केंद्र सरकार ने MGNREGA की जगह पेश किया नया Bill,125 दिन का काम, लेकिन कृषि सीज़न में रोक!

सरकार ने 'रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन- ग्रामीण- विधेयक-2025' (Employment and Livelihood Guarantee Mission - Rural - Bill - 2025) नाम के इस नए कानून पेश किया है। जिसका लक्ष्य 'विकसित भारत 2047'  (Developed India 2047) के विज़न के मुताबिक ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलना है।

केंद्र सरकार ने MGNREGA की जगह पेश किया नया Bill,125 दिन का काम, लेकिन कृषि सीज़न में रोक!

केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक नया और बड़ा विधेयक पेश किया है, जो बीस साल पुराने Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, 2005 (MGNREGA) को बदल देगा। ‘रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन- ग्रामीण- विधेयक-2025’ (Employment and Livelihood Guarantee Mission – Rural – Bill – 2025) यानि VB – G RAM G नाम के इस नए कानून का लक्ष्य ‘विकसित भारत 2047’  (Developed India 2047) के विज़न के मुताबिक ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलना है।

मनरेगा से कितना अलग है नया कानून?

1.रोज़गार के दिन: सबसे बड़ा बदलाव ये है कि रोजगार के गारंटीशुदा दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए गए हैं। यानी अब हर इच्छुक ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन का अकुशल शारीरिक श्रम का काम मिलेगा।

2.काम का स्वरूप: मनरेगा मुख्य रूप से मजदूरी देने वाली योजना थी, लेकिन नया कानून इसे व्यापक ग्रामीण विकास और इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के रूप में बदल देगा। सभी काम एक राष्ट्रीय ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लान से जुड़े होंगे।

3.कृषि सीज़न में रोक: नए कानून में एक अहम और Controversial provisions है। इसमें खेती के busy season (बुवाई और कटाई) में अधिकतम 60 दिनों तक इस योजना के तहत काम रोकने का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को मजदूर मिल सकेंगे। लेकिन सवाल है कि इस दौरान भूमिहीन मजदूरों की आय का क्या होगा?

4.फंडिंग में बदलाव: मनरेगा में केंद्र श्रम लागत का 100 प्रतिशत और Material costs  का 75 फीसदी देता था। नई योजना में राज्यों का हिस्सा बढ़ेगा। आम राज्यों के लिए केंद्र-राज्य का अनुपात 60:40 होगा, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10 रहेगा।

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नए कानून की खास बातें: ‘Single Plan – Multiple Funding’

ग्राम पंचायत योजना ज़रूरी: अब सभी काम ग्राम पंचायत स्तर पर बनने वाली ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ से ही निकलेंगे। इसे लोगों की भागीदारी से तैयार किया जाएगा।

चार कैटेगरी  में काम: सभी कामों को चार हिस्सों में बांटा गया है-

1.जल सुरक्षा (जल संरक्षण, सिंचाई)

2.ग्रामीण बुनियादी ढांचा (सड़क, स्कूल, पेयजल)

3.आजीविका इन्फ्रास्ट्रक्चर (कृषि भंडारण, हाट, कौशल केंद्र)

4.आपदा प्रबंधन (बाढ़-सूखे से बचाव के काम)

योजनाओं का कनवर्जेंस

अलग-अलग योजनाओं के फंड और प्रयासों को आपस में जोड़ा जाएगा ताकि कामों में दोहराव रुके और पैसा प्रभावी ढंग से लगे।

डिजिटल और ट्रांसपेरेंसी 

बायोमेट्रिक हाजिरी, जियो-टैगिंग, रियल-टाइम डैशबोर्ड, एआई आधारित ऑडिट जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। सभी भुगतान सीधे खाते में और सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन होंगे।

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बड़े सवाल और चुनौतियां

  • कृषि सीजन में काम रोकने से गरीब मजदूर परिवारों की आय पर क्या असर पड़ेगा?
  • क्या ग्राम पंचायतें इतनी जटिल योजना बनाने और लागू करने में सक्षम होंगी?
  • केंद्र सरकार द्वारा राज्यवार आवंटन तय करने से क्या यह योजना ‘मांग आधारित’ के बजाय ‘आपूर्ति आधारित’ नहीं बन जाएगी?
  • विपक्ष का आरोप है कि यह मनरेगा को कमजोर करने का प्रयास है, जबकि सरकार कहती है कि यह उसे मजबूत और समग्र बनाने की दिशा में कदम है।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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