सुजलम शिखर सम्मेलन 2025 में जल सुरक्षा और सतत विकास का नया संकल्प

सुजलम शिखर सम्मेलन 2025 में जल शक्ति मंत्रालय ने जल सुरक्षा, कृषि और समुदाय आधारित सतत विकास के लिए नई रणनीतियां पेश कीं।

सुजलम शिखर सम्मेलन 2025

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित सुजलम शिखर सम्मेलन 2025 भारत मंडपम, नई दिल्ली में शुरू हो चुका है। यह दो दिवसीय आयोजन 29 नवंबर तक चलेगा, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, किसान प्रतिनिधि, पंचायत सदस्य और जल विशेषज्ञ एक साथ जल प्रबंधन, स्वच्छता और सतत विकास पर मंथन कर रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक ‘जल कलश’ समारोह के साथ हुई, जिसने भारतीय संस्कृति में जल के आध्यात्मिक और जीवनदायी महत्व को दर्शाया। इस अवसर पर लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह (SHGs), गैर सरकारी संगठन और राष्ट्रीय जल पुरस्कार के विजेता शामिल थे।

प्रधानमंत्री के विजन से जुड़ा राष्ट्रीय अभियान

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि सुजलम शिखर सम्मेलन 2025 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का विस्तार है जिसमें “जल सुरक्षा और सतत भारत” को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन नीतिगत निर्णयों में जमीनी अनुभवों और समुदाय की भागीदारी को शामिल करने का मंच है।

उन्होंने बताया कि भारत, जो विश्व की लगभग 18% आबादी का घर है, उसके पास मात्र 4% मीठे जल संसाधन हैं। ऐसे में तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण आंदोलन ज़रूरी है। मंत्री ने कहा, “सुजलम शिखर सम्मेलन 2025, विज्ञान, नीति और जनभागीदारी को जोड़ने वाला सेतु बनेगा, जिससे देश दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।”

जल शक्ति मंत्रालय की प्रमुख पहलें

मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि जल शक्ति अभियान (JSA) और जल संचय जन भागीदारी (JSJB) के तहत देशभर में लाखों जल संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही नमामि गंगे कार्यक्रम, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से नदियों की स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल उपलब्धता और स्वच्छता के स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है।

सुजलम शिखर सम्मेलन 2025 के उद्घाटन सत्र में जल संचय जन भागीदारी 1.0 पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसमें समुदाय-नेतृत्व वाले जल संरक्षण मॉडलों को प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा, बराक नदी बेसिन की पारिस्थितिक स्थिति पर आधारित रिपोर्ट और गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल भी जारी किया गया, जो वास्तविक समय में नदी स्वास्थ्य की निगरानी की सुविधा प्रदान करेगा।

सुजलम शिखर सम्मेलन 2025 में जल सुरक्षा और सतत विकास का नया संकल्प

कृषि से जुड़ा जल प्रबंधन पर विशेष ज़ोर

मंत्री पाटिल ने कहा कि कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट मॉडर्नाइजेशन (समृद्धि–MCAD) योजना वैज्ञानिक सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से कृषि में जल दक्षता को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि कैच द रेन – 2025 अभियान के तहत अब तक 22.5 लाख जल संरक्षण कार्य और 42 लाख वृक्षारोपण पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सुजलम शिखर सम्मेलन 2025 से प्राप्त अनुभव और सुझाव भारत के जल संसाधन प्रबंधन में दीर्घकालिक सुधार का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

राज्य मंत्रियों ने साझा किया अपना दृष्टिकोण

राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने कहा कि यह सम्मेलन जल और स्वच्छता सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने का अवसर है। उन्होंने कहा, “सुजलम भारत केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जल-सुरक्षित और सशक्त समुदायों के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प है।”

वहीं, राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने कहा कि जल सुरक्षा केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और समानता से जुड़ा विषय है। उन्होंने बताया कि जब किसी समुदाय को स्वच्छ जल की सुनिश्चित उपलब्धता होती है, तो यह महिलाओं के सशक्तिकरण, बच्चों की शिक्षा और परिवारों के बेहतर स्वास्थ्य का मार्ग खोलता है।

सुजलम शिखर सम्मेलन 2025 के मुख्य विषय

इस सम्मेलन के तहत छह प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा की जा रही है —

  1. नदियों और झरनों का पुनरुद्धार – अविरल और निर्मल जल प्रवाह के लिए सामुदायिक प्रयास।
  2. पेयजल की स्थिरता – स्रोत-संरक्षण और डिजिटल शासन उपकरणों के माध्यम से स्थायित्व।
  3. प्रौद्योगिकी और जल प्रबंधन – एआई-आधारित निगरानी और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का विस्तार।
  4. जल संरक्षण और पुनर्भरण – भूजल पुनर्भरण और पारंपरिक जल प्रणालियों का पुनर्जीवन।
  5. ग्रे वाटर प्रबंधन और पुन: उपयोग – उद्योग और घरों में जल पुन: उपयोग की नई दिशा।
  6. सामुदायिक सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन – स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से दीर्घकालिक स्थिरता।

इन चर्चाओं से जो निष्कर्ष निकलेंगे, उन्हें मंत्रालय क्रियान्वयन योग्य सिफारिशों के रूप में संकलित करेगा, ताकि नीति और योजनाओं के अगले चरण में उन्हें लागू किया जा सके।

सुजलम भारत की ओर – एक सामूहिक कदम

सुजलम शिखर सम्मेलन 2025 केवल एक बैठक नहीं, बल्कि भारत के सतत जल भविष्य की दिशा में एक सामूहिक यात्रा है। जल, कृषि और पर्यावरण की इस त्रिस्तरीय साझेदारी से भारत न केवल जलवायु-लचीला राष्ट्र बनेगा, बल्कि अपने किसानों और ग्रामीण समुदायों को स्थायी जीवनयापन का आधार भी प्रदान करेगा।

यह सम्मेलन एक बार फिर इस सोच को सशक्त करता है कि —
“सुजलम भारत का विजन तभी साकार होगा जब हर खेत, हर गांव और हर घर में जल सुरक्षा और सहभागिता का भाव होगा।”

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