एग्रीबॉट्स एक तरह के कृषि रोबोट हैं। भारत में बहुत से ऐसे एग्रीबॉट्स हैं जो अच्छी तरह से काम कर रहे हैं और किसानों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। किसान इन रोबोट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं और अच्छी आय कर पा रहे हैं। लेकिन यहां हम एक बेहद खास ‘एग्रीबॉट’ के बारे में बात करेंगे। इसकी ख़ासियत ये है कि ये एक कृषि रोबोट है, जिसका नाम ‘एग्रीबॉट’ है। ये खेती में मदद करने के लिए सरकार द्वारा अनुमोदित भारत का पहला कृषि ड्रोन है। इस एग्रीबॉट को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से मंजूरी मिली है। ये भारत में एकमात्र कानूनी रूप से अनुपालन करने वाला ड्रोन है, जिसका उपयोग कृषि पद्धतियों में किया जाता है। ये विशेष रूप से छिड़काव, फसल निगरानी और प्रसारण जैसे कामों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
डीजीसीए द्वारा अनुमोदित होने का क्या मतलब है?
DGCA भारत सरकार का एक वैधानिक निकाय है, जो भारत में नागरिक उड्डयन को विनियमित करने के लिए ज़िम्मेदार है। जहां तक ड्रोन पर विचार किया जाता है, कृषि ड्रोन के लिए प्राधिकरण के कुछ दिशानिर्देश और बेंचमार्क हैं। IoTechWorld द्वारा बनाया गया ये एग्रीबॉट डीजीसीए द्वारा स्वीकृत है। IoTechWorld एग्रीबॉट किसी भी अन्य कंपनी के ड्रोन से अलग है क्योंकि ये ड्रोन सरकार द्वारा स्वीकृत है, कोई अन्य ड्रोन स्वीकृत नहीं है और कानूनी रूप से बाज़ार में नहीं बेचा जा सकता है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) और नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) द्वारा सशर्त छूट मार्ग के माध्यम से ड्रोन संचालन की अनुमति दी जा रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भारत में ड्रोन के उपयोग और संचालन को विनियमित करने के लिए 25 अगस्त 2021 को ‘ड्रोन नियम 2021’ प्रकाशित किया है।
कृषि ड्रोन ‘एग्रीबॉट’ की विनिर्देश
• इसे ड्रोन निर्माण कंपनी IoTechWorld द्वारा डिज़ाइन किया गया है और बनाया गया है।
• इसकी संरचना एक हेक्साकॉप्टर की है।
• प्रति घंटे 8 एकड़ भूमि तक छिड़काव क्षमता।
• बैटरी उड़ने का समय – पेलोड के साथ 20 मिनट, बिना पेलोड के 25 मिनट।
• अधिकतम पेलोड वहन क्षमता 10 किलोग्राम है।
• टैंक की मात्रा – 10 लीटर।
• 20 मिनट में 1 हेक्टेयर भूमि पर छिड़काव कर सकता है।

कृषि ड्रोन ‘एग्रीबॉट’ की विशेषताएं
• ‘एग्रीबॉट’ का कार्य चरणों में होता है।
• छिड़काव करने के लिए तरल भरने से लेकर खेतों में छिड़काव करने और वापस जमीन पर आने तक, सब कुछ योजनाबद्ध तरीक़े से किया जाता है।
• इसमें एक इंटेलिजेंट मिशन प्लानिंग सिस्टम है।
• क्षेत्र के आकार और आवश्यकता के अनुसार इसका रास्ता तय किया जाता है।
• जरूरत के हिसाब से भरे जाने वाले पेलोड की मात्रा भी तय कर सकते हैं।
• एग्रीबॉट में खेत का आकार भी फीड किया जाता है।
• रोबोट में क्षेत्र के ओवरलैपिंग, आकार, ऊंचाई और चौड़ाई आदि की जानकारी का चयन किया जा सकता है।
• जियो फेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है जिसका मतलब है कि एग्रीबॉट सिर्फ़ उसी खेत पर छिड़काव करेगा जिसकी जानकारी उसको दी गई है, या उसमें फ़ीड की गई है। किसी दूसरे खेत की फसल पर छिड़काव नहीं करेगा
• ‘एग्रीबोट’ में रडार प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। रडार इलाके का पता लगाता है, रोबोट को उसकी ऊंचाई के अनुसार रुकने, काम करने और उस ऊँचाई को बनाए रखने में मदद करता है।
• रोबोट में जो भी डेटा फीड किया जाता है या निर्देश दिया जाता है, वे उसका पालन करते हैं।
• रास्ते में रोबोट के टकराव की पूरी आशंका होती है।’एग्रीबॉट’ में ये सुविधा होती है कि वो आस-पास के माहौल को भाँप जाए और किसी भी चीज़ से टकराए नहीं।
• ये 22 मीटर दूर से पेड़, खंभे, तार जैसी चीज़ों का पता लगा सकता है और उसके अनुसार ख़ुद ही अपना रास्ता बदल सकता है।
