डेयरी क्षेत्र को मज़बूती देने के लिए ICAR–NDDB MoU पर बनी साझा रणनीति

ICAR–NDDB MoU के तहत शोध, नवाचार और फील्ड स्तर के सहयोग से डेयरी सेक्टर को मज़बूत करने पर डॉ. मांगी लाल जाट ने ज़ोर दिया।

ICAR–NDDB MoU

देश में डेयरी क्षेत्र को अधिक मज़बूत, टिकाऊ और किसानों के लिए लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच ICAR–NDDB MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य शोध, नवाचार और field-level काम को आपस में जोड़ते हुए डेयरी सेक्टर के हर स्तर पर सुधार लाना है। यह साझेदारी ख़ास तौर पर देश के लाखों डेयरी किसानों को ध्यान में रखकर की गई है।

शोध और फील्ड अनुभव को जोड़ने की पहल

यह ICAR–NDDB MoU multidisciplinary research, innovation और capacity building को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। समझौते के तहत dairy production, processing और value addition जैसे अहम क्षेत्रों में मिलकर काम किया जाएगा। ICAR की scientific expertise और NDDB के लंबे field experience को एक साथ लाकर डेयरी वैल्यू चेन की चुनौतियों का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

इस साझेदारी का मक़सद यह है कि lab में होने वाला research सीधे किसानों के खेत और पशुपालन गतिविधियों तक पहुंचे, ताकि उसका वास्तविक लाभ ज़मीनी स्तर पर दिख सके।

ICAR–NDDB MoU पर किनकी मौजूदगी में हुए हस्ताक्षर?

ICAR–NDDB MoU पर ICAR की ओर से Dr. Raghavendra Bhatta और NDDB की ओर से Shri S. Regupathi ने हस्ताक्षर किए। यह अवसर ख़ास इसलिए भी रहा क्योंकि इस दौरान कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट तथा NDDB के चेयरमैन Dr. Meenesh Shah भी मौजूद रहे।

इस मौके पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी उपस्थित थे, जिन्होंने इस साझेदारी को डेयरी सेक्टर के लिए एक बड़ा अवसर बताया।

डेयरी क्षेत्र को मज़बूती देने के लिए ICAR–NDDB MoU पर बनी साझा रणनीति

संस्थागत सीमाओं से बाहर निकलने की जरूरत पर ज़ोर

इस अवसर पर डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा कि आज की जटिल कृषि और पशुपालन चुनौतियों को हल करने के लिए संस्थागत सीमाओं से बाहर निकलकर काम करना ज़रूरी है। उन्होंने complementary research की अहमियत पर ज़ोर देते हुए कहा कि integrated farming systems को बढ़ावा देना समय की मांग है।

डॉ. मांगी लाल जाट ने यह भी बताया कि यह ICAR–NDDB MoU climate resilience, low productivity और value chain development जैसी समस्याओं से निपटने में मदद करेगा।

गौशालाओं और fodder पर विशेष फ़ोकस

अपने संबोधन में डॉ. मांगी लाल जाट ने stray cattle की समस्या का ज़िक्र करते हुए कहा कि गौशालाओं को adopt कर sustainable models विकसित किए जा सकते हैं। इससे manure management और biogas utilization जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर खुलेंगे।

उन्होंने fodder की उपलब्धता को livestock productivity बढ़ाने के लिए बेहद ज़रूरी बताया और कहा कि ICAR की latest technologies और innovations के ज़रिए इस दिशा में ठोस काम किया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया गया कि ICAR–NDDB MoU के तहत इन सभी पहलों को तकनीक आधारित समाधान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।

‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जुड़ी साझेदारी

NDDB के चेयरमैन Dr. Meenesh Shah ने कहा कि यह साझेदारी ‘Viksit Bharat’ के विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने बताया कि NDDB पहले भी ICAR के साथ ration balancing, mineral mapping और total mixed ration जैसे missions पर काम कर चुका है।

उनके अनुसार, ICAR–NDDB MoU के ज़रिए ethno-veterinary medicine जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे और livestock सेक्टर से जुड़ी नई चुनौतियों का समाधान राष्ट्रीय हित में किया जा सकेगा।

डेयरी क्षेत्र को मज़बूती देने के लिए ICAR–NDDB MoU पर बनी साझा रणनीति

Scalable models और Value chain पर काम

Dr. Shah ने यह भी कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य ऐसे scalable और replicable models तैयार करना है, जिन्हें देश के अलग-अलग agro-climatic zones में अपनाया जा सके। इसके साथ ही fruits, vegetables, oilseeds, fodder, milk और milk products की पूरी value chain में सहयोग की संभावनाएं भी तलाश की जाएंगी।

यह ICAR–NDDB MoU केवल डेयरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े अन्य कृषि क्षेत्रों को भी मज़बूती देगा।

Research से लेकर किसानों तक सीधा लाभ

इस समझौते के तहत knowledge sharing, technology development और validation पर ख़ास ज़ोर दिया गया है। साथ ही human resource development और joint training programmes भी इस ICAR–NDDB MoU का अहम हिस्सा हैं।

शोधकर्ता, professionals और किसान—तीनों के लिए training programmes आयोजित किए जाएंगे, ताकि research outcomes को practical solutions में बदला जा सके। इससे dairy sector में productivity, profitability और sustainability को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

डेयरी सेक्टर के लिए लंबी अवधि की सोच

डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा कि ICAR institutes से निकलने वाली modern technologies इस साझेदारी की backbone होंगी। उन्होंने भरोसा जताया कि ICAR–NDDB MoU के ज़रिए research और extension के बीच की दूरी कम होगी और किसानों को सीधा फ़ायदा मिलेगा। यह साझेदारी यह भी दिखाती है कि कैसे research institutions और implementing agencies मिलकर grassroots level पर बदलाव ला सकती हैं।

भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी

कुल मिलाकर, ICAR–NDDB MoU को डेयरी सेक्टर के लिए एक दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। यह समझौता emerging challenges जैसे climate change, productivity gaps और market linkage को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। उम्मीद है कि इस सहयोग से न केवल dairy farmers की आय में सुधार होगा, बल्कि देश के डेयरी सेक्टर को एक मज़बूत, sustainable और future-ready दिशा भी मिलेगी।

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