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उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोज़गार के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यूपी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कौशल योजनाओं का बजट तीन गुना से अधिक बढ़ा दिया है। इस फैसले के तहत क़रीब 10 लाख युवाओं को विशेष कौशल प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है, ताकि वे नौकरी या स्वरोज़गार के लिए तैयार हो सकें।
योगी सरकार ने कौशल विकास मिशन के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस बढ़े हुए कौशल योजनाओं का बजट के जरिए SSDP, प्रोजेक्ट प्रवीण और जीरो पॉवर्टी अभियान जैसी योजनाओं को मजबूती मिलेगी। इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को रोज़गार से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने की तैयारी
यूपी सरकार ने स्पष्ट किया है कि बढ़े हुए कौशल योजनाओं का बजट का मुख्य लक्ष्य युवाओं की संख्या में बड़ा इजाफा करना है, जिन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 10 लाख युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण देने की योजना है। यह पहल व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के माध्यम से संचालित होगी।
राज्य और केंद्र की विभिन्न योजनाओं के जरिए युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि जब युवा रोज़गार के अनुकूल कौशल सीखेंगे, तो उनके लिए नौकरी और स्वरोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।
राज्य कौशल प्रशिक्षण निधि का विस्तार
कौशल योजनाओं का बजट बढ़ने का सबसे बड़ा असर राज्य कौशल प्रशिक्षण निधि यानी SSDF पर देखने को मिलेगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष में इस योजना के तहत क़रीब 61 हज़ार युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लेकिन बजट बढ़ने के बाद यह संख्या बढ़ाकर 4 लाख से अधिक करने की तैयारी है।
यूपी सरकार ने इस योजना पर लगभग 1000 करोड़ रुपये ख़र्च करने का प्रावधान किया है। इससे बड़े पैमाने पर युवाओं को रोज़गारपरक प्रशिक्षण मिलेगा। बढ़ा हुआ कौशल योजनाओं का बजट प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पहुंच दोनों को मजबूत करेगा।
प्रोजेक्ट प्रवीण से स्कूल स्तर पर कौशल शिक्षा
स्कूल स्तर पर कौशल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रोजेक्ट प्रवीण योजना चलाई जा रही है। इसके तहत कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को रोजाना 1.5 घंटे अत्याधुनिक लैब में कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। फिलहाल क़रीब 2 लाख छात्र इस योजना से जुड़े हुए हैं।
बढ़े हुए कौशल योजनाओं का बजट के बाद इस संख्या को बढ़ाकर 5 लाख करने की तैयारी है। यूपी सरकार ने फैसला किया है कि अब केवल राजकीय स्कूल ही नहीं, बल्कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। इससे ज़्यादा छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा और रोज़गार आधारित प्रशिक्षण मिल सकेगा।
जीरो पॉवर्टी अभियान के तहत विशेष प्रशिक्षण
निर्धन परिवारों के युवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए अगले वित्तीय वर्ष के बजट में जीरो पॉवर्टी अभियान के तहत 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के जरिए क़रीब 50 हज़ार पात्र व्यक्तियों को आवासीय कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बढ़े हुए कौशल योजनाओं का बजट का यह हिस्सा उन लोगों को लक्षित करता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिनके पास रोज़गार के अवसर सीमित हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें नौकरी या स्वरोज़गार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। यूपी सरकार का मानना है कि इससे गरीबी कम करने में भी मदद मिलेगी।
बजट वृद्धि से क्या होगा बदलाव?
तीन गुना से अधिक बढ़ा कौशल योजनाओं का बजट सीधे तौर पर प्रशिक्षण पाने वाले युवाओं की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी करेगा। इससे कौशल विकास मिशन को नई गति मिलेगी और लाखों युवाओं के लिए रोज़गार के नए रास्ते खुलेंगे।
मिशन निदेशक पुलकित खरे के अनुसार, वित्तीय सहयोग बढ़ने से प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार होगा और युवाओं को उद्योग के अनुरूप कौशल सिखाया जा सकेगा। यूपी सरकार का लक्ष्य है कि युवा केवल नौकरी खोजने वाले न रहें, बल्कि उद्यमी बनकर दूसरों को भी रोज़गार दें।
रोज़गार आधारित विकास मॉडल की ओर कदम
बढ़ा हुआ कौशल योजनाओं का बजट इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार रोज़गार आधारित विकास मॉडल की दिशा में आगे बढ़ रही है। स्कूल स्तर से कौशल शिक्षा, बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रावधान और निर्धन परिवारों के लिए विशेष प्रशिक्षण जैसे कदम इस रणनीति का हिस्सा हैं।
यूपी सरकार का यह प्रयास युवाओं को आत्मनिर्भर और उद्यमशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर योजनाएं तय लक्ष्य के अनुसार लागू होती हैं, तो राज्य में रोज़गार सृजन और स्वरोज़गार दोनों को नई रफ्तार मिल सकती है।
युवाओं के लिए नए अवसरों की राह
कुल मिलाकर, तीन गुना बढ़ा कौशल योजनाओं का बजट उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आया है। लगभग 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने की योजना राज्य के रोज़गार परिदृश्य को बदल सकती है।
यूपी सरकार का यह कदम केवल बजट बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें कौशल, रोज़गार और उद्यमिता को जोड़कर विकास की नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बढ़े हुए कौशल योजनाओं का बजट का प्रभाव ज़मीन पर किस तरह नज़र आता है, लेकिन फिलहाल यह पहल राज्य के युवाओं के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
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