• जब खेत में छिड़काव करने की बात आती है तो ‘एग्रीबॉट’ बहुत सटीक होता है।
• ये पूरी फसल को जमीन तक ढक देता है।
• ये 90% समय, 90% पानी बचा सकता है और स्वास्थ्य के लिए 100% लाभदायक है।
• स्वास्थ्य संबंधी खतरों को दूर करता है क्योंकि किसान स्प्रे क्षेत्र से हमेशा दूर रहते हैं।
• लैंडिंग सटीकता – 30 सेंटीमीटर के अंदर।

कृषि ड्रोन ‘एग्रीबॉट’ के उपयोग
• इसका उपयोग कीटनाशकों, कवकनाशी, शाकनाशी आदि के छिड़काव में किया जाता है।
• ये बीज, दाने, उर्वरक आदि के प्रसारण में भी उपयोगी है।
• फसल स्वास्थ्य विश्लेषण के लिए मल्टीस्पेक्ट्रल सेंसर माउंटिंग है।
• 1 एकड़ फसल क्षेत्र में 6-7 मिनट में छिड़काव करने के लिए केवल 8 लीटर से 10 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
• प्रतिदिन 25-30 एकड़ तक छिड़काव कर सकता है।
इसके अलावा-
फसल सुरक्षा उत्पाद का छिड़काव
उर्वरक का वितरण
परागण सेवाएं
एक्वाकल्चर को खिलाना
सार्वजनिक स्वास्थ्य – मच्छर नियंत्रण
महामारी का प्रकोप – टिड्डी नियंत्रण
कृषि भूमि का डिजिटल भू-मानचित्रण
कृषि ड्रोन ‘एग्रीबॉट’ की कीमत
इस तरह के रोबोट की कीमत एक ज़रूरी मुद्दा है। हालांकि एकमुश्त निवेश नीति के साथ ये क़ीमत सही लगती है, लेकिन ये एकमुश्त निवेश भी चिंता का विषय है। ‘एग्रीबॉट’ ड्रोन की कीमत 6.78 लाख+जीएसटी है। ये एक बड़ी राशि लगती है, इसलिए सरकारी सब्सिडी लागत और निवेश में कटौती, एक तरीका हो सकता है। समय और इस्तेमाल के पैमानों पर आंकने के बाद ही किसान इसे निवेश के लायक पाते हैं।
सरकार भी कृषि में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। किसानों और अन्य कृषि संस्थानों को आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। कृषि मंत्रालय तो कृषि ड्रोन की लागत का 100% या 10 लाख रुपये तक देने को तैयार है, इनमें से जो भी कम हो। किसानों के खेतों पर इस तकनीक के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने के लिए फार्म मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थानों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा ड्रोन की खरीद के लिए अनुदान देने को तैयार है। किसानों की सहकारी समिति, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और ग्रामीण उद्यमियों द्वारा ड्रोन को खरीदने के लिए वित्तीय सहायता लेने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर बनाए जाएंगे। साथ ही, सब्सिडी की मदद से ड्रोन, आम आदमी की पहुँच में आ सकेगा।
अगर आप चाहते हैं तो इसे पूरे सहयोग के साथ प्राप्त करें
IoTechWorld न केवल इन एग्रीबॉट्स को डिज़ाइन करता है और बनाता है, बल्कि इससे जुड़ी ट्रेनिंग भी देता है। 7 दिनों की ट्रेनिंग और फिर सर्टिफिकेट भी मिलता है। वेबसाइट पर ट्यूटोरियल हैं जो आपके सभी सवालों के जवाब देंगे। अगर आप इस एग्रीबॉट को खरीदते हैं, तो आपको डीलरों और सर्विस सेंटरों की मदद से पूरे भारत में सर्विस और मेंटेनेंस सपोर्ट मिलता है। IoTechWorld किसी भी निर्माण दोष के लिए उत्पाद वारंटी भी देता है। इसके अलावा आजीवन मुफ्त ऑनलाइन सहायता भी देते हैं। ये एग्रीबॉट सरकारी ई-मार्केटिंग पोर्टल ‘जीईएम’ पर भी मिल सकता है। ये भारत का एकमात्र कृषि-ड्रोन है जिसके लिए आपको पूरा बीमा भी मिलता है।

ये भी पढ़ें: ड्रोन खरीदने पर कृषि संस्थानों को मिलेंगे 10 लाख रुपये, Agri-Drone को किराये पर देने वाले भी पाएँगे सब्सिडी
कृषि ड्रोन ‘एग्रीबॉट’ के लाभ
एग्रीबोट ड्रोन विशेष रूप से भारत के किसानों के लिए बनाया गया है। इसके कुछ लाभ नीचे दिए गए हैं :
• ड्रोन से किया गया छिड़काव किसान के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इससे 200 से 220 माइक्रोन के आसपास की बारीक छोटी बूंद निकलती है। प्रोपेलर के उच्च दबाव की मदद से ये छोटी बूंद, फसल के लगभग हर हिस्से तक और यहां तक कि पत्तियों के नीचे भी पहुंच जाती है जो कि पारंपरिक तरीके से संभव नहीं है।
