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Coffee सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि एक Global Sensationहै। ये सिर्फ सुबह की शुरुआत नहीं, बल्कि लाखों भारतीयों की रोज़ीरोटी और देश के एक्सपोर्ट का गौरव है। इंडियन कॉफी (Indian Coffee) आज अपनी अमिट छाप छोड़ रही है, और FY 2024-25 का रिकॉर्ड-तोड़ एक्सपोर्ट इसका जीता जागता उदाहरण है। 1.80 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 15,000 करोड़ रुपये) का निर्यात सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक गाथा है- hard work, quality and Global Acceptance की।
ग्लोबल मार्केट में धूम, एक्सपोर्ट में उछाल
वाणिज्य मंत्रालय (Ministry of Commerce) के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कॉफी (Indian Coffee) का एक्सपोर्ट पिछले साल (2023-24) के 1.28 अरब डॉलर की तुलना में लगभग 40.2 फीसदी बढ़कर 1.80 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। ये लगातार चौथा साल है जब भारत ने कॉफी निर्यात (coffee export) में अरब-डॉलर के आंकड़े को पार किया है। 2020-21 में यह निर्यात महज 719 मिलियन डॉलर था, जो चार साल में लगभग 150 प्रतिशत की शानदार छलांग का सबूत है। भारत अब दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक देश (India is the seventh largest coffee producing country in the world) बन चुका है।
भारत में कॉफी के टाइप: अरबिका और रोबस्टा का राज़
भारत में दो तरह की कॉफी की खेती होती है, जिनकी अपनी अलग पहचान और ख़ासियतें हैं:
अरबिका (Arabica)
ये अपनी मीठे, मुलायम और फलों जैसी सुगंध के लिए जानी जाती है। इसमें कैफीन की मात्रा कम होती है और इसका टेस्ट स्ट्रॉन्ग और Acidic होता है। ये दुनिया भर में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली किस्म है और भारत के कुल प्रोडक्शन का लगभग 49 फीसदी हिस्सा है। ये प्रीमियम कॉफी ब्रांड्स और एस्प्रेसो ब्लेंड्स (Premium Coffee Brands and Espresso Blends) का आधार है।
रोबस्टा (Robusta)
जैसा कि नाम से ही साफ है, ये किस्म मज़बूत और रोग-प्रतिरोधी (disease resistant) है। इसमें कैफीन की मात्रा अधिक होती है और इसका स्वाद मजबूत, गहरा और थोड़ा कड़वा (Strong, dark and slightly bitter) होता है। इसका इस्तेमाल अक्सर इंस्टेंट कॉफी और मजबूत फिल्टर कॉफी बनाने में किया जाता है। भारत के कुल उत्पादन में रोबस्टा का हिस्सा लगभग 51 फीसदी है।
इनके अलावा, भारत में इन दोनों किस्मों के कुछ दुर्लभ और जैविक (Rare and organic) प्रकार भी उगाए जाते हैं, जिनकी ग्लोबल मार्केट में अलग ही पहचान है।
कौन पी रहा है भारत की कॉफी?
भारतीय कॉफी की इंटरनेशनल मांग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश में उत्पादित लगभग 70-80 फीसदी कॉफी का निर्यात हो जाता है। भारतीय कॉफी (Indian coffee) मुख्य रूप से इटली, जर्मनी, रूस, बेल्जियम और मीडिल ईस्ट के देशों को Export की जाती है। इन देशों के करोड़ों कॉफी लवर्स अपने दिन की शुरुआत भारतीय कॉफी के कप से करते हैं।
भारत में पीने वालों का आंकड़ा
भारत में पारंपरिक रूप से चाय प्रधान (Tea staple) देश रहा है, लेकिन अब यहां Coffee culture तेज़ी से पैर पसार रहा है। माना जाता है कि भारत की लगभग 30-35 फीसदी शहरी आबादी (लगभग 15-18 करोड़ लोग) नियमित रूप से कॉफी का सेवन करती है। साउथ इंडिया के राज्यों जैसे कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में तो कॉफी डेली लाइफ का अहम हिस्सा है। युवा पीढ़ी में कैफे कल्चर के बढ़ने से ये संख्या लगातार बढ़ रही है।
कोरापुट और अराकू की कॉफी
कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के बाद अब ओडिशा का कोरापुट और आंध्र प्रदेश का अराकू क्षेत्र भारतीय कॉफी के मानचित्र (Map of Indian Coffee) पर एक ‘Specialty Coffee’ हब के रूप में उभरा है। इन क्षेत्रों की कॉफी अपने अनोखे फ्लेवर प्रोफाइल के लिए ग्लोबल पहचान बना रही है।
इस क्रांति में सबसे उल्लेखनीय भूमिका महिला किसानों की है। कोरापुट और अराकू की पहाड़ियों में women’s group अब सामूहिक रूप से कॉफी की खेती कर रही हैं, उसे प्रोसेस कर रही हैं और अपने ख़ुद के ब्रांड बनाकर बेच रही हैं। इसने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मज़बूत बनाया है, बल्कि पूरे समुदाय के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
‘ब्रू इन इंडिया, लव्ड बाय द वर्ल्ड’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ‘मन की बात’ में जिस ‘Brew in India, Loved by the World’ के मंत्र को दोहराया, वो साकार होता दिख रहा है। जैसे-जैसे दुनिया भर के Coffee Connoisseurs (experts) भारतीय कॉफी के अनोखे स्वादों की सराहना कर रहे हैं, वैसे-वैसे यह सफलता और भी समृद्ध होती जाएगी। भारत की कॉफी वाकई अब सिर्फ सुगंध नहीं, बल्कि सफलता की वो कहानी है जो दुनिया के हर कोने में पढ़ी और पी जा रही है।
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