लखनऊ का World Famous ‘Dussehri Mango’ दुनिया में मचाएगा धमाल! यूपी के किसानों के लिए ‘स्वर्णिम अवसर’, IndGAP सर्टिफिकेशन से खुलेगा Global Route

राज्य सरकार ने आम की खेती में क्रांति लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट (Ambitious pilot project) की शुरुआत की है, जिसका सेंटर प्लेस लखनऊ और उसकी वर्ल्ड फेमस 'दशहरी' (World Famous 'Dussehri') विरासत है।

लखनऊ का World Famous 'Dussehri Mango' दुनिया में मचाएगा धमाल! यूपी के किसानों के लिए 'स्वर्णिम अवसर', IndGAP सर्टिफिकेशन से खुलेगा Global Route

उत्तर प्रदेश, जो भारत के आम उत्पादन (Mango production ) में टॉप पर है, अब अपने इस Golden Fruit  की क्वालिटी और ग्लोबल पहुंच को एक नए आयाम पर ले जाने जा रहा है। राज्य सरकार ने आम की खेती में क्रांति लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट (Ambitious pilot project) की शुरुआत की है, जिसका सेंटर प्लेस लखनऊ और उसकी वर्ल्ड फेमस ‘दशहरी’ (World Famous ‘Dussehri’) विरासत है। ये केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के आम किसानों की तकदीर बदलने और ‘यूपी मेड’ आम (‘UP Made’ Mangoes) को ग्लोबल बेंचमार्क पर स्थापित करने का एक सुनियोजित अभियान है।

लखनऊ: दशहरी का Honeydew Source

लखनऊ की पहचान केवल उसकी नज़ाकत और तहज़ीब तक सीमित नहीं है। दुनिया भर में Mango Lovers के दिलों पर राज करने वाला ‘दशहरी आम’ (‘Dussehri Mango’) इस शहर की सबसे मीठी विरासत है। मलीहाबाद क्षेत्र लखनऊ के इस ‘सोने’ का गढ़ है। यहां की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु ने दशहरी को एक अनूठा स्वाद, सुगंध और बेहतरीन बनावट दिया की है। यही कारण है कि भारत के लगभग 80 फीसदी मैंगो लवर्स अलग-अलग किस्मों में दशहरी को ही प्रायोरिटी देते हैं।

ये आम न केवल अपने रसीलेपन के लिए, बल्कि इसके गूदे में मिठास और हल्के खट्टेपन का संतुलन बनाए रखने के लिए जाना जाता है। लखनऊ का दशहरी सिर्फ एक फल नहीं, एक ‘ब्रांड’ है, जिसे अब Global Level  पर और मजबूती से स्थापित किया जाएगा।

पायलट प्रोजेक्ट: एक सुनहरे भविष्य की नींव

इस ऐतिहासिक पहल को उद्यान विभाग द्वारा लखनऊ क्षेत्र से शुरू किया जाएगा और इसके लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय से स्वीकृति भी मिल चुकी है।  

गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेस (GAP) और IndGAP Certification- किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके तहत खेत स्तर पर ट्रेसेबिलिटी सिस्टम (Traceability System) लागू किया जाएगा, यानी ये ट्रैक करना संभव होगा कि कोई ख़ास आम किस खेत से आया है। इससे क्विलिटी और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिलेगी। साथ ही, फसल सुरक्षा प्रबंधन और पानी व खाद का संतुलित यूज (Crop protection management and balanced use of water and fertilizer) सिखाया जाएगा। IndGAP सर्टिफिकेशन मिलने का मतलब है कि उत्तर प्रदेश के आम अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरेंगे, जिससे निर्यात के रास्ते आसान होंगे।

मॉडल फार्म्स की स्थापना-
एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) और प्रगतिशील किसानों के खेतों को मॉडल फार्म के रूप में विकसित किया जाएगा। यहाँ अन्य किसान व्यावहारिक रूप से देख सकेंगे कि IndGAP पद्धतियाँ अपनाने से उत्पादन और गुणवत्ता पर क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

उत्तर प्रदेश के मैंगो प्रोडक्शन का डंका

उत्तर प्रदेश भारत के कुल आम उत्पादन का 25-26 फीसदी हिस्सा अकेले पैदा करता है, जो वार्षिक रूप से 45 लाख मीट्रिक टन से अधिक है। लखनऊ के अलावा, सहारनपुर जैसे क्षेत्र लंगड़ा, चौसा और सफेदा जैसी उत्कृष्ट किस्मों के लिए प्रसिद्ध हैं। ये डायवर्सिटी  और उत्पादन क्षमता ही राज्य की ताकत है।

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता 

उद्यान विभाग के अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा के अनुसार, लखनऊ में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे प्रदेश के दूसरे आम उत्पादक जिलों में भी लागू किया जाएगा। इसके तहत किसानों को exportable produce के लिए special incentives दिया जाएगा।

इस योजना के सफल होने से जहां एक ओर किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, वहीं दूसरी ओर ग्लोबल मार्केट में ‘उत्तर प्रदेश के आम’ की एक अलग और विश्वसनीय पहचान बनेगी। ये पहल लखनऊ के दशहरी की विरासत को संजोते हुए उसे  इंटरनेशनल मार्केट में एक प्रीमियम प्रोडक्ट्स के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।  

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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