नई दिल्ली में NICRA Review Workshop और ACASA–India लॉन्च कार्यक्रम का आयोजन

NICRA Review Workshop में 15 वर्षों की प्रगति की समीक्षा हुई और जलवायु सहनशील कृषि के लिए डेटा आधारित रोडमैप तैयार किया गया।

NICRA Review Workshop

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और Borlaug Institute for South Asia (BISA) के संयुक्त प्रयास से नई दिल्ली में NICRA Review Workshop और ACASA–India लॉन्च कम यूज़ केस वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने किया।

इस NICRA Review Workshop का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय नवाचार जलवायु-सहिष्णु कृषि कार्यक्रम (NICRA) के 15 वर्षों की उपलब्धियों की समीक्षा करना, भारत की जलवायु सहनशीलता में हुई प्रगति का आकलन करना और भविष्य के लिए एक डेटा आधारित रोडमैप तैयार करना था।

15 वर्षों की सीख और आगे की रणनीति

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि NICRA Review Workshop में पिछले 15 वर्षों के अनुभवों को एक साथ जोड़कर ये समझने की कोशिश की गई कि भारत ने जलवायु बदलाव के बीच खेती को किस तरह मज़बूत बनाए रखा है।

इस वर्कशॉप का फोकस इस बात पर था कि विज्ञान, नीति, तकनीक और निवेश को एक साथ जोड़कर जलवायु-सहिष्णु agri-food system को और बेहतर कैसे बनाया जाए। विशेषज्ञों ने माना कि अब समय आ गया है कि अलग-अलग योजनाओं और आंकड़ों को जोड़कर एक राष्ट्रीय स्तर का climate action platform तैयार किया जाए।

बसंत पंचमी पर ज्ञान और नवाचार का संदेश

डॉ. जाट ने अपने संबोधन में कहा कि बसंत पंचमी ज्ञान और नवचेतना का प्रतीक है, इसलिए ये दिन भारत की जलवायु सहनशीलता की यात्रा पर विचार करने और नए knowledge platforms लॉन्च करने के लिए उपयुक्त है।

उन्होंने बताया कि इस अवसर पर Akasha Atlas और NICRA portals जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किए गए। डॉ. जाट ने कहा कि 15 साल पूरे कर चुका NICRA अब एक ऐसे मोड़ पर है, जहां उसे स्पष्ट दिशा और लंबी अवधि की सोच की ज़रूरत है। यही कारण है कि NICRA Review Workshop को बहुत अहम माना जा रहा है।

नई दिल्ली में NICRA Review Workshop और ACASA–India लॉन्च कार्यक्रम का आयोजन

जलवायु दबाव के बावजूद खेती में मज़बूती

डॉ. जाट ने कहा कि बार-बार आने वाले सूखे, बाढ़ और मौसम की अनिश्चितता के बावजूद भारत की खेती, ख़ासकर rainfed क्षेत्रों में, काफ़ी हद तक मज़बूत बनी रही है।

उन्होंने बताया कि जलवायु-सहिष्णु तकनीकों, सही नीतियों और संस्थागत तालमेल की वजह से उत्पादन में भी सुधार हुआ है। डॉ. जाट के अनुसार, NICRA Review Workshop इस बात का प्रमाण है कि भारत ने विज्ञान आधारित समाधानों को ज़मीन पर उतारने में सफलता पाई है।

विज्ञान, नीति और तकनीक का संयुक्त मॉडल

डॉ. जाट ने ज़ोर देकर कहा कि भारत की जलवायु सहनशीलता किसी एक योजना की देन नहीं है, बल्कि ये विज्ञान, नीति समर्थन, तकनीकी नवाचार, सेफ्टी नेट, मानव संसाधन और बेहतर क्रियान्वयन का संयुक्त परिणाम है।

उन्होंने NICRA, प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना और पशुपालन व मत्स्य मिशनों का उदाहरण देते हुए बताया कि इन सभी पहलों ने मिलकर किसानों की अनुकूलन क्षमता और आजीविका को मज़बूत किया है। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए NICRA Review Workshop में दीर्घकालिक रणनीति पर चर्चा हुई।

ACASA–India डिजिटल प्लेटफॉर्म का लॉन्च

इस मौके पर डॉ. जाट ने Atlas of Climate Adaptation in Indian Agriculture यानी ACASA–India को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। ये एक web-enabled digital platform है, जिसे ICAR के नेतृत्व वाले NARES और BISA–CIMMYT के सहयोग से विकसित किया गया है।

इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों के लिए location-specific और data-driven adaptation planning को आसान बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, NICRA Review Workshop और ACASA–India दोनों मिलकर किसानों और नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी साबित होंगे।

नई दिल्ली में NICRA Review Workshop और ACASA–India लॉन्च कार्यक्रम का आयोजन

वैश्विक स्तर पर भारत का अनुभव

डॉ. जाट ने कहा कि जलवायु तनाव के बीच agri-food system को सुरक्षित रखने में भारत का अनुभव दुनिया के लिए एक मज़बूत उदाहरण है।

उन्होंने बताया कि NICRA को एक global model के रूप में भी देखा जा सकता है, क्योंकि इसमें विज्ञान आधारित और नीति से जुड़े समाधान शामिल हैं। NICRA Review Workshop में इसी बात पर ज़ोर दिया गया कि भारत के अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा किया जाना चाहिए।

अन्य विशेषज्ञों के विचार

कार्यक्रम में मौजूद डॉ. राजबीर सिंह, उप-महानिदेशक (कृषि विस्तार), ICAR ने कहा कि ये वर्कशॉप बड़े पैमाने पर विज्ञान को लागू करने और climate action के लिए holistic approach अपनाने का अहम मंच है।

उन्होंने future climate action और निवेश के लिए मज़बूत और भरोसेमंद carbon credit methodologies को प्राथमिकता देने की ज़रूरत बताई।

वहीं डॉ. ए. के. नायक, उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), ICAR ने कहा कि NICRA Review Workshop वैश्विक कृषि समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये विज्ञान, डेटा और व्यावहारिक अनुभवों को एक साथ लाता है।

देशभर में 200 से अधिक स्थानों पर NICRA का असर

वर्कशॉप के दौरान ये भी बताया गया कि NICRA देश के 151 अत्यधिक जलवायु-संवेदनशील जिलों में 200 से अधिक स्थानों पर लागू किया जा रहा है।

प्रतिभागियों ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में NICRA की भूमिका और मज़बूत करनी होगी। इसी उद्देश्य से NICRA Review Workshop में इसकी प्रगति की गहराई से समीक्षा की गई।

नीति, निवेश और डेटा का एकीकृत प्लेटफॉर्म

डॉ. जाट ने आगे कहा कि अब ज़रूरत है कि डेटा, सीख और निवेश को जोड़कर एक unified national climate action platform तैयार किया जाए।

उन्होंने whole-of-government और whole-of-society approach की बात करते हुए एक centralized data ecosystem बनाने पर ज़ोर दिया। NICRA Review Workshop में इस दिशा में ठोस सुझाव सामने आए।

निष्कर्ष

NICRA Review Workshop भारत की जलवायु-सहिष्णु कृषि यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है।

इस वर्कशॉप ने न सिर्फ 15 वर्षों की उपलब्धियों की समीक्षा की, बल्कि भविष्य के लिए एक स्पष्ट और डेटा आधारित रोडमैप भी सुझाया। ACASA–India जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लॉन्च से ये उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में किसान, वैज्ञानिक और नीति निर्माता मिलकर जलवायु चुनौतियों का बेहतर समाधान निकाल सकेंगे।

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