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जलवायु परिवर्तन (Climate change) के खतरे से भारतीय कृषि को बचाने और किसानों को मजबूत बनाने के लिए सरकार और वैज्ञानिक मिलकर अनूठी मुहिम चला रहे हैं। कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में दी गई। जानकारी के मुताबिक, देश के 651 ज़िलों का स्टडी करने पर 310 जिले जलवायु परिवर्तन के प्रति ‘संवेदनशील’ पाए गए। इनमें से 109 जिले ‘अत्यधिक संवेदनशील’ (‘highly sensitive’) हैं।
NICRA प्रोजेक्ट: जलवायु अनुकूल खेती की राह
National Climate Resilient Agriculture Innovation (NICRA) प्रोजेक्ट के तहत इन चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। 448 गांवों को Climate-resilient villages बनाया गया है, जहां कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के ज़रीये से नई तकनीकों की ट्रेनिंग दी जा रही है। इनमें शामिल हैं:
1.धान की नई विधियां: सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन, एरोबिक राइस और डायरेक्ट सीडिंग।
2.बिना जुताई की खेती: गेहूं की बुआई के लिए जीरो टिलेज तकनीक।
3.जैविक खाद: खेत में ही धान के अवशेषों को मिलाकर मिट्टी की सेहत सुधारना।
4.मजबूत किस्में: सूखा और बाढ़ सहने वाली फसलों की नई किस्मों का प्रदर्शन।
गांव बन रहे हैं आत्मनिर्भर
NICRA प्रोजेक्ट के तहत गांव स्तर पर ‘Community nursery’ और ‘Seed bank’ बनाए किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को सही समय पर उन्नत बीज आसानी से मिल सकें। धान, गेहूं, सोयाबीन, सरसों, चना, ज्वार और कंगनी जैसी फसलों की मजबूत किस्मों को अब कई गाँवों में उगाया जा रहा है।
मौसम की जानकारी अब फिंगरटिप पर
‘Rural Agricultural Weather Service’ (जीकेएमएस) योजना के तहत अब किसानों को ब्लॉक और जिला स्तर पर अगले 5 दिनों का सटीक मौसम पूर्वानुमान मिल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से जारी इस जानकारी के आधार पर 130 कृषि-मौसम इकाइयाँ किसानों के लिए सलाह तैयार करती हैं, जो क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।
किसान ‘मेघदूत’ और ‘मौसम’ जैसे मोबाइल ऐप के जरिए भी अपने जिले के लिए विशेष सलाह और अलर्ट पा सकते हैं। ये सुविधा अंग्रेजी और 13 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। पंचायत स्तर का मौसम पूर्वानुमान ‘ई-ग्राम स्वराज’, ‘ग्राम मंचित्र’ ऐप और ‘मौसमग्राम’ वेब पोर्टल पर भी देखा जा सकता है।
फसल बीमा: प्राकृतिक आपदा में सहारा
‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (पीएमएफबीवाई) किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाती है। इसमें बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि, तूफान, टिड्डी दल का हमला और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान तक शामिल हैं। अब तक, खरीफ 2016 से रबी 2024-25 तक, लगभग 23 करोड़ किसानों को 1,90,374 करोड़ रुपये का दावा राशि दी जा चुकी है।
जैविक खेती को बढ़ावा
‘पारंपरागत कृषि विकास योजना’ (पीकेवीवाई) के तहत जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना में किसानों को तीन साल में 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाती है, जिसमें से 15,000 रुपये सीधे उनके खाते में जैविक आदानों के लिए भेजे जाते हैं। अब तक 16.90 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा चुका है, जिससे 28.24 लाख किसानों को फायदा हुआ।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
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