पंजाब सरकार (Punjab Government) ने किसानों और गरीबों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। इन फैसलों से जहां सैकड़ों ऐसे किसानों को राहत मिलेगी, जिनकी फसलें बाढ़ में (Punjab farmers will get compensation for crop loss ) बर्बाद हो गई थीं। सबसे बड़ी ख़बर उन किसानों से जुड़ी है, जिनके पास अपनी ज़मीन नहीं है, लेकिन फिर भी वे सरकारी ज़मीन पर खेती करके देश का पेट भर रहे हैं। आइए, इन फैसलों को विस्तार से और आसान भाषा में समझते हैं।
क्या है ये ‘ऐतिहासिक’ फैसला?
दरअसल, पंजाब सरकार ने सरकारी ज़मीन (जिसे कच्ची ज़मीन या शामलात भूमि कहा जाता है) पर खेती करने वाले किसानों को बाढ़ मुआवजा देने की मंज़ूरी (Approval to give flood compensation to farmers) दी है । आपको बता दें कि पिछले साल अगस्त-सितंबर में आई भीषण बाढ़ ने पंजाब के कई इलाकों में किसानों की फसलें तबाह कर दी थीं। अमृतसर, फतेहगढ़ साहिब और फाजिल्का में हजारों एकड़ जमीन पर खड़ी फसलें पानी में डूब गईं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अमृतसर में 2,800 एकड़, फतेहगढ़ साहिब में 5,200 एकड़ और फाजिल्का में 3,000 एकड़ सरकारी जमीन पर किसान खेती कर रहे थे । ये ज़मीन 1976 से सरकार के नाम है, लेकिन किसान पीढ़ियों से इस पर खेती करते आ रहे हैं।
50 सालों से लंबित था मसला
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा (Punjab Finance Minister Harpal Cheema) ने बताया कि 2015 में राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव करके इस ज़मीन को आधिकारिक तौर पर सरकारी ज़मीन घोषित कर दिया गया । इसके बाद से इन किसानों की मुश्किलें बढ़ गईं। जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती, तो उन्हें मुआवजे के दायरे से बाहर रखा जाता था। विधायक जगदीप कंबोज गोल्डी ने कहा कि border areas के इन किसानों को सिर्फ इसलिए मुआवजा नहीं मिल पाता था, क्योंकि उनके पास अपनी ज़मीन नहीं थी ।
लेकिन अब सरकार ने किसानों को राहत देने का फैसला लिया है। वित्त मंत्री हरपाल चीमा का कहना है कि एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते सैकड़ों किसानों को मुआवजा देना सरकार की जिम्मेदारी है, जिन्होंने बाढ़ में भारी नुकसान झेला है ।
कैसे होगा मुआवज़े का वितरण?
सरकार ने मुआवजे के वितरण को लेकर पूरी पारदर्शिता बरती है। बाढ़ प्रभावित सभी गांवों में तीन सदस्यीय समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों में संबंधित राजस्व अधिकारी (पटवारी), गांव के मुखिया (लांबरदार) और सरपंच (या उनका प्रतिनिधि) शामिल होंगे । ये समितियां नुकसान का आकलन करेंगी और असली किसानों की पहचान करक ये देखेंगी कि मुआवज़ा सही लोगों तक पहुंचे। इस फैसले से बॉर्डर पट्टी के हजारों किसान परिवारों को राहत मिलेगी और उनका विश्वास सरकार में मजबूत होगा।
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