• फसलों पर छिड़काव ठीक से किया जाए जो पूरे पौधे को कवर करता है, तो ये उपज में 20% तक की वृद्धि करता है।
• आमतौर पर पारंपरिक तरीके से 1 एकड़ में स्प्रे करने के लिए 150-200 लीटर पानी की ज़रूरत होती है जबकि ड्रोन से ये केवल 10 लीटर पानी में किया जा सकता है।
• 1 एकड़ खेत पर एग्रीबॉट का इस्तेमाल करके 6-7 मिनट में छिड़काव किया जा सकता है, जबकि उसी खेत के टुकड़े पर पारंपरिक तरीके से छिड़काव करने में लगभग 3-4 घंटे लग सकते हैं।
• छिड़काव के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रसायन और कीटनाशक का संपर्क सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। ड्रोन की मदद से छिड़काव करने से किसान इन रसायनों से दूर रहते हैं, इसलिए ये स्वास्थ्य के लिए 100% फ़ायदेमंद है।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- India-US Trade Deal पर किसानों की चिंता के बीच PM Modi बोले- FTA में किसानों को नहीं होने देंगे कोई नुक़सानभारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित Trade Deal को लेकर देश में बहस तेज हो गई है। एक तरफ केंद्र सरकार का कहना है कि किसी भी Free Trade Agreement यानी FTA में भारत के किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, किसान संगठनों को डर है कि अगर अमेरिकी… Read more: India-US Trade Deal पर किसानों की चिंता के बीच PM Modi बोले- FTA में किसानों को नहीं होने देंगे कोई नुक़सान
- खाकी वर्दी के साथ प्राकृतिक खेती का जज़्बा: पुलिस अधिकारी जरनैल सिंह की “ऑर्गेनिक गोल्ड” क्रांतिपुलिस अधिकारी जरनैल सिंह ने प्राकृतिक खेती अपनाकर सफलता की मिसाल पेश की। उनकी ऑर्गेनिक गोल्ड पहल किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
- 5 हजार से 6 लाख पौधे तक का सफर तय करने वाली 8 Naturals Nursery ने कैसे खड़ा किया देसी बीज बैंक का सफल नर्सरी बिज़नेसअनंत तायडे की 8 Naturals Nursery देसी प्रजातियों के संरक्षण, 6 लाख पौधों और सस्टेनेबल ग्रीन बिज़नेस मॉडल की प्रेरक मिसाल है।
- IAS उमाकांत उमराव का ‘देवास मॉडल’ जिसने सूखा प्रभावित ज़िले को बना दिया खेती का हबIAS उमाकांत उमराव के नेतृत्व में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन से देवास ने सूखे से उबरकर देश-दुनिया के लिए सफल मॉडल ज़िला बनने की मिसाल पेश की।
- हिमाचल में सेब सीज़न की तैयारियां तेज़, जगत सिंह नेगी ने लॉन्च किए नए डिजिटल इंतज़ामजगत सिंह नेगी ने सेब सीज़न को लेकर मोबाइल ऐप लॉन्च किया। बागवानों के लिए डिजिटल सुविधा, एमआईएस खरीद और भुगतान व्यवस्था होगी आसान।
- शिवराज सिंह चौहान ने ICAR के जरिए विकसित भारत 2047 का कृषि रोडमैप किया पेशशिवराज सिंह चौहान ने ICAR के 98वें स्थापना दिवस पर 386 उन्नत फ़सल क़िस्मों, नई तकनीकों और किसान केंद्रित कृषि पर ज़ोर दिया।
- ICAR’s 98th Foundation Day पर शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के लिए किए कई बड़े ऐलानICAR’s 98th Foundation Day पर शिवराज सिंह चौहान ने 43 नई फ़सल क़िस्में, नई तकनीकों और किसानों के लिए कई बड़े लक्ष्य घोषित किए।
- शिवराज सिंह चौहान ने ICAR CSR Conclave 2026 में कॉर्पोरेट सेक्टर से किसानों के लिए आगे आने की अपील कीशिवराज सिंह चौहान ने ICAR CSR Conclave 2026 में कृषि अनुसंधान, महिला किसानों और ग्रामीण विकास के लिए CSR सहयोग बढ़ाने की अपील की।
- राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को कैबिनेट की मंज़ूरी, देश में बढ़ेगा यूरिया उत्पादन और घटेगी आयात पर निर्भरताराष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को कैबिनेट की मंज़ूरी मिली। नई नीति से यूरिया उत्पादन बढ़ेगा, निवेश आएगा और आयात पर निर्भरता घटेगी।
