Seeds Bill 2025: बीज विधेयक, 2025 क्या है? कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने दी जानकारी

बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) किसानों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करते हुए बाज़ार में बीज गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की पहल है।

Seeds Bill 2025 बीज विधेयक, 2025

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) को लेकर हाल के दिनों में किसानों और कृषि संगठनों के बीच कई सवाल और आशंकाएं सामने आई थीं। विशेष रूप से यह चिंता जताई जा रही थी कि कहीं यह विधेयक किसानों के पारंपरिक बीजों और खेत में बचाए गए बीजों के उपयोग पर कोई रोक तो नहीं लगाएगा। इन तमाम चर्चाओं के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) का उद्देश्य किसानों के अधिकारों को सीमित करना नहीं, बल्कि बीज गुणवत्ता को बेहतर बनाते हुए बाज़ार व्यवस्था को मज़बूत करना है।

लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसानों, उनके द्वारा विकसित किस्मों और पारंपरिक बीजों पर लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मसौदा तैयार करते समय किसान संगठनों समेत सभी प्रमुख हितधारकों से समय-समय पर मिले सुझावों को शामिल किया गया है, ताकि कानून ज़मीनी जरूरतों के अनुरूप हो।

किसानों के पारंपरिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित

सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) किसानों के उस मौलिक अधिकार को प्रभावित नहीं करता, जिसके तहत वे अपने खेत में सुरक्षित किए गए बीजों को उगा सकते हैं, बो सकते हैं, सहेज सकते हैं, आपस में बदल सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर बेच भी सकते हैं। यह व्यवस्था पादप किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 के अनुरूप ही रखी गई है।

मंत्री ने बताया कि खेती में सदियों से चली आ रही बीज परंपरा और सामुदायिक बीज प्रणालियों की अहम भूमिका को सरकार भली-भांति समझती है। यही कारण है कि बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) में किसानों द्वारा विकसित किस्मों और पारंपरिक बीजों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

बीज गुणवत्ता सुधार पर रहेगा विधेयक का मुख्य फ़ोकस

सरकार के अनुसार, बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) का प्रमुख उद्देश्य उन बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है जो बाज़ार में व्यावसायिक रूप से बेचे जाते हैं। इसके तहत बाज़ार में उपलब्ध सभी किस्मों का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान रखा गया है। इससे किसानों को यह भरोसा मिलेगा कि उन्हें जो बीज मिल रहा है, वह निर्धारित मानकों के अनुरूप है।

इसके अलावा, विधेयक में बीज उत्पादकों, बीज प्रसंस्करण इकाइयों, विक्रेताओं और पौध नर्सरियों के पंजीकरण की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। सरकार का मानना है कि इससे बीज आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता आएगी और नक़ली या घटिया बीजों की समस्या पर अंकुश लगेगा।

Seeds Bill 2025: बीज विधेयक, 2025 क्या है? कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने दी जानकारी

आपात स्थिति में क़ीमत नियंत्रण का प्रावधान

बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) में एक अहम प्रावधान यह भी है कि आपात परिस्थितियों में बीजों की बिक्री क़ीमत को नियंत्रित किया जा सकेगा। प्राकृतिक आपदा, फ़सल संकट या किसी अन्य असाधारण स्थिति में यह व्यवस्था किसानों को अनुचित मूल्य वृद्धि से बचाने में मददगार होगी।

इसके साथ ही, बीजों के प्रदर्शन से संबंधित जानकारी का लेबल पर उल्लेख अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है, ताकि किसान ख़रीद से पहले सही निर्णय ले सकें।

डिजिटल निगरानी के लिए SATHI पोर्टल से जुड़ाव

सरकार ने बीज क्षेत्र को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग पर भी जोर दिया है। बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) में सभी संबंधित इकाइयों के लिए SATHI पोर्टल पर पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। इससे बीज से जुड़े आंकड़ों की निगरानी आसान होगी और नियामक व्यवस्था को मज़बूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि तकनीक के माध्यम से बीज क्षेत्र में भरोसे और जवाबदेही को और मज़बूत किया जा सकता है।

जैव विविधता और स्वदेशी बीजों को संरक्षण

मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि जैव विविधता अधिनियम, 2002 और पादप किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत पहले से ही ऐसे प्रावधान मौजूद हैं, जो किसानों, सामुदायिक बीज उत्पादकों और स्वदेशी बीज किस्मों की रक्षा करते हैं। बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) इन कानूनों के साथ समन्वय बनाते हुए आगे बढ़ता है, न कि उन्हें कमज़ोर करता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आधुनिक बीज उद्योग के विकास के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान और जैव विविधता भी सुरक्षित रहे।

अभी मसौदा चरण में है विधेयक

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) अभी पूर्व-विधायी परामर्श चरण में है। इसे सार्वजनिक डोमेन में इसलिए रखा गया है ताकि किसान संगठनों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त किए जा सकें। इन सुझावों के आधार पर विधेयक को और बेहतर बनाने पर विचार किया जाएगा।

मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि सरकार की मंशा किसानों के हितों के ख़िलाफ़ कोई कानून लाने की नहीं है, बल्कि ऐसा ढांचा तैयार करना है जो गुणवत्ता, पारदर्शिता और किसान अधिकारों—तीनों के बीच संतुलन बनाए।

संतुलन के साथ आगे बढ़ने की कोशिश

कुल मिलाकर, बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) को सरकार एक ऐसे सुधारात्मक कदम के रूप में देख रही है, जो किसानों की परंपरागत आज़ादी को बरकरार रखते हुए बाज़ार में बिकने वाले बीजों की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। सरकार का दावा है कि इस विधेयक से किसानों को बेहतर बीज, अधिक भरोसा और दीर्घकाल में बेहतर उत्पादन का लाभ मिलेगा।

अब देखना होगा कि परामर्श प्रक्रिया के बाद बीज विधेयक, 2025 (Seeds Bill 2025) किस अंतिम स्वरूप में सामने आता है और किसानों के सुझावों को इसमें किस हद तक शामिल किया जाता है।

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