं देगी, बल्कि AI की मदद से उन्हें ये भी बताएगी कि मंडी में कौन सी सब्ज़ी का क्या भाव है, कब बारिश होगी और किस कीट से फसल को बचाना है। ये कोई आम योजना नहीं, बल्कि Digital India के खेतों में उतरने की सबसे बड़ी मुहिम है।

100 सालों का डेटा और AI का जादू

केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी (Union Agriculture Secretary Devesh Chaturvedi) ने बताया कि सरकार ने भारतीय मौसम विभाग (IMD) के 100 सालों के डेटा को AI मॉडल से जोड़ा। इसकी मदद से अब एक हफ्ते और एक महीने के मौसम का पूर्वानुमान पहले से कहीं ज्यादा सटीक हो गया है।

पहले किसान भरोसे पर या परंपरा के आधार पर बुवाई करते थे, लेकिन अब वे AI के बताए गणित पर भरोसा कर रहे हैं। चतुर्वेदी ने बताया, ‘हमें किसानों से फीडबैक मिला है कि उन्होंने AI मॉडल की भविष्यवाणियों के आधार पर सिंचाई और बुवाई के फैसले लिए।’ यानी अब मौसम का गलत अंदाजा लगाकर फसल बर्बाद करने का जोखिम काफी हद तक कम हो गया है।

अब ‘भारत Vistaar’ बनेगा किसानों की संजीवनी

सरकार अब इस टेक्नोलॉजी को और धार देने जा रही है। अब सिर्फ मौसम ही नहीं, बल्कि किसानों को ये भी पता चलेगा कि उनकी फसल का मंडी में क्या रेट है, कहां ज्यादा भाव मिल रहा है और कहां मंडी सस्ती है।

ये सब संभव होगा ‘भारत Vistaar’ (VISTAAR) नाम के एक महत्वाकांक्षी प्लेटफॉर्म से। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 17 फरवरी को जयपुर में इस योजना की शुरुआत की। यह सिर्फ एक वेबसाइट या ऐप नहीं है, बल्कि यह किसानों का डिजिटल साथी है।

कैसे काम करेगा ये AI सिस्टम?

सबसे बड़ी बात यह है कि अब किसानों को जानकारी के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। अक्सर सरकार की अलग-अलग योजनाओं की अलग-अलग वेबसाइट या ऐप होते थे। इसे चतुर्वेदी ने Digital Red-Tapism करार दिया। अब ‘भारत Vistaar’ इन सबको एक मंच पर लाएगा।

यह प्लेटफॉर्म किसानों को ये सुविधाएं देगा- 

  • मौसम की सटीक जानकारी: कब बारिश होगी, कब तेज हवा चलेगी।
  • मंडी भाव: आसपास की मंडियों में फसल के ताजे दाम।
  • फसल सलाह: ICAR के वैज्ञानिकों की बताई ‘पैकेज ऑफ प्रैक्टिस’ यानी कब कौन सी दवा डालनी है, कब खाद देनी है।
  • सरकारी योजनाएं: केंद्र सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी और आवेदन की स्थिति।

एक फोन कॉल और मिलेगा पूरा हल

सबसे गहरी बात ये है कि सरकार अगले छह महीनों में एक AI-बेस्ड हेल्पलाइन लॉन्च करने वाली है। जैसे ही किसान अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से हेल्पलाइन पर फोन करेगा, AI सिस्टम उसकी पहचान कर लेगा।

सिस्टम के पास पहले से हीAgriStack Database में किसान की पूरी डिजिटल प्रोफाइल मौजूद होगी, जैसे उसके पास कितनी ज़मीन है, उसने कौन सी फसल उगाई है, उसने कितना खाद ख़रीदा। इन आंकड़ों के आधार पर AI किसान को उसकी जरूरत के मुताबिक सटीक सलाह देगा।

भाषा की बाधा होगी खत्म

फिलहाल ‘भारत Vistaar’ हिंदी और अंग्रेजी में लॉन्च किया गया है, लेकिन सरकार का टारगेट अगले छह महीनों में इसे 9 क्षेत्रीय भाषाओं में लाना है। यानी कोई तमिल किसान हो या पंजाबी या बंगाली, वह अपनी मातृभाषा में इस तकनीक का लाभ उठा सकेगा।

क्या है चुनौती?

हालांकि, विशेषज्ञों ने एक अहम सवाल उठाया है। दलवई समिति की सिफारिश (Dalwai Committee recommendation) पर प्याज, आलू और टमाटर जैसी जरूरी सब्जियों के दामों का AI से पूर्वानुमान लगाने की कोशिश हुई थी, लेकिन छोटे स्तर पर आंकड़ों में गड़बड़ी की वजह से इसे लॉन्च नहीं किया जा सका। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार AI के जरिए भाव बताएगी और उसमें 20-30 फीसदी का अंतर आया, तो यह सियासी रूप से बवाल का सबब बन सकता है।

 

ये भी पढ़ें : यूपी की योगी सरकार का किसानों को तोहफ़ा: 70 करोड़ से बदलेगी कृषि की तस्वीर, हर गांव पहुंचेगी टेक्नोलॉजी

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल। 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top