EIMA Agrimatch India 2025: हरित ऊर्जा और महिला किसानों पर जोर देकर संपन्न हुआ EIMA एग्रीमैच इंडिया 2025

EIMA एग्रीमैच, Agricultural machinery and technology की एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी (International Exhibition) है, जिसका आयोजन FICCI और इटली की संस्था FederUnacoma ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय (Union Agriculture Ministry) के सहयोग से किया।

EIMA Agrimatch India 2025: हरित ऊर्जा और महिला किसानों पर जोर देकर संपन्न हुआ EIMA एग्रीमैच इंडिया 2025

देश की कृषि को आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम ‘EIMA Agrimatch India 2025’ प्रदर्शनी के रूप में आज यहां संपन्न हुआ। इस तीन दिवसीय आयोजन में भविष्य की खेती का रोडमैप (Roadmap for the future of farming) तैयार हुआ, जिसमें green energy से चलने वाले कृषि यंत्रों और महिला किसानों के लिए अनुकूल उपकरणों पर  ख़ास जोर दिया गया।

क्या है EIMA एग्रीमैच?

ये Agricultural machinery and technology की एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी (International Exhibition) है, जिसका आयोजन FICCI और इटली की संस्था FederUnacoma ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय (Union Agriculture Ministry) के सहयोग से किया। 27 से 29 नवंबर तक IARI, पूसा के मैदान में चले इस आयोजन में लगभग 20,000 किसानों, 4,000 डीलरों और 180 से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और ओडिशा के किसानों की इसमें खासी भीड़ रही।

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हरित ऊर्जा है भविष्य

कृषि मंत्रालय के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने अपने मुख्य भाषण में एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगले 5-10 सालों में हमें अपनी तकनीक को green fuelकी ओर मोड़ना होगा। चाहे वह बिजली से चलने वाले ट्रैक्टर हों या कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) पर चलने वाली मशीनें। इस बदलाव से किसानों का रखरखाव और ईंधन खर्च कम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजनाएं अब हरित ईंधन (green fuel) आधारित तकनीकों को प्राथमिकता देंगी।

महिला किसानों की भूमिका है अहम

डॉ. चतुर्वेदी ने ‘Gender Budgeting’ पर जोर देते हुए उद्योग जगत से कहा कि वे महिला-अनुकूल कृषि उपकरण (Women-Friendly Farm Equipment) बनाएं। उन्होंने कहा, ‘अक्सर नीति निर्माता सोचते हैं कि महिलाओं को मशीन का मालिकाना हक दे देना ही काफी है, लेकिन इससे उनका शारीरिक श्रम कम नहीं होता। सबसे कठिन कृषि कार्य महिलाएं करती हैं, इसलिए हमें ऐसे उपकरण चाहिए जो वास्तव में उनके काम के बोझ को कम करें।’ उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को ‘International Year of Women Farmers’ घोषित किया है।

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कृषि सेवा के रूप में मशीनें

टैफे के ग्रुप प्रेजिडेंट और आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री टी.आर. केसवान (Mr. T.R. Kesavan, Group President of TAFE and Chairman of the Organizing Committee) ने एक नई अवधारणा पेश की। उन्होंने कहा कि किसान के लिए एक सीडर (बीज बोने की मशीन) खरीदना मुश्किल है जो साल में सिर्फ कुछ दिन काम आती है। लेकिन अगर उसे ‘कृषि सेवा’ (Agriculture as a Service) के रूप में उपलब्ध कराया जाए, तो यह किसानों के लिए किफायती हो सकता है। इस दिशा में मंत्रालय के साथ चर्चा भी हुई है।

भारत-इटली सहयोग को मिली नई उड़ान

इटली के राजदूत मिस्टर एंटोनियो बार्टोली (Mr. Antonio Bartoli, Ambassador of Italy) ने घोषणा की कि जल्द ही भारत में इटली के दूतावास में एक कृषि अटैशे (Agriculture Attaché) नियुक्त किया जाएगा, ताकि दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग और मजबूत हो सके। इटली इस आयोजन में पार्टनर देश था।

भारत के कृषि बाजार की विशाल संभावना

FederUnacoma की डायरेक्टर जनरल सिमोना रापास्टेला ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत का कृषि तकनीक बाजार 2023 में 13.7 अरब डॉलर का था, जो 2033 तक 31.6 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यानी इस क्षेत्र में लगभग 9% की सालाना वृद्धि दर रहेगी।

 

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