Reimagining Agriculture Scheme: AI, डिजिटल ट्विन और सटीक खेती पर होगा ज़ोर, जानिए NITI Aayog का पूरा रोडमैप

नीति आयोग (NITI Aayog) के ‘फ्रंटियर टेक हब’ (Frontier Tech Hub )ने ‘रीइमेजिनिंग एग्रीकल्चर’ (Reimagining Agriculture Scheme) नाम से एक स्कीम पेश की है, जो भारतीय कृषि को दुनिया की सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (The most advanced technology) से जोड़ने का ब्लूप्रिंट है।

Reimagining Agriculture Scheme: AI, डिजिटल ट्विन और सटीक खेती पर होगा ज़ोर, जानिए NITI Aayog का पूरा रोडमैप

अब भारत के खेतों में हल और बैलों की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन नज़र आना शुरू हो चुके हैं।  इसको पूरी तरह से अपनने के लिए एक ठोस रोडमैप है जिसे हकीकत में बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। नीति आयोग (NITI Aayog) के ‘फ्रंटियर टेक हब’ (Frontier Tech Hub )ने ‘रीइमेजिनिंग एग्रीकल्चर’ (Reimagining Agriculture Scheme) नाम से एक स्कीम पेश की है, जो भारतीय कृषि को दुनिया की सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (The most advanced technology) से जोड़ने का ब्लूप्रिंट है।

क्यों है ये रोडमैप ज़रूरी?

भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली कृषि आज भी मौसम, कीटनाशक, कम उत्पादकता और घटती आमदनी जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। छोटे किसानों के लिए तो ये संकट और गहरा है। इसी को ध्यान में रखते हुए ये रोडमैप तैयार किया गया है। लेकिन सबसे खास बात ये है कि इसमें ‘वन साइज फिट्स ऑल’ का फॉर्मूला नहीं अपनाया गया। किसानों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है-

1.आकांक्षी किसान (Aspiring Farmer)

ये वे छोटे किसान हैं जिनके पास संसाधन कम हैं। इनके लिए बुनियादी डिजिटल समाधान, मोबाइल-आधारित सलाह और सस्ते तकनीकी उपकरणों पर फोकस किया जाएगा।

2.परिवर्तनशील किसान (Changing Farmers)

ये मध्यम श्रेणी के किसान हैं जो तकनीक अपनाने के लिए तैयार हैं। इन्हें प्रिसिजन फार्मिंग, डेटा-आधारित फैसले और बेहतर मशीनीकरण से जोड़ा जाएगा।

3.उन्नत किसान (Advanced Farmer)

ये बड़े और प्रगतिशील किसान हैं। इनके लिए एआई, डिजिटल ट्विन्स (Digital Twins), और ऑटोमेशन (Automation) जैसी Cutting-Edge Technology लाई जाएगी।

कौन-कौन सी टेक्नोलॉजी होगी गेम-चेंजर?

इस रोडमैप में कुछ ऐसी तकनीकों को प्रमुखता से शामिल किया गया है, जो कृषि के तरीके को ही बदल देंगी:

1.आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

 एआई मॉडल मिट्टी की गुणवत्ता, मौसम का पैटर्न और फसलों के स्वास्थ्य का विश्लेषण करके यह बता सकेंगे कि कब, क्या और कितना बोना है। कीटों या बीमारियों का पता भी एआई से चल जाएगा।

2.डिजिटल ट्विन्स

ये कांसेप्ट बिल्कुल नया है। इसके तहत किसान अपने खेत का एक वर्चुअल मॉडल कंप्यूटर पर बना सकेंगे। बिना खेत में पैर रखे, इस डिजिटल प्रतिरूप पर वे विभिन्न परिस्थितियों का टेस्ट करके देख सकेंगे कि कौन-सा फैसला सही रहेगा।

3.प्रिसिजन एग्रीकल्चर

ड्रोन और सेंसर की मदद से खेत के हर हिस्से की जरूरत के हिसाब से पानी, खाद और कीटनाशक दिए जाएंगे। इससे लागत कम होगी और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा।

4.क्लाइमेट-रेजिलिएंट सीड्स

जलवायु परिवर्तन (Climate change)की मार झेलने वाले नए बीजों पर रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि सूखा, बाढ़ या लवणता जैसी समस्याओं में भी फसल अच्छी हो।

गुजरात बनेगा मॉडल स्टेट?

इस रोडमैप के लॉन्च इवेंट में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि गुजरात इस कृषि क्रांति का आगुआ बनने के लिए तैयार है। राज्य पहले ही डिजिटल क्रॉप सर्वे, डिजिटल एग्रीकल्चर फार्म रजिस्ट्री और ‘ई-खेदुत’ पोर्टल (Digital Crop Survey, Digital Agriculture Farm Registry and ‘e-Khedut’ portal) जैसी पहल शुरू कर चुका है। ये सभी कदम किसानों को तकनीक से सीधे जोड़ रहे हैं।

क्या है बड़ी तस्वीर?

नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने सही कहा कि भारत में कोई दो किसान एक जैसे नहीं हैं। इसलिए तकनीक को इस क़िस्मों को समझना होगा।  इस महत्वाकांक्षी योजना को बीसीजी, गूगल और सीआईआई (BCG, Google and CII) जैसे दिग्गज संगठनों का सहयोग मिल रहा है। ये पहल ‘विकसित भारत @2047’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार है।  

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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