हरी सब्ज़ियों में शिमला मिर्च एक प्रमुख सब्ज़ी है। शिमला मिर्च पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें विटामिन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम आदि भरपूर मात्रा में पाया जाता है। चाइनीज़ व्यंजनों में तो ख़ासतौर पर शिमला मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है। शिमला मिर्च की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पारंपरिक तरीके से शिमला मिर्च का उत्पादन करने की बजाय शिमला मिर्च की सरंक्षित खेती की जानी चाहिए। इससे उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
संरक्षित खेती क्या होती है?
यह आधुनिक खेती की एक संरचना है, जिसमें एक नियंत्रित वातावरण में फसलें उगाई जाती हैं। इसमें कीट अवरोधी नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नई तकनीक से लैस पॉलीहाउस, प्लास्टिक लो-टनल, प्लास्टिक हाई-टनल, प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई आदि का इस्तेमाल होता है। इससे फसलों का उत्पादन अधिक होता है।

शिमला मिर्च की सरंक्षित खेती
शिमला मिर्च की खेती ठंडे इलाकों में अच्छी तरह होती है, लेकिन संरक्षित खेती के ज़रिए हर इलाके में इसे पूरे साल उगाया जा सकता है। इसमें वातावरण, तापमान और नमी को अपने हिसाब से एडजस्ट किया जाता है। शिमला मिर्च हरे रंग के अलावा, लाल और पीले रंग की भी होती है। आमतौर पर 4-5 महीने में इससे प्रति हेक्टेयर 20-40 टन फसल प्राप्त होती है, जबकि ग्रीन हाउस में शिमला मिर्च की खेती से प्रति हेक्टेयर 80-100 टन तक फसल प्राप्त होती है। हां लेकिन इन्हें तैयार होने में 7-10 महीने का समय लग जाता है।

शिमला मिर्च की संरक्षित खेती क्यों फ़ायदेमंद है?
संरक्षित खेती में पौधों को बढ़ने के लिए बेहतर वातावरण मिलता है। यह फसलों को अधिक बारिश, हवा और गर्मी से बचाता है। संरक्षित खेती में रोग-कीटों का प्रकोप कम होता है।फसल की गुणवत्ता और उपज में वृद्धि होती है। खुली खेती की तुलना में इससे 2 से 3 गुना अधिक पैदावार होती है। सरंक्षित खेती के तहत इस्तेमाल होने वाली सरंचना में नेट हाउस और पॉलीहाउस प्रमुख हैं। दक्षिण भारत ख़ासतौर पर बेंगलुरू के आसपास इसका इस्तेमाल अधिक किया जाता है। पॉलीहाउस, नेटहाउस की तुलना में महंगा, लेकिन अधिक बेहतर होता है। बारिश का पानी इसके अंदर नहीं आ पाता और रोगों से भी पौधों का बचाव होता है। इसमें पैदावार भी नेट हाउस की तुलना में 15-20 प्रतिशत अधिक होती है।

शिमला मिर्च की संरक्षित खेती के लिए जलवायु और मिट्टी
शिमला मिर्च की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली रेतिली दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। इसके अच्छे विकास के लिए दिन का तापमान 25-30 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 18-20 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए।
शिमला मिर्च की संरक्षित खेती के लिए नर्सरी करें तैयार
शिमला मिर्च की संरक्षित खेती के लिए पहले नर्सरी में पौधों को तैयार करना होता है। पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती के लिए इसकी इंद्र, बॉम्बे, ओरोबेल और स्वर्ण किस्में अच्छी होती है। पौधों को खेत या पॉलीहाउस में लगाने से पहले अच्छी गुणवत्ता वाले बीज से बेहतर पौध नर्सरी में तैयार किए जाते हैं। इसके लिए प्रो-ट्रे को रोगाणुरहित कोकोपिट से भरके बीज बोया जाता है। एक सेल या खाने में एक बीज आधा सेंटीमीटर की गहराई तक डाला जाता है। बीज से भरे ट्रे को एक के ऊपर एक रख दिया जाता है और बीजों के अंकुरित होने तक प्लास्टिक की चादर से ढक दिया जाता है। एक हफ़्ते बाद बीज अंकुरित हो जाते हैं। फिर ट्रे को पॉलीहाउस में रख दिया जाता है और 30-35 दिन बाद पौधों की रोपाई की जाती है।

ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन
शिमला मिर्च की संरक्षित खेती के लिए सिंचाई के लिए ड्रिप तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। जबकि फसलों के विकास के लिए पानी में घुलने वाले उर्वरक जैसे पोटैशियम नाइट्रेट और कैल्शियम नाइट्रेट को फर्टिगेशन के माध्यम से डाला जाता है। यह रोपाई के तीसरे हफ़्ते से शुरू होता है।
शिमला मिर्च की संरक्षित खेती में कितना होता है उत्पादन?
सरंक्षित खेती में हरी शिमला मिर्च की फसल पौधे लगाने के 55 से 60 दिन बाद, पीली शिमला मिर्च की तुड़ाई 70-75 दिन बाद और लाल शिमला मिर्च की फसल 80-90 दिन बाद तैयार हो जाती है। फलों को 3-4 दिन में एक दिन तोड़ा जाता है। इसमें औसत उपज प्रति हेक्टेयर 80-100 टन प्राप्त होती है।

रोग-कीटों से कैसे करें शिमला मिर्च की फसल सुरक्षा
शिमला मिर्च की फसल पर ‘डैम्पिंग ऑफ’ और ‘फाइटोप्थोरा सड़ांध’ जैसे रोगों के लगने का खतरा रहता है। इन्हें कार्बेन्डाजिम (1 ग्राम/ली.) एवं मेटलैक्सिल एम जेड (2 ग्राम/ली.) के छिड़काव द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। शिमला मिर्च की खेती थ्रिप्स, एफिड्स
और माइट्स जैसे विभिन्न कीटों से भी प्रभावित होती है। इन कीटों का प्रबंधन क्लोरोपायरीफॉस (2 मि.ली./ लीटर), डाइमेथोएट (2 मि.ली./लीटर) और डाइकोफोल (1 मि.ली./लीटर) का छिड़काव करके किया जा सकता है।
ये भी पढ़ें: जानिए क्या है संरक्षित खेती (Protected Cultivation), डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताए इस उन्नत तकनीक के फ़ायदे
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- लखनऊ का मलिहाबादी दशहरी आम अब ग्लोबल पहचान की ओर, ODOP में होगा शामिलमलिहाबादी दशहरी आम की मांग अब 25 से अधिक देशों में है। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह आम पहुंच रहा है।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पर्यावरण और जलवायु कार्रवाई को लेकर सहयोग पर दिया ज़ोरद्रौपदी मुर्मू ने NGT कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ज़ोर दिया।
- केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय का बड़ा ऐलान: रेशम उत्पादक किसानों की बढ़ेगी आमदनी,’सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान पुरस्कार’ की शुरुआत की घोषणासरकार की रणनीति सीधी और वैज्ञानिक है। शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाकर और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण के राउंड को बढ़ाकर किसानों की आमदनी 10 से 12 लाख रुपये तक ले जाने का टारगेट है।
- पराली जलाने पर केंद्र सख़्त: ज़मीन के रिकॉर्ड में 15 महीने तक दर्ज रहेगा नाम, दोबारा जलाने पर और कड़ी कार्रवाई!ये नियम दिल्ली-एनसीआर और आसपास के उन इलाकों में लागू होगा जहां पराली जलाने की घटनाओं का असर दिल्ली की हवा पर पड़ता है।
- Samriddh Vidisha Model: तैयार हुआ ग्रामीण गरीबी को जड़ से ख़त्म करने के लिए नया रोडमैपSamriddh Vidisha Model की सबसे बड़ी ख़ूबी है कि आमदनी के एक नहीं, कई साधन है। किसानों को आधुनिक खेती के साथ दूध, बकरी, मुर्गी और मधुमक्खी पालन से जोड़ा जाएगा, ताकि एक सोर्स रुकने होने पर परिवार न बिखरे।
- दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों को समय पर लक्ष्य पूरा करने के निर्देशदक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों से Farmer ID, AgriStack और कृषि लक्ष्यों को तय समय में पूरा करने को कहा गया।
- Mahila Shetkari Portal: महाराष्ट्र सरकार का ऐतिहासिक कदम,अब खेत में काम करने वाली हर महिला बनेगी ‘किसान’अधिनियम के अनुसार, महिला को किसान मानने का आधार सिर्फ ज़मीन का मालिकाना हक नहीं, बल्कि खेती में उसकी ‘वास्तविक भागीदारी’ होगी।
