Maharana Pratap Horticulture University (MHU) ने किसानों के लिए एक बड़ी सौगात दी है। चार साल के कठिन शोध और खेतों में जांच के बाद (Rigorous research and field investigations), यूनिवर्सिटी ने मसालों और सब्जियों की 7 नई उन्नत किस्में विकसित (7 new improved varieties of spices and vegetables have been developed) की हैं। ये किस्में ज्यादा पैदावार देने वाली, बीमारियों से लड़ने वाली और किसानों की आमदनी बढ़ाने वाली हैं।
ये हैं वो 7 चमत्कारी किस्में
1.सौंफ (F1): पारंपरिक किस्मों से बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता।
2.मेथी (M2): जल्दी तैयार होने वाली और कीटों के प्रति मज़बूत।
3.धनिया (CR-1): अच्छी सुगंध और ज्यादा पैदावार वाली किस्म।
4.हल्दी (राजेंद्र सोनिया, PH-2): किसानों के लिए ख़ास, ज्यादा उपज देने वाली हल्दी।
5.टमाटर (पुसा चेरी): छोटे, मीठे और देखने में अट्रैक्टिव टमाटर, बाज़ार में अच्छी कीमत।
6.चौलाई/अमरंथ (M1): पोषण से भरपूर, नई तरह की हेल्दी सब्जी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इन किस्मों ने अलग-अलग मौसम और मिट्टी में खुद को आजमाया है और हर जगह शानदार नतीजे दिए हैं। इसका मतलब है कि हरियाणा के ज्यादातर किसान इन्हें आसानी से उगा सकते हैं।

क्यों हैं ये किस्में खास?
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ज्यादा पैदावार: पुरानी किस्मों के मुकाबले इनसे प्रति एकड़ उत्पादन बढ़ेगा।
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कीट-रोग प्रतिरोधी: फसलों को नुकसान कम, इसलिए दवा पर खर्च भी कम।
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बेहतर गुणवत्ता: बाजार में इनकी मांग और कीमत दोनों ज्यादा होगी।
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फ़सल विविधता: किसान सिर्फ गेहूं-धान से हटकर नकदी फसलें उगा सकेंगे।
वर्कशॉप में बड़ा ऐलान
8 और 9 जनवरी को करनाल में हुई दो दिन की बड़ी वर्कशॉप में इन किस्मों का ऐलान किया गया। हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा (Haryana Agriculture Minister Shyam Singh Rana) ने इसका उद्घाटन किया। कार्यशाला में 44 नई तकनीकों को अपनाने की सिफारिश भी की गई, जिनमें केला, लीची, कमलम जैसे फलों की उन्नत खेती के तरीके शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा (The Vice-Chancellor of the university, Dr. Suresh Malhotra) ने बताया कि ये पहल किसानों की आमदनी बढ़ाने और राज्य के लोगों के लिए पोषण व खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। उन्होंने इसे यूनिवर्सिटी की बहुत बड़ी उपलब्धि बताया।