किसी भी बिज़नेस या काम में रिकॉर्ड रखना बहुत ज़रूरी होता है। डेयरी उद्योग (Dairy farming, Dairy industry, Milk Production) में भी ये महत्वपूर्ण है। डेटा को अगर लिखित रूप में या कंप्यूटर पर सेव करके रखा जाए तो इससे भविष्य में योजना बनाने में मदद मिलती है। डेटा का मतलब है कि डेयरी में मौजूद पशुओं को पहचान संख्या देना, उनकी नस्ल, प्रजनन की तारीख, उत्पादकता आदि का रिकॉर्ड रखना।
डेयरी फ़ार्म का रिकॉर्ड रखना है ज़रूरी
किसानों को डेटा रिकॉर्ड करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि वो अपने पशुओं का सही से रिकॉर्ड रख सकें। सरकारी निकाय में पुशओं के बीमा के लिए, पशुओं की खरीद पर सब्सिडी के लिए और दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों के लिए डेटा की रिकॉर्डिंग ज़रूरी बना दी गई है। ये काम थोड़ा चुनौतीपूर्ण है और इसे मैन्युअल रूप से या कंप्यूटर पर किया जा सकता है।
किसानों को जो भी तरीका सही लगे, उसका इस्तेमाल रिकॉर्ड रखने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, कंप्यूटर का इस्तेमाल फ़ायदेमंद होता है क्योंकि इससे रिपोर्ट और ग्राफ तैयार करने, विश्लेषण, लागत-लाभ विश्लेषण, संतुलित पशु आहार तैयार करने में मदद मिलती है।

सफल डेयरी फ़ार्म के लिए ज़रूरी रिकॉर्ड
- पहचान संख्या (जन्म/खरीदने की तारीख), सायर (सांड) संख्या (डेम) गाय (संख्या) बछड़ा और उसका लिंग (ब्याने की तारीख), दूध उत्पादन का रिकॉर्ड, बिक्री/निलाम/मृत्यु की तारीख।
- बछड़े का रिकॉर्ड (बछड़ा संख्या), जन्म तिथि, बछड़े का लिंग (सायर संख्या), डेम संख्या, जन्म के समय वज़न, नियमित अंतराल पर वज़न आदि।
- हर पशु के दैनिक दूध उत्पादन का रिकॉर्ड।
- पशु को रोज़ाना दी जाने वाली आहार की मात्रा (सूखा चारा), हरा चारा आदि का रिकॉर्ड रखना।
- बीमार पशुओं के स्वास्थ्य का रिकॉर्ड, रोग के लक्षण, निदान, उपचार और इलाज करने वाले पशु चिकित्सक का नाम।
- प्रजनन से जुड़ी तारीख जैसे पशु संख्या (ब्याने की तारीख), हीट (मद) में आने की तारीख
- डेयरी उपकरणों का रिकॉर्ड।
- कर्मचारियों और वाहन आदि का रिकॉर्ड।

डेयरी फ़ार्म रिकॉर्ड रखने के फ़ायदे
- डेयरी फ़ार्म की कुशलता और उत्पादकता में सुधार के लिए कई फैसले लेने होते हैं, इन रिकॉर्ड के आधार पर किसान सही फैसला कर पाते हैं।
- रिकॉर्ड की मदद से आप अच्छा प्रदर्शन करने वाली गायों के बारे में जान सकते हैं।
- अंतः प्रजनन को रोकने के लिए बेहतर प्रजनन योजना तैयार करना।
- सांडों का लगातार परीक्षण।
- आहार लागत निवेश आदि के आधार पर लागत और लाभ का विश्लेषण।
- हर पशु की पोषण ज़रूरत की निगरानी।
- हर पशु के स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण की निगरानी करना।
- बछड़ों के टीकाकरण की निगरानी।

छोटे किसानों के लिए फ़ायदेमंद है क्लाउड कंप्यूटिंग तकनीक
इस तकनीक में क्लाउड पर सर्वर को स्मार्ट फोन/मोबाइल के ज़रिए आसानी से एक्सेस किया जा सकता है। ये तकनीक अब देश के दूरदराज के इलाकों में भी उपलब्ध है। पशु प्रबंधन के लिए कंपनियों ने क्लाउडर कंप्यूटिंग पर आधारिक कई सॉफ्टवेयर भी बनाए हैं जिनमें से अधिकांश के इस्तेमाल के लिए फ़ीस देनी होती है, फ़्री वाले सॉफ्टवेयर भी हैं, मगर उसमें सीमित सुविधाएं हैं।
निजी कंपनियां भी किसानों के लिए पशु डेटा रिकॉर्डिंग ट्रैकिंग और विश्लेषण के लिए कमर्शियली उपलब्ध क्लाउड कंप्यूटिंग आधारित सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराती है। किसान पशु प्रबंधन के ज़्यादतर पहलुओं के लिए इस तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सकते हैं। छोटे किसान बिना ज़्यादा लागत के सिर्फ़ ऐसे सॉफ्टवेयर की मेंबरशिप लेकर पशुओं की संख्या के आधार पर डेटा रिकॉर्डिंग, विश्लेषण और सलाह ले सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हर डेयरी किसान को किसी भी उपयुक्त विधि का इस्तेमाल कर अपने पशुओं का विश्वसनीय रिकॉर्ड रखना चाहिए। इससे डेयरी फ़ार्मिंग में सुधार को लेकर मदद मिलती है।
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