रिटायरमेंट नहीं, नई शुरुआत: 63 की उम्र में राजस्थान में ड्रैगन फ्रूट की खेती

उम्र तो महज़ एक संख्या है, ये बात सौ फ़ीसदी सही है, क्योंकि जिनके मन में कुछ करने का जुनून […]

ड्रैगन फ्रूट की खेती

उम्र तो महज़ एक संख्या है, ये बात सौ फ़ीसदी सही है, क्योंकि जिनके मन में कुछ करने का जुनून होता है, वो नया काम शुरू करने के लिए उम्र नहीं देखते। जयपुर के राम कुमार भी उन्हीं लोगों में से एक हैं, जो रिटायरमेंट के बाद अपने खेती के शौक को पूरा कर रहे हैं और वो भी लीक से हटकर खेती के ज़रिए। जयपुर के जालसू गांव के 63 साल के रिटायर्ड शिक्षक राम कुमार यादव आज खेती के क्षेत्र में एक मिसाल बन चुके हैं। घूमने और नई चीज़ों को करने के शौकीन राम कुमार राजस्थान की रेतीली भूमि पर ड्रैगन फ्रूट सहित 31 फलों का उत्पादन कर रहे हैं। कैसे कर रहे हैं वो ड्रैगन फ्रूट का सफ़ल उत्पादन और पानी की कमी दूर करने के लिए कैसे उन्होंने ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई विधि को अपनाया है, इन सभी मुद्दों पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की किसान ऑफ़ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली से।

आराम नहीं नया कुछ करने की चाह

60 साल की उम्र में अमूमन नौकरी से रिटायर होने के बाद अधितकर लोग सोचते हैं कि अब वो आराम करेंगें, मगर जयपुर के राम कुमार के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। 63 की उम्र में  भी उनमें युवाओं वाला जोश है और मन में नया कुछ करने की चाह। वो खेती में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तलाश रहे हैं। अपनी 2 हेक्टेयर ज़मीन पर वो 31 फलों की खेती कर रहे हैं और सबसे अच्छी बात तो ये है कि उनकी खेती पूरी तरह से जैविक है। वो साल भर अलग-अलग फलों की खेती करते हैं, मगर सबसे ज़्यादा उत्पादन वो ड्रैगन फ्रूट का करते हैं और वही उनकी कमाई का असली ज़रिया भी है।

हाइटेक फ़ार्म

राम कुमार ने अपने खेती के शौक को पूरा करने के लिए न सिर्फ़ लीक से हटकर खेती को चुना, बल्कि अपने फ़ार्म को पूरी तरह से हाईटेक बनाया है, जहां रुकने की भी व्यवस्था है। यही नहीं वो जब भी कहीं बाहर जाते हैं तो ट्रायल के लिए अलग-अलग तरह के पौधे लाकर लगाते हैं। जिससे उनके पास फलों की कई वैरायटी इकट्ठी हो चुकी है। ड्रैगन फ्रूट की खेती के सफ़र के बारे में उनका कहना है कि उन्हें घूमने का बहुत शौक था जो इस दौरान उन्होंने कई जगहों पर ड्रैगन फ्रूट की खेती देखी जिससे वो आकर्षित हुए और उनके मन में भी इसे करने की इच्छा हुई, तो रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपनी ये इच्छा पूरी कर ली।

रिटायरमेंट के बाद खेती पर पूरा फ़ोकस

राम कुमार बताते हैं कि खेती तो उन्होंने 15 साल पहले ही शुरू की थी, मगर रिटायरमेंट के बाद उस पर ज़्यादा ध्यान देने लगे हैं जिससे अच्छा रिजल्ट आ रहा है। उनकी बागान में हर फल की कई किस्में हैं। आम की तो 10 के भी वैरायटी है। वहीं अमरूद की 3-4 किस्में, अनार की 2 और बेर की 6 किस्में है। इसके अलावा सबे की हरमन 99 किस्म का भी उत्पादन करते हैं। राजस्थान की रेतिली भूमी में इसका उत्पादन करना वाकई बहुत ही प्रेरणादायी है। इसके अलावा उन्होंने अपने इस्तेमाल के लिए 2 स्टार फ्रूट, 2 अनार, 2 आलू बुखारा के पेड़ भी लगाएं हैं। इसके अलावा नींबू और करौंदा के पेड़ को बाउंड्री वॉल पर लगाया है। इसे जाली लगाने के बाद लगाया गया है जिससे ये बाड़ का काम करती है और जंगली जानवर से सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही अतिरिक्त आमदनी भी प्रदान करती है। राम कुमार ने लाल और सफे़द करौंदा ज़्यादा लगाया है, क्योंकि इसकी बाज़ार में अच्छी कीमत मिल जाती है।

आधुनिक खेती

राम कुमार पूरी तरह से आधुनिक खेती कर रहे हैं, उन्होंने अपने खेत में 7.5 किलो वॉट का सोलर पैनल लगाया है। पानी की समस्या को देखते हुए सिंचाई के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर विधि का इस्तेमाल करते हैं।

कम पानी वाली फसल

राम कुमार कहते हैं कि ड्रैगन फ्रूट में पानी की ज़्यादा ज़रूरत नहीं पड़ती है और इससे अच्छी आमदनी भी हो जाती है, तो रेगिस्तानी इलाकों के लिए ये अच्छी फसल है। उन्होंने एक एकड़ में सिर्फ ड्रैगन फ्रूट लगाया है। वो बताते हैं कि एक एकड़ में 1600 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगे हैं। कुल 400 पोल है और एक पोल पर 4 पौधे लगाए गए हैं।

