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भारत ने अपने प्रमुख व्यापारिक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले एक अहम बढ़त हासिल की है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal के अनुसार, India US trade deal के तहत भारतीय किसानों और MSMEs के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, जबकि अमेरिका का बाज़ार भारतीय उत्पादों के लिए पहले से अधिक खुला है। अंतरिम व्यापार ढांचे की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में कोई विशेष आयात लाभ नहीं दिया गया है।
उनके मुताबिक़, भारत ने केवल चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों—जैसे रेड सोरघम (animal feed के लिए), ट्री नट्स, वाइन और स्पिरिट्स—के लिए सीमित और चयनित बाज़ार पहुंच दी है। यह पूरा संतुलन India US trade deal को भारत के पक्ष में मज़बूत बनाता है।
अमेरिका की मांग के उलट भारत की रणनीति
इस India US trade deal की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि जहां अमेरिका भारत के डेयरी और कृषि बाज़ार में व्यापक पहुंच चाहता था, वहीं भारत ने कई भारतीय कृषि उत्पादों पर अमेरिका में शून्य पारस्परिक टैरिफ (zero reciprocal tariff) हासिल कर लिया। चाय, कॉफी, केला, आम जैसे उत्पाद अब अमेरिकी बाज़ार में बिना शुल्क के प्रवेश कर सकेंगे।
पीयूष गोयल ने कहा कि “जिन उत्पादों में भारत आत्मनिर्भर है, उन्हें इस समझौते से बाहर रखा गया है।” उन्होंने दावा किया कि लगभग एक साल से चल रही बातचीत के बाद यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाज़ार के दरवाजे खोलता है। अंतिम India US trade deal के मार्च के मध्य में साइन होने की उम्मीद है।
किन कृषि उत्पादों पर मिलेगा जीरो टैरिफ?
India US trade deal के तहत कई भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में जीरो ड्यूटी का लाभ मिलेगा। मंत्री ने कहा कि यह दिन “स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।” अब भारतीय चाय, मसाले, कॉफी और नारियल तेल पर अमेरिका में कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
इसके अलावा केला, आम, अमरूद, एवोकाडो, कीवी, पपीता, अनानास, मशरूम, अनाज, जौ, बेकरी उत्पाद, कोको उत्पाद और तिल जैसे कृषि उत्पाद भी बिना शुल्क के अमेरिकी बाज़ार में जा सकेंगे। यह कदम India US trade deal को किसानों के लिए बड़ा अवसर बनाता है।
किसानों, MSMEs और पारंपरिक उद्योगों को नुक़सान नहीं
पीयूष गोयल ने साफ शब्दों में कहा कि यह India US trade deal भारतीय किसानों, MSMEs, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर के हितों को किसी भी तरह से नुक़सान नहीं पहुंचाता। राजनीतिक रूप से यह मुद्दा संवेदनशील रहा है और विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा था, लेकिन मंत्री के बयान के बाद कई बिंदुओं पर स्पष्टता आ गई है।
कृषि से आगे भी निर्यात को मिलेगा फ़ायदा
India US trade deal का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं है। गोयल के अनुसार, अमेरिका को होने वाला लगभग 13 बिलियन डॉलर का भारतीय फार्मास्यूटिकल निर्यात अब जीरो ड्यूटी पर जाएगा। इसके साथ ही जेम्स और डायमंड्स को भी टैरिफ से राहत मिलेगी।
उन्होंने बताया कि भारत में बने स्मार्टफोन्स, एयरक्राफ्ट पार्ट्स, ऑटो पार्ट्स, घड़ियां, एसेंशियल ऑयल्स और कुछ होम डेकोर उत्पादों पर भी भविष्य में शून्य टैरिफ लागू होगा। इससे वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति और मज़बूत होगी, जो India US trade deal का एक अहम पहलू है।
अन्य देशों के मुकाबले भारत की मज़बूत स्थिति
गोयल ने कहा कि India US trade deal के बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ 18 प्रतिशत रहेगा, जो चीन, वियतनाम, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों से कम है। चीन पर अभी भी 35 प्रतिशत, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत, जबकि इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत टैरिफ लागू है।
सबसे अहम बात यह है कि रूस से तेल खरीद से जुड़े 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को पूरी तरह हटा दिया गया है। इससे भारत अमेरिकी बाज़ार में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी स्थिति में आ गया है।
अंतरिम समझौता और व्यापक व्यापार वार्ता
इस India US trade deal का आधार अमेरिका और भारत के बीच हुआ अंतरिम समझौता है, जो व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में एक कदम है। यह वार्ता फरवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और प्रधानमंत्री Narendra Modi के बीच शुरू हुई थी।
अंतरिम समझौते के तहत भारत कई अमेरिकी औद्योगिक और खाद्य उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा या खत्म करेगा, जबकि अमेरिका भारतीय वस्त्र, चमड़ा, प्लास्टिक, केमिकल्स और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में 18 प्रतिशत टैरिफ लागू करेगा। हालांकि, तय शर्तें पूरी होने पर कई भारतीय उत्पादों पर यह टैरिफ भी हटाया जाएगा।
सप्लाई चेन और तकनीकी सहयोग पर ज़ोर
India US trade deal में दोनों देश सप्लाई चेन को मज़बूत करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर सहमत हुए हैं। डिजिटल ट्रेड, मेडिकल डिवाइसेस, ICT उत्पादों और मानकों से जुड़े मुद्दों पर भी आपसी समाधान खोजने की बात कही गई है।
इसके अलावा भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान, तकनीक और कोकिंग कोल खरीदने का इरादा रखता है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और गहरा होगा।
अंतिम समझौते पर सबकी नज़र
हालांकि पीयूष गोयल ने India US trade deal को भारत के लिए ऐतिहासिक बताया है, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंतिम समझौते पर साइन होने तक कुछ भी पूरी तरह अंतिम नहीं है। इसके बावजूद मौजूदा ढांचा यह साफ करता है कि इस व्यापार समझौते में भारत ने संतुलन, सुरक्षा और अवसर—तीनों को एक साथ साधने की कोशिश की है।
कुल मिलाकर, India US trade deal भारत को वैश्विक बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने, किसानों और MSMEs को नए अवसर देने और अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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Great news for India and USA!
— Narendra Modi (@narendramodi) February 7, 2026
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