NITI Aayog : न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सीमा से बाहर निकले नए भारत के किसान, तभी देश बनेगा आत्मनिर्भर

नीति आयोग (NITI Aayog) के सदस्य रमेश चंद ने सीधा कहा है- 'MSP के बाहर की फसलों को अपनाओ, तभी खेती लाभदायक बनेगी और भारत आत्मनिर्भर बनेगा (Self-reliant India)।'

NITI Aayog : न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सीमा से बाहर निकले नए भारत के किसान, तभी देश बनेगा आत्मनिर्भर

पिछले एक दशक का आंकड़ा चौंकाने वाला है। MSP वाली फसलों (Crops covered under MSP) की वृद्धि दर महज 1.8 फीसदी, जबकि गैर-MSP फसलों की वृद्धि दर लगभग 4 प्रतिशत रही। ये आंकड़े एक कड़वी सच्चाई बयां करते हैं। भारतीय किसान का ‘MSP का सहारा’ (Reliance on MSP) अब पर्याप्त नहीं है। नीति आयोग (NITI Aayog) के सदस्य रमेश चंद ने सीधा कहा है- ‘MSP के बाहर की फसलों को अपनाओ, तभी खेती लाभदायक बनेगी और भारत आत्मनिर्भर बनेगा (Self-reliant India)।’

क्यों धीमी है MSP फसलों की रफ्तार?

इसकी तीन बड़ी वजहें हैं:

1.बाजार की मांग बदल गई है: आज का उपभोक्ता स्वास्थ्य और पोषण को प्राथमिकता दे रहा है। मिलेट्स (बाजरा, ज्वार, रागी), विशेष दालें, ऑर्गेनिक सब्जियां, मसाले और औषधीय पौधों की मांग तेजी से बढ़ी है।

2.उत्पादन जरूरत से ज्यादा: देश की कृषि वृद्धि दर 4.6 फीसदी है, लेकिन घरेलू मांग सिर्फ 2 फीसदी की दर से बढ़ रही है। मतलब, पारंपरिक फसलों का उत्पादन अक्सर मांग से अधिक हो जाता है, जिससे दाम गिरते हैं।

3. आय का नया स्रोत: गेहूं बेचने से ज्यादा, गेहूं से बना आटा, बिस्कुट या दलिया बेचने पर मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है। यही ‘वैल्यू एडिशन’ का फायदा है।

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कौन हैं ये ‘नए उपभोक्ता’?

रमेश चंद के अनुसार, भारत में एक नया, संपन्न उपभोक्ता वर्ग तेजी से उभर रहा है। ये क्लास है-

  • सेहत के लिए फायदेमंद खाने पर पैसा खर्च करने को तैयार है।

  • खाने में वैराइटी चाहता है।

  • पैकेज्ड, प्रोसेस्ड और ब्रांडेड खाद्य उत्पाद खरीद रहा है।

यही वर्ग गैर-MSP फसलों का सबसे बड़ा ख़रीदार बन रहा है।

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किसानों के लिए ‘गोल्डमाइन’ फसलें 

भविष्य की लाभदायक खेती इन क्षेत्रों में है:

1.पोषक अनाज (Nutri-Cereals): मिलेट्स (श्री अन्न), क्विनोआ, ओट्स।

2.बागवानी (Horticulture): एक्सोटिक फल (कीवी, एवोकाडो), बेरीज, ऑर्गेनिक सब्जियां।

3.विशेष फसलें (Special crops): सुगंधित चावल (बासमती), विशेष दालें (काला चना, मसूर)।

4.फूलों की खेती (Floriculture): गुलाब, ग्लैडियोलस, ऑर्किड।

5.औषधीय एवं सुगंधित पौधे (Medicinal and aromatic plants): तुलसी, एलोवेरा, अश्वगंधा, मेंथा।

कैसे बदलें रणनीति?

  • फसल चक्र बदलो: एक ही खेत में धान-गेहूं के बजाय, धान के बाद दलहन या सब्जी लगाओ। मिट्टी भी स्वस्थ रहेगी, आय भी बढ़ेगी।

  • वैल्यू चेन से जुड़ो: सिर्फ फसल न बेचें। छोटे स्तर पर प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) शुरू करें। जैसे टमाटर से सॉस, आम से अचार बनाना।

  • तकनीक अपनाओ: ड्रिप इरिगेशन, शेड नेट, ऑर्गेनिक खाद जैसी आधुनिक तकनीक से उपज और गुणवत्ता बढ़ाओ।

  • बाजार की समझ बढ़ाओ: ई-नाम, किसान उत्पादक संगठन (FPO) के जरिए सीधा बाजार से जुड़ो। मोबाइल ऐप्स से मौसम और बाजार भाव की जानकारी लो।

  • सरकारी योजनाओं का लाभ उठाओ: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि अवसंरचना कोष जैसी योजनाओं का उपयोग कर निवेश करो।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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