Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana: 1 रुपये का क्लेम पाकर सदमे में किसान, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सख्त कार्रवाई की घोषणा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) के तहत फसल नुकसान (natural disaster) के बाद बीमा क्लेम के रूप में सिर्फ 1 रुपया, 3 रुपये, 5 रुपये और 21 रुपये मिले हैं।

Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana: 1 रुपये का क्लेम पाकर सदमे में किसान, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सख्त कार्रवाई की घोषणा

देश के करोड़ों किसानों के लिए बनी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) अब उनके लिए मजाक बनकर रह गई है। जी हां, ये एक कड़वी हकीकत है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश (Maharashtra and Madhya Pradesh) के सैकड़ों किसानों को फसल नुकसान (natural disaster) के बाद बीमा क्लेम के रूप में सिर्फ 1 रुपया, 3 रुपये, 5 रुपये और 21 रुपये मिले हैं। ये सुनकर विश्वास नहीं होता है लेकिन ये सच है। किसानों के साथ हो रहे इस अन्याय और योजना में विसंगतियों (Irregularity) पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan) ने सख़्त कार्रवाई का ऐलान करते हुए उच्चस्तरीय जांच (high-level investigation) के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

मामला मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले और महाराष्ट्र के अकोला ज़िले का है। सीहोर के कुछ किसानों ने फसल बीमा कराया, लेकिन प्राकृतिक आपदा (natural disaster) से नुकसान होने पर उन्हें बीमा कंपनी ने ‘जीरो लॉस’ बताया। यानी, उन्हें एक भी रुपये का क्लेम नहीं मिलना चाहिए था। लेकिन, हैरानी की बात ये है कि उनके बैंक खातों में 1 रुपया जमा हुआ। एक दूसरे किसान का नुकसान 0.004806 फीसदी बताया गया और क्लेम के रूप में उसे भी सिर्फ 1 रुपया मिला। महाराष्ट्र के किसानों की हालत और भी बदतर है, जहां कुछ को 5 रुपये तो कुछ को 21 रुपये का भुगतान हुआ है।

केंद्रीय मंत्री ने ली बैठक

इन गंभीर शिकायतों से परेशान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के बाद दिल्ली पहुंचकर कृषि भवन में एक हाई लेवल कमिटी बैठक बुलाई। इस मीटिंग में PMFBY के सभी वरिष्ठ अधिकारियों और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। सबसे ख़ास बात ये रही कि कृषि मंत्री ने सीधे महाराष्ट्र के प्रभावित किसानों को वर्चुअली बैठक से जोड़कर उनकी समस्याएं सुनीं।

‘ये मजाक मैं नहीं चलने दूंगा’ : शिवराज सिंह चौहान

बैठक के दौरान कृषि मंत्री चौहान का रुख काफी सख्त रहा। उन्होंने कहा, “1 रु., 3 रु., 5 रु. का क्लेम मिलना किसानों के साथ मजाक है। ये मजाक मैं नहीं चलने दूंगा।  

क्या हैं मुख्य समस्याएं ?

बैठक में जो मुख्य मुद्दे उभरकर सामने आए और जिन पर फौरन कार्रवाई के निर्देश दिए गए, वे इस तरह हैं- 

1.क्षति आकलन में गड़बड़ी: फसल नुकसान का आकलन करने पर सवाल उठे। कृषि मंत्री ने कहा कि रिमोट सेंसिंग तकनीक की प्रामाणिकता की वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए।

2.क्लेम भुगतान में गड़बड़ी: पता चला कि किसान एक से ज्यादा खेतों के लिए अलग-अलग आवेदन देते हैं। पहले चरण में मिलने वाली छोटी राशि और बाद में एडजस्टमेंट के चलते ऐसी कंडीशन पैदा होती है। मंत्री ने कहा कि इस गड़बड़ी को दूर कर किसानों को क्लेम की पूरी राशि एक साथ और तुरंत मिलनी चाहिए।

3.राज्यों की लापरवाही: कई राज्य सरकारें किसानों की सब्सिडी का अपना हिस्सा वक्त पर जमा नहीं करातीं, जिससे क्लेम भुगतान रुक जाता है। कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि ऐसे राज्यों से 12 फीसदी ब्याज वसूला जाए और उनसे तालमेल बनाया जाए ताकि केंद्र सरकार बदनाम न हो।

4.बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी: नुकसान के सर्वेक्षण के दौरान बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ensure करने के निर्देश दिए गए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

अब उच्चस्तरीय जांच के आदेश 

केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर PMFYA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की अगुवाई में जांच शुरू की जाएगी। ये जांच टीम मैदानी स्तर पर जाकर ये पता लगाएगी कि आखिर 1 रुपये जैसे मामूली क्लेम क्यों और कैसे मंजूर हुए। साथ ही, योजना के दिशा-निर्देशों में ज़रूरी बदलाव करके इन विसंगतियों को जड़ से खत्म करने का प्रयास किया जाएगा।

 

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