Maharana Pratap Horticulture University ने ढूंढी किसानों की तकदीर बदलने वाली मसालों और सब्ज़ियो की 7 जादुई किस्में!

8 और 9 जनवरी को करनाल में हुई दो दिन की बड़ी वर्कशॉप में इन किस्मों का Maharana Pratap Horticulture University ने ऐलान किया। हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा (Haryana Agriculture Minister Shyam Singh Rana) ने इसका उद्घाटन किया।

Maharana Pratap Horticulture University ने ढूंढी किसानों की तकदीर बदलने वाली मसालों और सब्ज़ियो की 7 जादुई किस्में!

Maharana Pratap Horticulture University (MHU) ने किसानों के लिए एक बड़ी सौगात दी है। चार साल के कठिन शोध और खेतों में जांच के बाद (Rigorous research and field investigations), यूनिवर्सिटी ने मसालों और सब्जियों की 7 नई उन्नत किस्में विकसित (7 new improved varieties of spices and vegetables have been developed) की हैं। ये किस्में ज्यादा पैदावार देने वाली, बीमारियों से लड़ने वाली और किसानों की आमदनी बढ़ाने वाली हैं।

ये हैं वो 7 चमत्कारी किस्में

1.सौंफ (F1): पारंपरिक किस्मों से बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता।

2.मेथी (M2): जल्दी तैयार होने वाली और कीटों के प्रति मज़बूत।

3.धनिया (CR-1): अच्छी सुगंध और ज्यादा पैदावार वाली किस्म।

4.हल्दी (राजेंद्र सोनिया, PH-2): किसानों के लिए ख़ास, ज्यादा उपज देने वाली हल्दी।

5.टमाटर (पुसा चेरी): छोटे, मीठे और देखने में अट्रैक्टिव टमाटर, बाज़ार में अच्छी कीमत।

6.चौलाई/अमरंथ (M1): पोषण से भरपूर, नई तरह की हेल्दी सब्जी।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इन किस्मों ने अलग-अलग मौसम और मिट्टी में खुद को आजमाया है और हर जगह शानदार नतीजे दिए हैं। इसका मतलब है कि हरियाणा के ज्यादातर किसान इन्हें आसानी से उगा सकते हैं।

Maharana Pratap Horticulture University ने ढूंढी किसानों की तकदीर बदलने वाली मसालों और सब्ज़ियो की 7 जादुई किस्में!

क्यों हैं ये किस्में खास?

  • ज्यादा पैदावार: पुरानी किस्मों के मुकाबले इनसे प्रति एकड़ उत्पादन बढ़ेगा।

  • कीट-रोग प्रतिरोधी: फसलों को नुकसान कम, इसलिए दवा पर खर्च भी कम।

  • बेहतर गुणवत्ता: बाजार में इनकी मांग और कीमत दोनों ज्यादा होगी।

  • फ़सल विविधता: किसान सिर्फ गेहूं-धान से हटकर नकदी फसलें उगा सकेंगे।

वर्कशॉप में बड़ा ऐलान

8 और 9 जनवरी को करनाल में हुई दो दिन की बड़ी वर्कशॉप में इन किस्मों का ऐलान किया गया। हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा (Haryana Agriculture Minister Shyam Singh Rana) ने इसका उद्घाटन किया। कार्यशाला में 44 नई तकनीकों को अपनाने की सिफारिश भी की गई, जिनमें केला, लीची, कमलम जैसे फलों की उन्नत खेती के तरीके शामिल हैं।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा (The Vice-Chancellor of the university, Dr. Suresh Malhotra) ने बताया कि ये पहल किसानों की आमदनी बढ़ाने और राज्य के लोगों के लिए पोषण व खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। उन्होंने इसे यूनिवर्सिटी की बहुत बड़ी उपलब्धि बताया।

 

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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