ड्रैगन फ्रूट की खेती

राम कुमार बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट को वैसे तो आप पूरे साल लगा सकते हैं, मगर इसे लगाने का सबसे अच्छा समय फरवरी है। क्योंकि फरवरी में लगाने के बाद जब बरसात आती है तो पौधे अच्छी तरह विकसित होत हैं। इसके पौधों में लाइन से लाइन की दूरी है 10 फ़ीट रखी है। वो कहते हैं क्योंकि इलाके में पानी कम है तो इसलिए ये दूरी कम रखी है। जहां पानी की समस्या नहीं है वहां किसान चाहे तो लाइन से लाइन की दूरी 12 फ़ीट भी रख सकते हैं और इस जगह में कोई सब्ज़ी लगा सकते हैं। इसके साथ ही जहां पानी की ज़्यादा कमी है, वहां इस दूरी को सिर्फ 8 फीट भी रखा जा सकता हैं। इसके साथ ही पौधों सपोर्ट देने के लिए जो पोल लगाए जैते हैं उनके बीच 8 फीट की दूरी होनी चाहिए। इसका पौधा बड़े होने पर बहुत फैलता है इसलिए उचित दूरी बनाना ज़रूरी है।

कितने दिनों में होता है उत्पादन?

ड्रैगन फ्रूट के पौधे में फल आने में थोड़ा समय लगता है। राम कुमार बताते हैं कि पौध लगाने के 18 महीने बाद फ्रूटिंग यानी उत्पादन शुरू हो जाता है। पहले साल अच्छा उत्पादन नहीं हुआ था, दूसरे साल से उन्हें अच्छा उत्पादन मिल रहा है। उनका कहना है कि एक बार पौधे लगाने के बाद 20-25 साल तक वो चलता है यानी एक बार खर्च करने के बाद 20-25 साल तक कमाई कर सकते हैं।

देखभाल ही ज़रूरी

ड्रैगन फ्रूट का अच्छा फल प्राप्त करने के लिए पौधे की सही देखभाल ज़रूरी है। राम कुमार फल आने पर उसे जाली से ढंक देते हैं। उनका कहना है कि फल के गुलाबी रंग का होने पर उसे जानवरों और कीटों से बचाने के लिए वो जाली लगाते हैं। इससे फल पर कोई दाग नहीं होता है और उसकी गुणवत्ता अच्छी रहती है। उनका कहना है कि ड्रैगन फ्रूट की खासियत है कि इसमें कोई बीमारी नहीं होती है। बस गर्मी और बरसात में फंगस का डर रहता है। ऐसे में जहां भी फंगस दिखे उस हिस्से को चाकू से काटकर हटा देना चाहिए इससे फंगस आगे नहीं बढ़ पाता है। राम कुमार ने पौधों को सपोर्ट देने के लिए दो टायर रिंग भी लगाई है ताकि एक ही टायर पर पूरा भार न आ जाए।

गर्मियों में स्वीटकॉर्न की खेती

ड्रैगन फ्रूट के पौधों के बीज की जगह में राम कुमार गर्मियों के मौसम में स्वीट कॉर्न की खेती करते हैं। वो बेड बनाकर स्वीटकॉर्न लगाते हैं। उनका कहना है कि स्वीट कॉर्न की खेती से ड्रैगन फ्रूट को भी फायदा होता है। इससे पौधों को लू नहीं लगता है। गर्मियों में यानी मार्च से जून तक वो ड्रैगन फ्रूट के पौधों के ऊपर नेट लगाकर रखते हैं, क्योंकि ये अत्यधिक गर्मी सहन नहीं कर पाते हैं। वो बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट के पौधों को पूरब-पश्चिम दिशा में लगाना अच्छा होता है, इससे उन्हें धूप ज़्यादा नहीं लगेगी। राम कुमार बताते हैं कि उनके पास ड्रैगन फ्रूट की एलिस रेड किस्म है जिसे वो गुजरात के कच्छ से लाए थे।

2 साल बाद मिले डेढ़ लाख रुपए

राम कुमार बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट का पौधा 5 महीने लगातार फल देता है। एक पौधे में 5-6 बार फल आते हैं और इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है। उनका कहना है कि वो तो खेत से ही 70 रुपए प्रति फल के हिसाब से सारा फल बेच देते हैं। वो बताते हैं कि पहले साल को कुछ मुनफ़ा नहीं हुआ, मगर 2 साल बाद उन्हें इसकी खेती से डेढ़ लाख रुपए मिले।

किस तरह की मिट्टी में होगा अच्छा उत्पादन?

राम कुमार बताते हैं कि मिट्टी जितनी उपजाऊ होगी उत्पादन उतना ही अच्छा होगा। अगर मिट्टी की गुणवत्ता खराब होगी, तो उत्पादन तो होगा, मगर फल थोड़े छोटे आकार के आएंगे। इसलिए रेतिली भूमि पर खेती करने के पर पौधों को खास देखभाल की ज़रूरत होती है।

राम कुमार खुद ही जैविक खाद भी तैयार करते हैं और उन्होंने सर्टिफिकेट के लिए भी अप्लाई किया हुआ। 63 साल की उम्र में वो जिस जोश के साथ खेती कर रहे हैं, वो न सिर्फ़ बुज़ुर्गों, बल्कि युवाओं के लिए भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उनकी सफ़लता बताती है कि अगर कोई पूरी लगन से काम करे तो रेगिस्तान में भी फूल खिलाए जा सकते हैं।

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