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क्या आप जानते हैं कि आपकी सर्दियों की स्वेटर, घर की खूबसूरत कालीन और यहां तक कि कई industrial products की नींव एक छोटे से धागे से जुड़ी है? जी हां, ये धागा है ऊन (Wool) का और भारत इस ऊन उत्पादन (Wool Production) में दुनिया का नौवां सबसे बड़ा देश बनकर उभर रहा है। बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स (Basic Animal Husbandry Statistics) 2025 के नए आंकड़ों ने एक शानदार तस्वीर पेश की है।
उत्पादन में उछाल
2024-25 में भारत ने 34.57 मिलियन किलोग्राम ऊन का प्रोडक्शन (Wool Production) किया, जो पिछले साल से 2.63 फीसदी अधिक है। ये बढ़ोतरी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों ग्रामीण परिवारों की आजीविका, देश की पशुधन संपदा और ‘मेक इन इंडिया’ की ताकत को दिखाती है। भारत की 77.4 मिलियन भेड़ों की आबादी दुनिया में दूसरे नंबर पर है, जो इस बढोतरी की रीढ़ है।
राज्यों का योगदान और ग्रेड का राज
ऊन उत्पादन (Wool production) में राजस्थान सबसे आगे है, जो कुल उत्पादन का लगभग 47.53 फीसदी (16,013.50 हज़ार किलो) देता है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर (23.06%), गुजरात (6.18%), महाराष्ट्र (4.75%) और हिमाचल प्रदेश (4.22%) का नंबर आता है। सबसे तेज annual growth दर पंजाब (22.04%) ने दर्ज की है।
दिलचस्प बात ये है कि भारत की ऊन तीन किस्मों में आती है-
1.कालीन ग्रेड (85 फीसदी): दुनिया भर में मशहूर भारतीय हैंडमेड कालीनों की बुनियाद।
2.पहनावा ग्रेड (5 फीसदी): बेहतरीन स्वेटर और आउटफिट बनाने के लिए।
3.मोटा ग्रेड (10 फीसदी): औद्योगिक इस्तेमाल के लिए।
एक्सपोर्ट से कमाई, दुनिया में पहचान
भारत का ऊन क्षेत्र मुख्य रूप से एक्सपोर्ट पर फोकस है। FY25 में ऊन उत्पादों का निर्यात (Export of wool products) 1.83 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा। इसमें से सबसे बड़ा हिस्सा हैंडमेड ऊनी कालीनों का है, जो लगभग 1.50 अरब डॉलर मूल्य का एक्सपोर्ट किया गया। भारतीय ऊन उत्पादों के सबसे बड़े ग्राहक अमेरिका हैं, जहां FY25 में 955 मिलियन डॉलर का सामान भेजा गया। इस तरह ये बिज़नेस 12 लाख लोगों को सीधे और 20 लाख लोगों को रिलेटेड बिज़नेस में रोजगार देता है।
सरकार का बड़ा कदम: Integrated Wool Development Program (IWDP)
ऊन क्षेत्र में इज़ाफे के लिए Union Ministry of Textiles ने 126 करोड़ रुपए के बजट वाली इंटीग्रेटेड वूल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IWDP) योजना शुरू की है। इस 5-वर्षीय (FY22-FY26) योजना का टारगेट है-
- Wool supply chain को मजबूत करना।
- बिज़नेस और ऊन प्रोड्यूसर्स को सीधे जोड़ना।
- छोटे निर्माताओं को बाजार उपलब्ध कराना।
- ऊन परीक्षण, आधुनिक उपकरण और कौशल विकास को बढ़ावा देना।
इसका एक बड़ा हिस्सा पश्मीना ऊन विकास और वूल प्रोसेसिंग पर खर्च किया जा रहा है।
ऊन, भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हैंडक्राफ्ट की समृद्धि का एक अहम हिस्सा है। बढ़ता उत्पादन, सरकार की समर्पित योजनाएं और ग्लोबल बाजार में बढ़ती मांग- ये सभी कारक मिलकर भारत को दुनिया के Wool map पर एक प्रमुख और Quality producer के तौर पर सेट कर रहे हैं।
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