Satellite-Based Crop Monitoring और Data Integration: अब सैटेलाइट से होगी फसलों की पैदावार की भविष्यवाणी!

Satellite-Based Crop Monitoring और Data Integratio की मदद से, देश की 11 प्रमुख फसलों का उत्पादन अनुमान लगाएगा। इस इनोवेशन को 'फासल' (FASAL Program) प्रोग्राम   का नाम दिया गया है।

Satellite-Based Crop Monitoring और Data Integration: अब सैटेलाइट से होगी फसलों की पैदावार की भविष्यवाणी!

 किसानों की मेहनत और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने एक अत्याधुनिक तकनीकी कदम उठाया है। Mahalanobis National Crop Forecasting Centre (MNCFC) अब Satellite-Based Crop Monitoring और Data Integratio की मदद से, देश की 11 प्रमुख फसलों का उत्पादन अनुमान लगाएगा। इस इनोवेशन को ‘फासल’ (FASAL Program) प्रोग्राम   का नाम दिया गया है।

कैसे काम करती है ये टेक्नोलॉजी?

ये कोई साधारण अनुमान नहीं है। इसमें मल्टीस्पेक्ट्रल और माइक्रोवेव सैटेलाइट डेटा (Multispectral and microwave satellite data) का इस्तेमाल करके पूरे देश का Crop mapping तैयार किया जाता है। यानी, सैटेलाइट तस्वीरों से पता चल जाता है कि किस जिले में कौन सी फसल कितने क्षेत्र में बोई गई है। साथ ही, Indices obtained from satellites और मौसम के डेटा को कंप्यूटर मॉडल्स में डालकर उपज का अनुमान (Yield Estimation) लगाया जाता है। ये अनुमान मौसम-आधारित और रिमोट सेंसिंग मॉडलों (Weather-based and remote sensing models) के ज़रिए होता है।

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नेशनवाइड कवरेज और सटीकता 

इसका दायरा बहुत बड़ा है। देश के 20 राज्यों के 557 ज़िले इसके दायरे में आते हैं। कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर (Minister of State for Agriculture Ramnath Thakur) ने लोकसभा में बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में भी इस तकनीक का यूज़ हो रहा है। ‘येस्टेक’ (YESTech) प्रणाली के तहत धान, गेहूं और सोयाबीन की उपज का अनुमान अब ग्राम पंचायत स्तर तक लगाया जा सकेगा। इससे फसल कटाई प्रयोग (CCE) की योजना बनाने और क्षेत्र व उपज के विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी।

वैज्ञानिक सहयोग और भविष्य 

इस महत्वपूर्ण परियोजना में कृषि मंत्रालय (DA&FW) और एमएनसीएफसी, ISRO के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ISRO केन्द्र’Semi-physical model’  पर आधारित Operational yield estimates तैयार करने में सहयोग दे रहे हैं। साथ ही, नई फसलों को शामिल करने के लिए अनुसंधान भी चल रहा है। सटीकता बढ़ाने के लिए राज्यों के कृषि विभाग जमीनी आंकड़े जुटाने में मदद कर रहे हैं, जिससे मॉडल को प्रशिक्षित किया जाता है।

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डेटा-संचालित नीति निर्माण में बड़ी छलांग

‘फासल’ कार्यक्रम केवल एक पूर्वानुमान प्रणाली नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में डेटा-संचालित नीति निर्माण की ओर एक बड़ी छलांग है। इससे सरकार को खाद्यान्न भंडारण, विपणन, निर्यात और आपात स्थितियों (Food grain storage, marketing, export, and emergency situations.) के लिए बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। ये महालनोबिस दूरी जैसी सांख्यिकीय अवधारणाओं को Modern space technology से जोड़कर भारतीय कृषि को एक नई दिशा देने का प्रयास है।

 

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