क्या आप जानते हैं कि पिछले तीन साल में भारत में 43,001 बार ऐसे बीज बाजार में पाए गए जो खेती के लायक नहीं थे? यानी हर साल औसतन 14,000 बार किसानों के हाथों में घटिया या नकली बीज पहुंचे। इन बीजों से फसल खराब होती है, किसानों का पसीना बह जाता है और कर्ज का बोझ बढ़ जाता है। इसी समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार एक नया और सख्त बीज कानून (Seed Bill 2025) लेकर आ रही है।
नए बीज विधेयक 2025 की ‘बड़ी बातें’
नया प्रस्तावित कानून एक बड़ा बदलाव लाने वाला है:
अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: अब कोई भी बीज (Except traditional varieties saved by farmers and varieties specially developed for export) बिना रजिस्ट्रेशन के नहीं बेचा जा सकेगा। यह किसानों को बीज की गुणवत्ता की गारंटी देगा।
कड़ी सज़ा: नकली या गैर-रजिस्टर्ड बीज (Fake or unregistered seeds) बेचने पर 3 साल तक की जेल और 30 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना हो सकता है। यह सजा पुराने कानून के मुकाबले कई गुना ज्यादा सख्त है।
सभी बीज शामिल: नया कानून सभी तरह के बीजों और रोपण सामग्री को अपने दायरे में लेगा, ताकि कोई छूट का फायदा न उठा सके।
गुणवत्ता पर फोकस: बीजों की प्योरिटी, अंकुरण क्षमता और स्वास्थ्य पर सख्त मानक तय होंगे।
नकली बीज: एक राष्ट्रीय संकट
कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर के मुताबिक, नकली बीज (Fake or unregistered seeds) की समस्या सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल (26,603 मामले), तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में है। पिछले तीन साल में राज्यों ने इसके खिलाफ 12,915 बार बिक्री रोकी, 1,914 एफआईआर दर्ज कीं और 12,287 चेतावनियां जारी कीं। यह आंकड़े बताते हैं कि ये समस्या कितनी व्यापक और गंभीर है।
क्यों जरूरी है यह नया कानून?
भारत का बीज बाजार (Seed Market) 40,000 करोड़ रुपये का है। हर साल 48-53 लाख टन बीज की जरूरत होती है। ऐसे बड़े बाजार में किसानों का भरोसा और सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। नया कानून किसानों को भरोसेमंद बीज देकर उनकी आमदनी बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और बीज अनुसंधान को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
अब समय आ गया है कि किसान की मेहनत की सुरक्षा के लिए कानून का हाथ मजबूत हो। ‘बीज विधेयक 2025’ (Seed Bill 2025) इसी दिशा में एक साहसिक और जरूरी कदम है। 11 दिसंबर तक इस मसौदे पर किसान और आम जनता अपने सुझाव दे सकती है, ताकि एक प्रभावी और व्यापक कानून बन सके। यह बदलाव भारतीय कृषि को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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