Kinnu’s Garden: जानिए कैसे अमनप्रीत सिंह किन्नू का बाग लगाकर बने सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने वाले किसान

अमनप्रीत सिंह (Amanpreet Singh) के पास 50 किलो का किन्नू का बाग़ (Kinnu's Garden) है। इसके साथ ही, उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) की नई किस्म "लेस सीडेड" को 28 किलो में लगाया है, जो अगले साल फल देना शुरू कर देगी।

Kinnu's Garden: जानिए कैसे अमनप्रीत सिंह किन्नू का बाग लगाकर बने सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने वाले किसान

पंजाब के मोगा ज़िले (Moga district of Punjab) के रहने वाले अमनप्रीत सिंह (Amanpreet Singh) ने साल 2002 में अपना बागवानी का सफ़र शुरू किया था। उन्होंने सिर्फ़ 4 एकड़ ज़मीन पर किन्नू का बाग (Kinnu’s Garden) लगाकर इसकी शुरूआत की थी। उस वक्त उन्होंने भी नहीं सोंचा था कि उनका ये काम एक अलग मुकाम तक ले जाएगा। जब अमनप्रीत सिंह ने किन्नू का बाग (Kinnu’s Garden) लगाया था उस वक्त उन्होंने Electronic and Communication Engineering में डिग्री हासिल की थी। हायर ऐजुकेशन के बाद, उनके पास नौकरी के कई अवसर आए, लेकिन खेती में उनकी रुचि उन्हें वापस अपने खेतों की ओर खींच लाई। पारंपरिक खेती से अलग हटकर कुछ नया करने की चाहत ने उन्हें बागवानी की ओर रुख करने के लिए Inspire  प्रेरित किया।

कैसे शुरू हुआ सफ़र

मोगा ज़िले के हरियेवाला गांव के निवासी अमनप्रीत सिंह ने शुरुआत में 4 एकड़ ज़मीन पर किन्नू के पौधे लगाए और इसके साथ ही गेहूं और धान जैसी फ़सलें भी उगाते रहे। जब उन्होंने किन्नू की खेती करने का फ़ैसला किया। सबसे पहले उन्होंने मिट्टी की जांच करवाई। रिपोर्ट के अनुसार, मिट्टी किन्नू के लिए सही नहीं थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और खेत की मिट्टी में गड्ढे खोदे और रेत डाली, ताकि किन्नू के लिए एक सूखा और अनुकूल वातावरण तैयार हो सके।

आज, मोगा में उनका बाग़ इलाके में मशहूर है और कई दूसरे किसान उनसे सलाह लेकर किन्नू की खेती कर रहे हैं। अमनप्रीत सिंह का मानना ​​है कि किसानों के बीच सहयोग और इनफॉर्मेशन का आदान-प्रदान खेती को मज़बूत बनाता है। उनका मानना ​​है कि सहकारी व्यवस्था किसानों की कई समस्याओं का समाधान है। पहले उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर अपनी ज़मीन शेयर की थी, जो आज के टाइम में एक अलग मिसाल है।

किन्नू की खेती कैसे की जाती है?

किन्नू शुष्क क्षेत्रों की फसल है। ये ख़ास तौर से अबोहर, फाज़िल्का, गंगानगर (राजस्थान) और पाकिस्तान के सरगोधा क्षेत्र में उगाया जाता है। मानसून की बारिश के बाद, अगस्त से सितंबर के महीनों में इसके पौधे लगाए जाते हैं। चार साल बाद, ये पौधे फल देने लगते हैं। मार्च में फूल आते हैं, नवंबर-दिसंबर में फल पकने लगते हैं और फरवरी-मार्च तक फल लगते रहते हैं। एक बार लगाने के बाद, पौधा लगभग 25 से 30 साल तक फल देता रहता है।

कड़ी मेहनत, चुनौतियां और कठिनाइयां

अमनप्रीत सिंह कहते हैं कि ‘किन्नू की खेती साल भर की ज़िम्मेदारी है।’ वो हंसते हुए कहते हैं, ‘हमें सर्दियों में शादियां देखने को नहीं मिलतीं क्योंकि काम नवंबर से ही शुरू हो जाता है।’

उनका कहना है कि किन्नू में फंगस का ख़तरा हमेशा बना रहता है, इसलिए समय-समय पर फफूंदनाशकों का इस्तेमाल करना पड़ता है। बगीचे की सफ़ाई, निराई और मिट्टी प्रबंधन साल भर बिना किसी मौसम के चलता रहता है।

मार्केटिंग और बाज़ार की हक़ीक़त

उन्होंने अपने खेत में ही ग्रेडिंग और सफ़ाई मशीनें लगाई हैं। ग्रेडेड किन्नू दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भेजे जाते हैं।

हालांकि, मार्केटिंग को लेकर उन्होंने कुछ निराशा भी जताई। उनका कहना है कि पहले पेप्सी कंपनी ने अबोहर और होशियारपुर में प्रोसेसिंग प्लांट लगाए थे और ये भरोसा दिया गया था कि छोटे या अधपके किन्नू भी ख़रीदे जाएंगे, लेकिन ये व्यवस्था ज़्यादा दिन नहीं चली। आज भी किसानों को बाज़ार में स्थिर क़ीमतों और प्रोसेसिंग के अवसरों की कमी महसूस होती है। पंजाब सरकार की संस्था पंजाब एग्रो के साथ अमनप्रीत सिंह का अनुभव भी बुरा रहा है। उनके अनुसार, ये संस्था एक ‘सफ़ेद हाथी’ से ज़्यादा कुछ नहीं है। और ज़मीन सच्चाई से कोसों दूर, बंद कमरों की तारीफ़ों में मशगूल है।

नई किस्में और उपलब्धियां 

अमनप्रीत सिंह के पास वर्तमान में 50 किलो का किन्नू का बाग़ है। इसके साथ ही, उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) की नई किस्म “लेस सीडेड” को 28 किलो में लगाया है, जो अगले साल फल देना शुरू कर देगी।

उनका मानना ​​है कि “कृषि में सफलता केवल कड़ी मेहनत से ही नहीं, बल्कि उचित ज्ञान और नई तकनीक को समय पर अपनाने से भी मिलती है।” वे कहते हैं कि एक पुरानी कहावत है कि “दाब के वह और राज के खा पर आज का ख़तरा आज का है।”

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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