नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक आयोजित की गई। यह बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) की 88वीं बैठक थी, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े सार्वजनिक उपयोगिता, रणनीतिक अवसंरचना और विकास परियोजनाओं से संबंधित कुल 70 प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
इस राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विकास कार्यों और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे और कानून के प्रावधानों का पूरी तरह पालन हो।
संरक्षित क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों से जुड़े प्रस्ताव
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में उन प्रस्तावों पर विशेष रूप से विचार किया गया, जो संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, बाघ अभ्यारण्यों और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में या उनके आसपास स्थित हैं।
इन सभी मामलों को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत तय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार परखा गया। समिति ने यह देखा कि कहीं किसी परियोजना से पारिस्थितिक संतुलन को नुक़सान तो नहीं पहुंचेगा और क्या स्थानीय समुदायों के हित सुरक्षित रहेंगे।
जल जीवन मिशन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रस्ताव
इस राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में जिन प्रमुख सार्वजनिक उपयोगिता योजनाओं पर चर्चा हुई, उनमें जल जीवन मिशन (JJM) के तहत पेयजल आपूर्ति योजनाएं शामिल रहीं। इनका मक़सद दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में साफ़ पीने का पानी पहुंचाना है।
इसके अलावा प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया, ताकि वन और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
सड़क, मोबाइल टावर और ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाएं
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में सड़कों के चौड़ीकरण, 4G मोबाइल टावरों की स्थापना और बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण से जुड़े प्रस्ताव भी रखे गए।
समिति ने इन सभी मामलों में यह सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया कि निर्माण कार्य से वन्यजीवों की आवाजाही बाधित न हो और पर्यावरण को कम से कम नुक़सान पहुंचे।
मध्य प्रदेश की सिंचाई परियोजना पर चर्चा
इस बैठक में मध्य प्रदेश की एक मध्यम सिंचाई परियोजना पर भी विस्तार से विचार किया गया। यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई जल की बेहतर आपूर्ति का लक्ष्य रखती है।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में यह भी बताया गया कि इस परियोजना से वन्यजीवों और घड़ियालों के लिए बेहतर जल प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे उनके प्राकृतिक आवास को फ़ायदा पहुंचेगा।
लद्दाख और सिक्किम से जुड़े रक्षा प्रस्ताव
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में 17 रक्षा संबंधी प्रस्तावों पर भी विचार हुआ। ये प्रस्ताव लद्दाख और सिक्किम के सीमावर्ती और उच्च ऊंचाई वाले इलाकों से जुड़े थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए समिति ने इन परियोजनाओं की सिफारिश की, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा उपायों का सख़्ती से पालन किया जाए।
वैधानिक प्रावधानों और पारिस्थितिक संतुलन पर ज़ोर
इस राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में सभी प्रस्तावों की जांच वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत की गई।
समिति ने साफ़ कहा कि किसी भी परियोजना को मंज़ूरी देते समय पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वैधानिक प्रक्रियाओं और स्थानीय समुदायों की ज़रूरतों को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता।
पिछली बैठकों के फैसलों की समीक्षा
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक के दौरान पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों और जारी निर्देशों पर आधारित कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) की भी समीक्षा की गई।
इसमें यह देखा गया कि नीतियों और प्रक्रियाओं को कितना सरल और प्रभावी बनाया गया है तथा किन क्षेत्रों में और सुधार की ज़रूरत है।
परिवेश पोर्टल में सुधार पर चर्चा
इस बैठक में ‘परिवेश पोर्टल’ को बेहतर बनाने के मुद्दे पर भी बात हुई। यह पोर्टल पर्यावरण और वन्यजीव से जुड़े प्रस्तावों की ऑनलाइन निगरानी और मंज़ूरी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में तय किया गया कि भविष्य की बैठकों में इस पोर्टल के कामकाज और पारदर्शिता को और मज़बूत करने पर गहन चर्चा की जाएगी।
प्रभावी निगरानी की ज़रूरत पर सहमति
समिति के सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि केवल मंज़ूरी देना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि बाद में परियोजनाओं की सही निगरानी भी ज़रूरी है।
इसीलिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया कि आगे की बैठकों में नीतियों, कार्यक्रमों और निर्देशों के अनुपालन की स्थिति की नियमित समीक्षा की जाएगी।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की भूमिका
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। इसका काम सरकार को वन्यजीव और वनों के संरक्षण से जुड़े मामलों में सलाह देना है।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक इसी जिम्मेदारी के तहत आयोजित की जाती है, ताकि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
विकास और संरक्षण के बीच संतुलन का प्रयास
इस 88वीं राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में साफ़ संदेश दिया गया कि देश में विकास कार्य ज़रूरी हैं, लेकिन उन्हें इस तरह किया जाना चाहिए कि वन्यजीवों और पर्यावरण को नुक़सान न पहुंचे।
सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं, रक्षा परियोजनाएं और अवसंरचना विकास—सभी ज़रूरी हैं, लेकिन इनके साथ-साथ संरक्षण के नियमों का पालन भी उतना ही ज़रूरी है।
आगे भी जारी रहेगी समीक्षा प्रक्रिया
बैठक के अंत में यह तय किया गया कि आने वाली राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में न केवल नए प्रस्तावों पर विचार होगा, बल्कि पुराने फैसलों के असर और उनके पालन की स्थिति की भी गहराई से जांच की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस तरह की नियमित बैठकों से नीतियों में सुधार होगा और वन्यजीव संरक्षण को नई मज़बूती मिलेगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, यह राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही। 70 प्रस्तावों पर विचार, रक्षा परियोजनाओं की समीक्षा, जल और स्वास्थ्य योजनाओं को मंज़ूरी और नीतिगत सुधारों पर चर्चा—इन सभी फैसलों से साफ़ है कि सरकार पारिस्थितिक संतुलन और जनहित दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है।
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