दलहन किसानों-उद्यमियों के लिए खुशख़बरी: मिलेंगे फ्री उन्नत किस्म के बीज कीट, दाल मिल लगाने पर 25 लाख की सब्सिडी

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अमेरिका-भारत कृषि समझौते (US-India agricultural agreement) का जिक्र करते हुए भारतीय किसान के हितों के संरक्षण का भरोसा दिलाया। साथ ही तिलहन और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया।

दलहन किसानों-उद्यमियों के लिए खुशख़बरी: मिलेंगे फ्री उन्नत किस्म के बीज कीट, दाल मिल लगाने पर 25 लाख की सब्सिडी

दलहन उगाने वाले किसान भाइयों के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान लाने वाली योजना सामने आई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan) ने एक ऐतिहासिक ऐलान करते हुए राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (National Mission for Aatmanirbharta in Pulses (2025–31) को नई ऊर्जा दी है। इस स्कीम में किसान को बीज से लेकर बाजार तक का पूरा सहारा मिलेगा। आइए समझते हैं इस योजना की ख़ास बातें।

क्या है पूरी योजना? क्लस्टर और बीज ग्राम का ख़ाका

सरकार की नई रणनीति बहुत क्लियर है। दलहन की खेती (Pulse cultivation) को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर बनाए जाएंगे। इन क्लस्टरों में शामिल किसानों को मुफ्त में उन्नत किस्म के बीज के किट दिए जाएंगे। साथ ही, प्रति हेक्टेयर 10,000 रुपये की आर्थिक मदद   भी मिलेगी ताकि खेती की लागत आसानी से पूरी हो सके।

इससे भी बड़ी बात यह है कि हर राज्य में बीज ग्राम (Seed Village) विकसित किए जाएंगे। ये बीज ग्राम दलहन के बीज उत्पादन के हब बनेंगे, जिससे किसानों को हाई क्वालिटी वाले बीज आसानी से मिल सकेंगे। किसानों को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

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दाल मिल और ख़रीद की गारंटी 

योजना का सबसे अहम हिस्सा है बाजार का भरोसा। सरकार ने साफ किया है कि वह 100 फीसदी प्रोडक्शन की ख़रीद करेगी, ताकि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके। ख़रीद मूल्य भी घोषित किए गए हैं- 

  • तुअर दाल: 8,000 रुपये/क्विंटल
  • उड़द दाल: 7,800 रुपये/क्विंटल
  • चना: 5,875 रुपये/क्विंटल
  • मसूर: 7,000 रुपये/क्विंटल

इसके अलावा, प्रोसेसिंग के लिए भी बड़ी योजना है। अगर कोई क्लस्टर में दाल मिल लगाना चाहे, तो सरकार उस पर 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी। पूरे देश में 1,000 नई दाल मिलें खोलने का टारगेट है, जिनमें से 55 अकेले मध्य प्रदेश में खुलेंगी। इससे किसानों का उत्पादन क्लस्टर के पास ही प्रोसेस होकर बिक जाएगा, जिससे परिवहन लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।

गहरी रिसर्च के बाद रिज़ल्ट  

ये योजना कोई अचानक से नहीं बनाई गई है, बल्कि राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन ( National Mission for Aatmanirbharta in Pulses (2025–31) के तहत गहरी रिसर्च का नतीजा है। मध्य प्रदेश के सीहोर में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में इसे बताया गया। सरकार का फोकस अब  पूरे कृषि इकोसिस्टम (Agricultural ecosystem) विकसित करने पर है।

कृषि मंत्री चौहान ने अमेरिका-भारत कृषि समझौते (US-India agricultural agreement) का जिक्र करते हुए भारतीय किसान के हितों के संरक्षण का भरोसा दिलाया। साथ ही तिलहन और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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