मकर संक्रांति के मौके पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अपने आवास पर हाथों से दो नन्ही गायों को चारा खिलाते नज़र आए, तो सबकी निगाहें उनकी ओर गईं। ये कोई आम गाय नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे दुर्लभ और अनमोल नस्लों में शुमार पुंगनूर गाय (Punganur cow, considered one of the rarest and most precious breeds) थी। पीएम का ये छोटा सा कदम, असल में देश की एक विलुप्त होती विरासत को बचाने का बहुत बड़ा संदेश था।
हैरान कर देने वाले ख़ास गुण
पहली नज़र में ये पुंगनूर गाय इतनी छोटी और प्यारी लगती हैं कि लगता है जैसे कोई जीता-जागता खिलौना हो। इनकी लंबाई महज ढाई से तीन फीट और वजन 70 से 200 किलो तक ही होता है। ये दुनिया की सबसे छोटी कूबड़ वाली बौनी नस्ल हैं। मूल रूप से आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले (Chittoor district of Andhra Pradesh) की यह देसी नस्ल अपनी शांत प्रकृति और सेहतमंद दूध के लिए मशहूर है।
दूध नहीं, जीवन अमृत
दूसरी गायों के मुकाबले पुंगनूर गाय (Punganur cow) दिन में सिर्फ 2-3 लीटर ही दूध देती है। लेकिन ये दूध किसी जड़ी-बूटी या अमृत से कम नहीं माना जाता। इसके दूध में Antibacterial properties भरपूर होती है और फैट बहुत कम होता है। यही वजह है कि पुराने ज़माने में मंदिरों में भगवान के अभिषेक और पूजा में सिर्फ इसी गाय के दूध का इस्तेमाल होता था। आयुर्वेद में इसे बहुत पवित्र और सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है।
संकट में है ये अनमोल धरोहर
दुख की बात ये है कि इतने ख़ास गुण होने के बावजूद ये नस्ल आज लगभग खत्म होने के कगार पर पहुंच गई है। किसान ज्यादा दूध के चक्कर में इनकी अन्य नस्लों के साथ क्रॉस-ब्रीडिंग करने लगे, जिससे शुद्ध पुंगनूर नस्ल तेजी से घटी। संयुक्त राष्ट्र की संस्था FAO (United Nations agency FAO) ने इसे ‘संकटग्रस्त नस्ल’ (‘Endangered breed’) घोषित किया है। पीएम मोदी ने इन्हें अपने आवास में जगह देकर इसी ख़तरे की ओर सबका ध्यान खींचा है।
आपको जानकर हैरानी होगी: कीमत और शोध
अगर आप सोच रहे हैं कि ये छोटी गाय सस्ती होगी, तो आप गलत हैं। एक शुद्ध पुंगनूर गाय की कीमत 1 लाख रुपये से शुरू होकर 10 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। इतनी कीमत इसकी दुर्लभता, शुद्धता और धार्मिक मान्यता की वजह से है। लोग इसे घर की शोभा और सौभाग्य के प्रतीक के रूप में भी रखते हैं।
फिलहाल, आंध्र प्रदेश सरकार और कृषि वैज्ञानिक इन गायों पर गहन शोध कर रहे हैं ताकि इनकी शुद्ध नस्ल को बचाया जा सके और इनकी संख्या बढ़ाई जा सके। देश के कुछ गौशालाओं में इनके संरक्षण के ख़ास प्रयास चल रहे हैं।
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