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नई दिल्ली के ऐतिहासिक सुंदर नर्सरी में इन दिनों भारत की विविधता, संस्कृति और स्वाद का एक अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है — सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 के रूप में। यह महोत्सव 9 दिसंबर 2025 तक चलेगा और देश के 25 राज्यों से आई 300 से अधिक लखपति दीदियों व स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाएं इसमें हिस्सा ले रही हैं।
इस फेस्टिवल का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सिर्फ़ व्यंजनों का उत्सव नहीं है, बल्कि भारत की मिट्टी, मेहनत और मातृत्व का उत्सव है। उन्होंने कहा, “हमारे देश की संस्कृति हमारे भोजन में बसती है — यह स्वाद नहीं, हमारी परंपरा की कहानी है।”
महिलाओं के हुनर से आत्मनिर्भरता की मिसाल
सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 का सबसे बड़ा आकर्षण हैं वे लखपति दीदियां, जिन्होंने अपने हुनर से न केवल स्वाद का संसार बदला है बल्कि आत्मनिर्भरता का मार्ग भी प्रशस्त किया है। देशभर के ग्रामीण इलाकों से आई ये महिलाएं, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत तैयार की गईं हैं।
इन महिलाओं ने अपने स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और कला को एक मंच पर लाकर साबित किया है कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का असली आधार नारी शक्ति ही है।
मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा — “नारी तू नारायणी”, और इन बहनों ने अपने कर्म, आत्मविश्वास और मेहनत से इसे साकार किया है। उन्होंने बताया कि सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 जैसे आयोजन महिलाओं को न केवल रोज़गार, बल्कि सम्मान और पहचान भी दे रहे हैं।
भारत के हर राज्य का स्वाद, एक ही छत के नीचे
फेस्टिवल में कुल 62 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां भारत के हर राज्य की खुशबू और स्वाद एक साथ मिलते हैं। 50 स्टॉल्स पर लाइव फूड का आनंद और 12 स्टॉल्स पर ऑर्गेनिक व नेचुरल फूड उत्पाद उपलब्ध हैं। यहां आने वाले लोग सुबह 11:30 बजे से रात 9:30 बजे तक देश के हर हिस्से का स्वाद चख सकते हैं।
सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 में शामिल कुछ लोकप्रिय व्यंजन हैं:
- बिहार की लिट्टी-चोखा
- पंजाब का सरसों का साग और मक्के की रोटी
- राजस्थान की दाल-बाटी चूरमा, प्याज कचौरी और मिर्ची वड़ा
- केरल की मालाबार बिरयानी
- बंगाल की हिलसा फिश करी
- उत्तराखंड का तंदूरी चाय और जम्मू-कश्मीर का मशहूर कलाड़ी कुल्चा
- तेलंगाना का चिकन, असम की फिश करी और गोवा का झींगा करी
यह फेस्टिवल न केवल स्वाद का अनुभव कराता है, बल्कि लोगों को भारत की सांस्कृतिक विविधता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक खानपान से भी जोड़ता है।
सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025: महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण
यह आयोजन ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक सशक्त मंच बन चुका है। सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 का उद्देश्य केवल भारतीय खाद्य संस्कृति को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि फेस्टिवल में शामिल महिलाएं पारंपरिक व्यंजनों में निपुण हैं और साथ ही वे ग्रामीण उत्पादों के विपणन में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ के प्रधानमंत्री अभियान से भी जुड़ी हुई है, जिसके माध्यम से भारत के स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
स्वाद के साथ विकास की कहानी
सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 में हर व्यंजन एक कहानी कहता है — मिट्टी की, मेहनत की और मां की सीख की। यहां आने वाला हर आगंतुक सिर्फ़ स्वाद नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आत्मा से जुड़ता है। फेस्टिवल का आयोजन दिल्ली के भारत स्काउट्स एंड गाइड्स मार्ग स्थित सुंदर नर्सरी में किया गया है, जो ऐतिहासिक हुमायूं के मकबरे के पास है। यह आयोजन राजधानी के नागरिकों को भारत की असली आत्मा से रूबरू कराने का एक सुंदर अवसर प्रदान कर रहा है।
मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, “यह फेस्टिवल ग्रामीण आजीविका मिशन की सफलता और महिला नेतृत्व की ताकत का प्रतीक है, जो आने वाले समय में देश के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को और मज़बूती देगा।”
निष्कर्ष
सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 केवल एक भोजन उत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के उस विचार का प्रतीक है, जहां ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर से देश के विकास में भागीदार बन रही हैं। यह फेस्टिवल हमें याद दिलाता है कि असली भारत गांवों में बसता है — और वही भारत अब अपने स्वाद, संस्कृति और आत्मविश्वास के साथ राजधानी में दमक रहा है।
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