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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा है कि बागवानी उत्पादों के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनना चाहिए। उन्होंने यह बात बेंगलुरु के हेसरघट्टा स्थित भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR) के दौरे के दौरान कही। समीक्षा बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि फूल, सब्ज़ी और फलों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में भारत के लिए यह ज़रूरी है कि वह उत्पादन, शोध और प्रोसेसिंग में मज़बूती हासिल करे।
IIHR बेंगलुरु में समीक्षा बैठक और फील्ड विजिट
IIHR में आयोजित समीक्षा बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने बागवानी क्षेत्र में चल रहे शोध कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। इससे पहले उन्होंने संस्थान परिसर के बगीचों का भ्रमण किया और फलों, सब्ज़ियों व फूलों की विभिन्न क़िस्मों के बारे में वैज्ञानिकों से विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने किसानों से संवाद भी किया और उनकी ज़रूरतों व अनुभवों को सुना। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संस्थानों में हो रहा शोध सीधे किसानों के खेत तक पहुंचे, यही सरकार की प्राथमिकता है।
फलों की नई क़िस्मों पर केंद्रित हो शोध
समीक्षा बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने आम, सीताफल, जामुन, सेब और नींबू जैसी फ़सलों की नई क़िस्मों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि देशभर में फलों की खपत अधिक है, इसलिए शोध का फ़ोकस ऐसी क़िस्मों पर होना चाहिए जिनकी शेल्फ लाइफ लंबी हो और जो प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त हों। शिवराज सिंह चौहान ने बागवानी वैज्ञानिकों को निर्देश दिए कि जलवायु परिवर्तन, वायरस, बैक्टीरिया और अन्य रोगों के प्रति सहनशील पौधों पर प्रयोग और शोध तेज किया जाए।
विदेशी क़िस्में, सफल प्रयोग और निर्यात की संभावना
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत में विदेशी क़िस्मों की सब्ज़ियों और फलों पर भी सफल प्रयोग हुए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बागवानी क्षेत्र में निर्यात की बड़ी संभावना है। उन्होंने कहा कि उत्पादन के साथ-साथ क्वालिटी और प्रोसेसिंग पर ध्यान दिया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय उत्पादों की पहचान और मज़बूत हो। इस दिशा में शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और आश्वासन दिया कि इसके लिए अधिक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय कृषि मेले में किसानों से संवाद
बेंगलुरु में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कृषि मेले के समापन दिवस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार कर्नाटक सरकार के साथ मिलकर खेती को मज़बूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रोसेसिंग सुविधाओं के विस्तार पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि कृषि को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान के शब्दों में, किसान किसी पार्टी को नहीं देखता, उसे काम, उचित दाम और समय पर सहयोग चाहिए।
दलहन उत्पादन, बीज गांव और वैज्ञानिक सहयोग
कर्नाटक के दलहन उत्पादन पर बात करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्य अरहर और तूर दाल का देश में अग्रणी उत्पादक है, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादकता राष्ट्रीय औसत से कम है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राष्ट्रीय दलहन मिशन के तहत वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पूरी तरह उपलब्ध कराया जाएगा। शिवराज सिंह चौहान ने गुणवत्ता वाले बीजों के महत्व को रेखांकित करते हुए बीज गांव स्थापित करने का आह्वान किया।
उन्होंने घोषणा की कि कर्नाटक में 25 बीज गांव विकसित किए जाएंगे, जहां किसान स्थानीय स्तर पर बीज उत्पादन करेंगे। बीज उत्पादन और दलहन की मॉडल खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 10 हज़ार रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रमुख तूर उत्पादक क्षेत्रों में इन पहलों को पूरा समर्थन दिया जाएगा।
प्रोसेसिंग यूनिट्स से किसानों को बेहतर दाम
प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक में 35 दाल मिल स्थापित करने की घोषणा की। प्रत्येक यूनिट को केंद्र से 25 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान उत्पादक संगठन, किसान समूह और निजी क्षेत्र को इन यूनिट्स की स्थापना के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिल सकें।
श्री अन्न, मिलेट्स और नारियल विकास पर ज़ोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि श्री अन्न और मिलेट्स को बढ़ावा देने में कर्नाटक की अहम भूमिका रही है, जिसे बाद में राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मिली। उन्होंने मिलेट किसानों को निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया और ज़रूरत पड़ने पर नई योजनाएं लाने की बात कही। शिवराज सिंह चौहान ने नारियल उत्पादन पर भी चिंता जताई और कहा कि पुरानी बागानें और रोग नारियल की उत्पादकता को प्रभावित कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पुराने पेड़ों को उच्च उत्पादन वाली क़िस्मों से बदलने के लिए नारियल विकास योजना शुरू की जाएगी। इसके साथ ही फ़सल रोगों से निपटने के लिए वैज्ञानिक टीमों का गठन किया गया है।
कर्नाटक को जारी धनराशि और सहकारी संघवाद
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि फ़सल मिशन और ग्रामीण मिशन के तहत कर्नाटक को 191.67 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जबकि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 154 करोड़ रुपये जल्द जारी होंगे। उन्होंने किसानों को विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बनाने के लिए बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि किसानों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। शिवराज सिंह चौहान ने दोहराया कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ केंद्र और राज्य मिलकर टिकाऊ कृषि विकास सुनिश्चित करेंगे।
आगे की राह
बागवानी, दलहन, मिलेट्स, प्रोसेसिंग और प्रशिक्षण पर केंद्रित इन पहलों के माध्यम से शिवराज सिंह चौहान ने साफ संकेत दिया है कि सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना, निर्यात को मज़बूत करना और कृषि को भविष्य के लिए तैयार करना है। इन प्रयासों से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि भारत बागवानी उत्पादों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर भी तेजी से आगे बढ़ेगा।
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