भारत दूध उत्पादन (Milk production in India) में दुनिया का सिरमौर है। विश्व का हर चौथा गिलास दूध भारत से आता है। गाय के दूध में भी हम अव्वल। लेकिन एक चौंकाने वाला सच ये है कि हमारे यहां प्रति पशु दूध उत्पादन कम है और उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे पशुपालकों का मुनाफा सिकुड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है,आख़िर इस समस्या का हल क्या है?
वैज्ञानिक तरीके ही हैं समाधान
Dairy experts and the National Dairy Development Board (NDDB) का मानना है कि ये कोई बड़ी समस्या नहीं, बशर्ते पशुपालक पुराने तौर-तरीकों को बदलकर आधुनिक, वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाएं। ऐसा करने से न सिर्फ लागत घटेगी, बल्कि आमदनी भी दोगुनी हो सकती है।
NDDB के ये टिप्स हर पशुपालक के काम के हैं
1.सही चारा, सही समय: दुधारू पशु, बछिया और सूखे जानवरों को उनकी उम्र और ज़रूरत के हिसाब से अलग-अलग चारा देना चाहिए। एक ही तरह का चारा सभी को देना घाटे का सौदा है।
2.उन्नत नस्ल पर ध्यान: अच्छी आनुवंशिक गुणवत्ता वाले बैल का वीर्य प्रजनन (Breeding using semen from bulls with good genetic quality.) के लिए इस्तेमाल करें। बेहतर नस्ल से दूध उत्पादन अपने आप बढ़ेगा।
3.इलाज नहीं, रोकथाम ज़रूरी: पशुओं का समय पर vaccination और नियमित रूप से पेट के कीड़े मारने की दवा देना सबसे ज़रूरी है। यह छोटा खर्च बड़ी बीमारियों के भारी खर्च से बचाता है, पशु की उम्र बढ़ाता है और उत्पादन भी बढ़ाता रखता है।
4.बछड़ा पालन है सोना: एक स्वस्थ बछड़ा भविष्य का दुधारू पशु है। उसकी अच्छी देखभाल और पोषण पर ध्यान देना लंब वक्त तक मुनाफ़े की गारंटी है।
डिजिटल डेयरी: क्रांति का नया नाम
आज के दौर में डिजिटलीकरण भी लागत कम करने में बड़ा हथियार साबित हो रहा है। जैसे:
काऊ बैल्ट या सेंसर: गाय के गले में लगने वाली इस डिवाइस से पशु की सेहत, चरने के तरीके और गर्मी के चक्र का पता चलता रहता है। बीमारी का पता लगते ही इलाज शुरू हो जाता है, जिससे पशु के बीमार पड़ने और दूध उत्पादन घटने का खतरा टल जाता है।
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