- El Niño की आशंका के बीच तेलंगाना सरकार ने किसानों को दी सलाह, कम पानी वाली फ़सलों की खेती पर दिया ज़ोरEl Niño की आशंका के बीच तेलंगाना सरकार ने किसानों को धान की जगह कम पानी वाली फ़सलें अपनाने और मौसम के अनुसार खेती की सलाह दी।
- शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल में कृषि और ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा की, किसानों के लिए कई बड़े फैसलेशिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल में कृषि, ग्रामीण विकास, जूट किसानों, आवास और किसान कल्याण योजनाओं की समीक्षा की।
- उत्तर प्रदेश सरकार की पशुपालकों के लिए ख़ास स्कीम, ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ को हरी झंडीसरकार ने 60 करोड़ रुपये की लागत से ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ (‘Chief Minister’s Risk Management and Livestock Insurance Scheme’) को हरी झंडी दे दी है। इस स्कीम के तहत प्रदेश के 2 लाख 28 हजार 350 से अधिक पशुओं को बीमा कवर मिलेगा।
- खरीफ 2026 की फसलों के लिए फसल बीमा योजना: किसान भाई जल्द करें अप्लाईफसल बीमा योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि Debt-free किसान और एनपीए किसान भी निर्धारित प्रीमियम जमा करके इस स्कीम का पूरा फायदा उठा सकते हैं, जिससे कर्ज की स्थिति में भी किसान अपनी फसल का बीमा करवा सकते हैं।
- सूखे इलाके में ज्ञान चंद की प्राकृतिक खेती बनी किसानों के लिए मिसालप्राकृतिक खेती अपनाकर ज्ञान चंद ने कम पानी में बेहतर खेती की, लागत घटाई और कई किसानों को नई राह दिखाई।
- Vriksh Mitra Abhiyan: पूसा में 17 हज़ार वृक्ष मित्रों ने ली धरती को हरा-भरा बनाने की शपथ, कृषि मंत्री ने दिया हरित भारत का संदेशकेंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन की शुरुआत पर्यावरण संकट की गंभीरता को बताते हुए की और साफ कहा कि यह केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का संकट है।
- India-New Zealand Agriculture Partnership: कृषि, बागवानी, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहयोग,किसानों की आमदनी बढ़ाने की नई पहलकृषि अनुसंधान, इनोवेशन, कौशल विकास और जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों पर मिलकर काम करने का भी फैसला हुआ है।
- अलवर के प्याज किसानों के लिए खुशख़बरी: 50 फीसदी अनुदान पर बनेगा Warehouse, जानें कैसे करें अप्लाईयोजना के तहत 25 मीट्रिक टन क्षमता वाली प्याज भंडारण संरचना बनाने पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी, जो अधिकतम 87,500 रुपये तक हो सकती है।
- बिहार के सारण में एसी रूम में मशरूम की खेती को मिलेगा रियायती बिजली का लाभबिहार के सारण जिले में में एसी रूम में मशरूम की खेती करने वाले किसानों को अब रियायती कृषि दर पर बिजली मिलेगी, जिससे लागत घटेगी और आय बढ़ेगी।
- हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए HP AgriStack Farmer Registry Portal पर रजिस्ट्रेशन हुआ अनिवार्य, जानें पूरी जानकारीHP AgriStack Farmer Registry Portal पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले हिमाचल प्रदेश के किसान कई सरकारी योजनाओं और लाभों से वंचित रह सकते हैं पढ़ें पूरी ख़बर।
- वर्षा जल को सहेजने और जल सुरक्षा के लिए ‘नेशनल वॉटर मिशन’ के तहत शुरू हुआ Catch the Rain अभियानप्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में भी Catch the Rain अभियान को गति देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि “हमें बारिश की एक-एक बूंद बचानी है, इस मुहिम की गति को कम नहीं पड़ने देना है”। ये कोई सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक ‘जन भागीदारी’ का आंदोलन है।





















