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कभी रेगिस्तान की रेत तक सीमित ऊंटनी का दूध (camel milk) अब देश की डेयरी इंडस्ट्री में एक ‘White Revolution’ लाने की तैयारी में है। बीकानेर के National Research Centre on Camel (NRCC) की ताज़ा रिपोर्ट ने इसे ‘भविष्य का दूध’ यानी ‘Future Milk’ का दर्जा दिया है। ये सिर्फ (camel milk) एक पारंपरिक ड्रिंक नहीं, बल्कि एक ‘Superfood’ के रूप में उभर रहा है, जो सेहत के साथ-साथ भारत के डेयरी सेक्टर के लिए नई संभावनाओं का दरवाज़ा खोल रहा है।
हेल्थ का पावरहाउस: क्यों है ये ‘Superfood’?
NRCC की Deep Research ने ऊंटनी के दूध (camel milk) के वे गुण उजागर किये हैं जो इसे गाय और भैंस के दूध से अलग और ख़ास बनाते हैं-
1.डायबिटीज़ रोगियों के लिए वरदान
इस दूध में नैचुरल इंसुलिन पाई जाती है, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मददगार है। ये टाइप-1 डायबिटीज़ के मरीजों के लिए एक Possible Therapeutic Regimens बन सकता है।
2.ऑटिज्म में चमत्कारिक प्रभाव
कई केस स्टडीज़ में देखा गया है कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को नियमित रूप से ये दूध पिलाने पर उनके बिहेवियर और बातचीत कौशल में पॉजिटिव सुधार हुआ है।
3.कम वसा, उच्च पोषण
इसमें वसा की मात्रा केवल 3.5 से 5 फीसदी होती है, जो इसे हार्ड पेशेंट और वेट मैनेजमेंट कर रहे लोगों के लिए एक बेहतर ऑप्शन बनाती है। साथ ही, ये प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर है।
4.एलर्जी-मुक्त ऑप्शन
इसकी प्रोटीन संरचना मानव दूध के समान होने के कारण, जिन बच्चों को गाय के दूध से एलर्जी है, वे भी इसे आसानी से पचा लेते हैं।
डेयरी सेक्टर को कैसे मिलेगा बढ़ावा?
ऊंटनी के दूध की बढ़ती लोकप्रियता भारतीय डेयरी उद्योग के लिए एक नए युग की शुरुआत कर सकती है-
1.प्रोडक्ट डायर्फिसिफेकेशन (Product Diversification)
अब तक डेयरी बिज़नेस गाय और भैंस के दूध तक सीमित था। ऊंटनी का दूध इस क्षेत्र में एक नई लाइफ लाइन है। NRCC पहले ही इससे फ्लेवर्ड मिल्क, पनीर, कुल्फी, मावा, रसगुल्ला, गुलाब जामुन और यहां तक कि दूध पाउडर जैसे प्रोडक्ट बनाने में सफलता पा चुका है। इससे डेयरी कंपनियों के लिए बाजार में नए और अनूठे उत्पाद पेश करने का रास्ता खुलेगा।
2.प्रीमियम हेल्थ प्रोडक्ट्स का बाज़ार
ये दूध अपने औषधीय गुणों के कारण एक प्रीमियम उत्पाद बन सकता है। हेल्थ के लिए जागरूक उपभोक्ताओं, डायबिटीज़ रोगियों और ख़ास आहार लेने वाले लोग इसके लिए अच्छी कीमत चुकाने को तैयार हैं। इससे डेयरी फार्मों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें ज़्यादा फायदेमंद बनाने में मदद मिलेगी।
3.सूखा क्षेत्रों में आजीविका
ऊंट ख़ासतौर सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाले जाते हैं, जहां पारंपरिक डेयरी फार्मिंग एक चुनौती है। ऊंटनी के दूध के commercialization से इन क्षेत्रों के किसानों और पशुपालकों के लिए आमदनी का एक नया सोर्स पैदा होगा। ये ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ‘dry property’ को ‘economic assets’ में बदलने का काम करेगा।
4.एक्सपोर्ट की अपार संभावना
पश्चिमी देशों में भी ऊंटनी के दूध और उससे बने प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत अपनी विशाल ऊंट आबादी के साथ इसके निर्यात से अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित कर सकता है।
कैसे पूरे भारत में फैलेगी इसकी पहुंच?
ऊंटनी का दूध केवल राजस्थान तक सीमित न रह जाए, इसके लिए एक strategy की ज़रूरत है-
मजबूत कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स: दूध को ताजा रखकर देश के दूर-दराज के कोनों तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत कोल्ड चेन सिस्टम विकसित करना जरूरी है। पाली ज़िले से शुरू हुई ट्रेन-आधारित आपूर्ति को और विस्तार देने की ज़रूरत है।
1.जागरूकता अभियान
आम जनता को इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में शिक्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। सोशल मीडिया, हेल्थ सेमिनार और डॉक्टरों के माध्यम से इसकी जानकारी पहुंचानी होगी।
2.ब्रांडिंग और मार्केटिंग
‘डेजर्ट मैजिक’, ‘कैमल गोल्ड’ जैसे आकर्षक ब्रांड नामों के साथ इसे बाजार में उतारा जा सकता है। इसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों को प्रमुखता से प्रचारित किया जाना चाहिए।
3.सरकारी नीतिगत समर्थन
सरकार को ऊंट पालकों को सब्सिडी, बीमा और तकनीकी सहायता प्रदान करनी चाहिए। ऊंट दूध उत्पादों को FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की मान्यता मिलने से इस उद्योग को विश्वसनीयता मिलेगी।
4.रिटेल आउटलेट्स में उपलब्धता
इसे बड़े सुपरमार्केट और ऑनलाइन ग्रोसरी प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि शहरी उपभोक्ता इसे आसानी से खरीद सकें।
एक महत्वपूर्ण सलाह
NRCC के एक्सपर्ट इस बात पर जोर देते हैं कि ऊंटनी का दूध हालांकि बहुत फायदेमंद है, लेकिन किसी गंभीर बीमारी में इसे दवा के विकल्प के रूप में केवल डॉक्टर की सलाह पर ही इस्तेमाल करना चाहिए। हमेशा pasteurized milk का ही इस्तेमाल करें ताकि Infection का ख़तरा न रहे।
सही पॉलिसी, इनवेस्टमेंट और पब्लिक अवेयरनेस के साथ, ये ‘Desert Gold’ भारत की अर्थव्यवस्था और लोगों के हेल्थ को Wealthy करने की पावर रखता है। फ्यूचर का ये दूध, भारत के डेयरी बिज़नेस को शानदार बनाने के लिए तैयार है।
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