NAWRC: उन ‘अनकही हीरोइनों’ के लिए जो साड़ी की चुन्नट में बीज छुपाए, हाथों में फावड़ा थामे, खेतों में सोना उगाती हैं

NAWRC भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture and Farmers Welfare, Government of India) की एक अहम पहल है। इसे 2018-19 में शुरू किया गया था।

NAWRC: उन 'अनकही हीरोइनों' के लिए जो साड़ी की चुन्नट में बीज छुपाए, हाथों में फावड़ा थामे, खेतों में सोना उगाती हैं

क्या आप जानते हैं कि भारत की कृषि क्रांति की असली नींव महिलाओं के हाथों में है? हां, वो महिलाएं जो खेतों में पसीना बहाती हैं, बीज बोती हैं, फसल काटती हैं, पर अक्सर उनके नाम ना ज़मीन होती है, ना ही बैंक खाता। इन्हीं ‘अनकही हीरोइनों’ को मज़बूत करने के लिए बना है राष्ट्रीय कृषि महिला संसाधन केंद्र (National Agricultural Women Resource Center – NAWRC)।

राष्ट्रीय कृषि महिला संसाधन केंद्र ‘कृषि में महिलाओं के अधिकार’ का एक सशक्त हथियार है। ये उस भारत की नींव रख रहा है, जहां ‘किसान’ शब्द सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं, बल्कि उन कृषि-योद्धाओं के लिए भी होगा, जो साड़ी की चुन्नट में बीज छुपाए, हाथों में फावड़ा थामे, खेतों को सोना उगाती हैं। ये सेंटर उन्हें ये यकीन दिलाता है- तुम सिर्फ खेती नहीं, भविष्य बो रही हो। और अब तुम अकेली नहीं हो। 

NAWRC है क्या?

NAWRC भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture and Farmers Welfare, Government of India) की एक अहम पहल है। इसे 2018-19 में शुरू किया गया था। इसका एक ही मकसद है- कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आवाज़ को ताकत देना। ये सिर्फ एक विभाग नहीं, बल्कि महिला किसानों के लिए एक ‘One-stop shop’ है।

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गहरी रीसर्च: क्यों है ज़रूरत?

भारत में 75 फीसदी से ज़्यादा महिलाएं कृषि से जुड़ी हैं। वे 60-80 फीसदी तक खेती का काम करती हैं। लेकिन हैरानी की बात ये है कि मात्र 13 फीसदी महिलाओं के पास खेत की ज़मीन पर मालिकाना हक है। यानी, मेहनत उनकी, फायदा दूसरों का। NAWRC इसी बड़े अंतर को पाटने की कोशिश है।

क्या करता है ये केंद्र?

1.ज्ञान का खजाना: महिला किसानों को नई तकनीक, जैविक खेती, बीज बचाने की विधियां, मौसम पूर्वानुमान की जानकारी देता है।

2.राज्य स्तरीय केंद्र: देश भर में 13 राज्यों में इसके केंद्र हैं, जो स्थानीय भाषा और ज़रूरतों के हिसाब से काम करते हैं।

3.सशक्तिकरण के रास्ते: महिलाओं को फसल उगाने से लेकर बाजार तक पहुंचने, उनका सही दाम पाने तक का प्रशिक्षण देता है।

4.नेटवर्किंग: देश भर की महिला किसानों, स्वयं सहायता समूहों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाता है।

5.नीति निर्माण में आवाज: सरकार को यह बताता है कि महिला किसानों की असली चुनौतियाँ क्या हैं, ताकि उनके हक में बेहतर नीतियाँ बन सकें।

ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव:

NAWRC का काम सिर्फ खेती तक सीमित नहीं। यह ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक हैसियत बदल रहा है। जब एक महिला किसान पढ़-लिखकर, तकनीक जानकर खेती करती है, तो न सिर्फ उसकी फसल का उत्पादन बढ़ता है, बल्कि पूरे परिवार का पोषण, बच्चों की शिक्षा और गांव की तरक्की सुनिश्चित होती है।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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