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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के किसान अब केवल अनाज ही नहीं, बल्कि पानी का ‘White Gold’ (pearl) भी उगाएंगे। जी हां, ये कोई कल्पना नहीं, बल्कि लखनऊ के राजभवन (Raj Bhavan, Lucknow) से शुरू हुई एक ऐसी क्रांतिकारी पहल है जो किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का एक रास्ता खोल रही है। यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Uttar Pradesh Governor Anandiben Patel) के नेतृत्व में शुरू हुई इस ख़ास परियोजना के तहत अब किसान अपने तालाबों में मोती पालन (Pearl Farming In Uttar Pradesh) कर लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकेंगे।
क्या है ‘सीप सर्जरी’ की तकनीक?
इसकी शुरुआत हुई राजभवन ( governor house)में आयोजित एक खास कार्यक्रम से, जहां राज्यपाल ने खुद मसल सर्जरी (Mussel Surgery) की बारीकियां जानीं। दरअसल, मोती पालन (Pearl Farming In Uttar Pradesh) का प्रोसेस बेहद दिलचस्प है। इसमें मोती देने वाली सीप के अंदर एक छोटा सा खा़स बीज (बीड) डाला जाता है। इसके बाद सीप उस बीज को अपने नैचुरल लेप (Naker) से ढंकना शुरू कर देती है। धीरे-धीरे, करीब 18 महीनों में, यही बीज एक चमकदार, कीमती मोती में तब्दील हो जाता है। ये पूरी प्रक्रिया प्रकृति और विज्ञान का अद्भुत मेल है।
कितना है मुनाफा? जानिए गणित!
आइए अब बात करते हैं सबसे जरूरी बात, आमदनी। मोती पालन (Pearl farming) का आर्थिक पहलू किसानों के लिए सबसे शानदार है। एक्सपर्ट के अनुसार, अगर एक किसान सिर्फ 2,000 वर्ग फुट के तालाब में लगभग 10,000 सीपों का पालन करता है, तो डेढ़ साल (18 महीने) बाद उसे लगभग 8.5 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है। ये मुनाफा पारंपरिक खेती के मुकाबले कई गुना ज्यादा है और कम जगह में शुरू किया जा सकने वाला ये बिज़नेस युवा किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है।
सरकार की मदद: 50 फीसदी तक सब्सिडी और मार्केटिंग
इस बिज़नेस में शुरुआती निवेश की चिंता को दूर करने के लिए सरकार बड़ी भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (Prime Minister Fisheries Scheme) के तहत मोती पालन पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलेगी। यानी किसान के आधे खर्चे सरकार वहन करेगी। साथ ही, राजभवन एक निजी कृषि-व्यवसाय कंपनी के साथ करार (MoU) कर रहा है। इसका फायदा यह होगा कि किसानों को:
- घर बैठे मॉर्डन तकनीक की ट्रेनिंग मिलेगी।
- मोतियों की बिक्री के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का पक्का इंतजाम होगा। किसान को बस उत्पादन करना है, बेचने की जिम्मेदारी कंपनी उठाएगी।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में मोतियों की भारी मांग को देखते हुए, किसानों को उनके उत्पाद का सही दाम मिल सकेगा।
मोती पालन- किसानों की सोच में बदलाव की शुरुआत
मोती पालन सिर्फ एक बिजनेस नहीं, बल्कि किसानों की सोच में बदलाव की शुरुआत है। ये पारंपरिक खेती से हटकर एक नये और फायदेमंद प्शन पेश करता है।
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