अंगूर की खेती: देश के जिन गाँवों से दुनियाभर में एक्सपोर्ट होता है अंगूर, वहां से पढ़िए किसान ऑफ़ इंडिया की ये रिपोर्ट

अंगूर की खेती कर रहे यहाँ के किसानों का अंगूर दुबई, रूस, चीन और यूरोपियन देशों में निर्यात यानी एक्सपोर्ट होता है। देश और क्वालिटी के हिसाब से तय होते हैं दाम।

किसान ऑफ़ इंडिया की टीम फ़ील्ड में उतरकर अपने किसान साथियों के लिए खेती-किसानी से जुड़े किसानों के अनुभव आपके साथ साझा करती है। मैं गौरव मनराल दिल्ली से पुणे एक ऐसे ही सफर पर निकल पड़ा। इस सफर की शुरुआत दिल्ली से हुई, जहां से मैं 1470 किलोमीटर की दूरी तय करके पुणे पहुंचा। पुणे पहुंचने के बाद और कई लोगों से पूछते-पूछते एक जगह के बारे में पता चला, जहां के ज़्यादातर किसान द्रक्ष की खेती करते हैं। अब आप सोच रहे होंगे भला ये द्रक्ष है क्या? मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। बाद में रिसर्च कर के पता चला कि द्रक्ष एक फल है और इस फल को मैं और आप बड़ा लुत्फ़ लेकर खाते हैं। इसका नाम है अंगूर। महाराष्ट्र में अंगूर को द्रक्ष भी कहा जाता है। फिर मैं द्रक्ष यानी कि अंगूर की खेती करने वाले किसानों से मिलने पुणे से 230 किलोमीटर सांगली के सफर पर निकल पड़ा। रास्ते में हर-भरे पहाड़ और चेहरे पर पड़ती हवा की ठंडी बयार का आनंद लेते हुए कब सांगली पहुंच गया पता ही नहीं चला।

क्या आपने सुना है द्रक्ष की खेती के बारे में?

फिर सांगली पहुंचते ही अंगूर की खेती करने वाले किसानों से मिलने भोसे गाँव की तरफ़ निकल पड़ा। भोसे गाँव पहुंचते ही चारों तरफ़ अंगूर के पेड़ दिखे।  मैं एक अंगूर के बागान पर जा रुका और अंगूर की खेती करने वाले एक किसान से मिला। उनसे जाना कि क्यों भोसे गाँव के ज़्यादातर किसान अंगूर की खेती करते है? इसमें कितना मुनाफ़ा है? अंगूर की खेती कर रहे किसान दादासो विश्वनाथ पाटिल ने इसके बारे में पूरी जानकारी दी। दादासो विश्वनाथ पाटिल के पास 10 एकड़ की ज़मीन है जिसमें वो अंगूर की खेती करते हैं।

grapes farming pune maharashtra (अंगूर की खेती)

अंगूर की खेती: देश के जिन गाँवों से दुनियाभर में एक्सपोर्ट होता है अंगूर, वहां से पढ़िए किसान ऑफ़ इंडिया की ये रिपोर्टदेश-दुनियाभर में एक्सपोर्ट होते हैं इन गाँवों के अंगूर

दादा ने बताया कि भोसे गाँव के ज़्यादातर किसान अंगूर की खेती से इसलिए जुड़े हैं क्योंकि इसमें मुनाफ़ा अच्छा रहता है। दादा से अंगूर की खेती के बारे में बात करते हुए मुझे एक और दिलचस्प बात का पता चला। भोसे और सांगली के एक और गाँव सोनी के अंगूर देश और दुनियाभर में एक्सपोर्ट किए जाते हैं। यहां के अंगूर दुबई, रूस, चीन और युरोपियन देशों में एक्सपोर्ट किए जाते हैं। देश के हिसाब से अंगूर की ग्रेडिंग की जाती है, यानी हर देश के तय मानकों के मुताबिक अंगूर की खेती की जाती है।

अंगूर का एक पौधा देता है 12 से 16 किलो तक का उत्पादन

दादा ने बताया कि अंगूर 4 महीने या 125 दिनों वाली खेती है। जब ये अंगूर बड़े हो जाते हैं तो इन्हें पहले लैब में भेजा जाता है। जहां ये पता चलता है कि अंगूर कौन से देश में भेजने लायक हैं। फिर दादा ने मुझे बताया कि अंगूर का एक पौधा 12 से 16 किलो तक उत्पादन देता है। ऐसे में दादा के एक एकड़ की कमाई 5 से 6 लाख रुपये तक हो जाती है।

grapes farming pune maharashtra (अंगूर की खेती)

आमदनी निर्यात किए गए देश पर करती है निर्भर

कई बार वो एक एकड़ में से 16 लाख रुपये तक कमा लेते हैं। दादा ने आगे बातचीत में बताया कि उनके अंगूर कौन से देश में भेजे जा रहे हैं, क्वालिटी कैसी है और वहां का दाम कितना है, इसपर भी कमाई निर्भर करती है।

25 फ़ीसदी अंगूर का निर्यात चीन को करते हैं

दादा ने ये भी बताया कि उनका ज़्यादातर अंगूर दुबई जाता है, लेकिन चीन में उनको दाम सबसे ज़्यादा मिलता है। इसी वजह से वो अपने उत्पादन का 25 फ़ीसदी अंगूर चीन  भेजते हैं। इसी के साथ दादा ने अंगूर की खेती के लिए ज़रूरी वातावरण के बारे में भी मुझे बताया। अंगूर को धूप  कम चाहिए और नमी वाला वातावरण चाहिए होता है। इसकी खेती के लिए ज़्यादा पानी की भी ज़रूरत नहीं पड़ती।

grapes farming pune maharashtra (अंगूर की खेती)

अंगूर की खेती: देश के जिन गाँवों से दुनियाभर में एक्सपोर्ट होता है अंगूर, वहां से पढ़िए किसान ऑफ़ इंडिया की ये रिपोर्टशुरुआती एक से दो साल में वसूल हो जाएगा लागत का पैसा

आगे मैंने अपने किसान साथियों के मन में उठने वाले एक सवाल को लेकर पूछा कि अगर किसी किसान के पास अंगूर की खेती शुरू करने के लिए पैसा नहीं है तो वो क्या करे? इसके जवाब में उन्होंने मुझे बताया कि अंगूर की खेती शुरू करने के लिए बैंक से लोन भी लिया जा सकता है। दादा ने ये भी बताया कि अंगूर की खेती में शुरू में जो लागत लगती है, अगर फ़सल सही रही तो वो एक से दो साल में ही वसूल हो जाती है।

grapes farming pune maharashtra (अंगूर की खेती)

दादा ने मुझे ये भी बताया कि 2001 में अंगूर की खेती करने से पहले वो किसी और के बगीचे में काम करते थे। उन्होंने 2001 में एक एकड़ से अंगूर की खेती करना शुरू किया था। तब उनके पास एक साइकिल हुआ करती थी। आज उनके पास खुद का घर, गाड़ी और 10 एकड़ ज़मीन है।  कहावत है कि अंगूर खट्टे हैं लेकिन इस पूरे इलाके  में तो अंगूर ने किसानों की ज़िंदगी में सिर्फ़ मिठास घोली है।  

grapes farming pune maharashtra (अंगूर की खेती)

ये भी पढ़ें: पॉलीहाउस तकनीक से खेती क्यों है सबसे बेहतर? जानिए इस ‘इंजीनियर’ किसान से

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

मंडी भाव की जानकारी
 

ये भी पढ़ें:

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top