- Soil Carbon Payments से किसानों को अतिरिक्त आय की नई पहलSoil Carbon Payments के ज़रिए पंजाब और हरियाणा के 2500 से ज़्यादा किसानों को 2.9 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान मिलेगा।
- Reimagining Indian Agriculture रिपोर्ट में ख़ुलासा : देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन बंजर!देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन ख़राब हो रही है। रिपोर्ट में ICAR-Indian Institute of Soil Science के आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
- त्योहारी सीजन में राहत की उम्मीद: सरकार घटा सकती है खाद्य तेल पर आयात शुल्कभारत अपनी खाद्य तेल की ज़रूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है। ये आयात मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन से होता है।
- बिहार में बाढ़ से फ़सल नुक़सान का जायज़ा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहानशिवराज सिंह चौहान ने बिहार में बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायज़ा लिया और किसानों को केंद्र से हर संभव मदद का भरोसा दिया।
- सिवनी का जम्बो सीताफल: जीआई टैग के साथ बदलेगी किसानों की तकदीर,इंटरनेशनल मार्केट से जोड़ने की तैयारी शुरूसिवनी का जम्बो सीताफल (Seoni’s Jumbo Custard Apple) औसतन 200 से 650 ग्राम का होता है, लेकिन भूतबंधानी क्षेत्र में कई फल 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक के मिलते हैं।
- World Circular Economy Forum 2026 में भारत की सर्कुलर इकॉनमी पर वैश्विक चर्चाWorld Circular Economy Forum 2026 में 62 देशों के 3600 से अधिक stakeholders ने Circular Economy पर चर्चा की।
- किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना: 32 साल इंतज़ार के बाद ऐतिहासिक समझौता,जानिए किस राज्य को मिलेगा सबसे बड़ा लाभकिशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) की नींव 1994 के ऊपरी यमुना जल समझौते में रखी गई थी, लेकिन आर्थिक बोझ और राज्यों के हितों के टकराव ने इसे आठ साल तक ठप कर दिया।
- खेती के साथ मधुमक्खी पालन: पाएं 1.28 लाख का अनुदान,1.92 लाख रुपये की लागत में शुरू करें अपना ख़ुद का बिज़नेसमधुमक्खी पालन की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इसके लिए आपको बड़े खेत या अलग ज़मीन की ज़रूरत नहीं है। आप अपने घर के आसपास, बगीचे में, पेड़-पौधों वाली जगह पर आसानी से यह यूनिट लगा सकते हैं।
- Google और Mitti Labs का बड़ा करार: धान के खेतों से मीथेन गैस की कटौती और पानी की बचतमिट्टी लैब्स अपनी ‘Geo-AI’ Technology का इस्तेमाल कर रही है, जिसे नासा के सहयोग से विकसित किया गया है।
- CAZRI Moth Bean की क़िस्मों ने सूखे में दिखाई शानदार सहनशीलता, 35 दिन तक बारिश न होने पर भी बनी रही फ़सलCAZRI Moth Bean की क़िस्मों ने 35 दिन के सूखे में भी बेहतर प्रदर्शन कर जलवायु अनुकूल खेती की उम्मीद बढ़ाई।
- ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज: ग्लोबल साउथ की फ़सल का असली मोल वापस पानाब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज से ग्लोबल साउथ के किसानों को फ़सल की क़ीमत तय करने में कैसे अधिक अधिकार और वैश्विक कृषि बाज़ार में नई भूमिका मिल सकती है, जानें।
- BRICS Summit 2026 : कृषि में AI, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेवाओं से किसानों, कारोबारियों को होगा लाभBRICS देशों के लिए Early Warning Data Integration Guidelines तैयार की गई हैं। इसका मकसद बाढ़, चक्रवात या भूकंप जैसी आपदाओं से पहले देशों के बीच डेटा साझा करना है
- आंध्र प्रदेश सरकार का पोल्ट्री फार्मस के लिए 657 करोड़ का तोहफ़ा, ब्याज से लेकर बिजली तक सब सस्ताशहरी क्षेत्रों में पोल्ट्री शेड बनाने पर लगने वाले डेवलपमेंट और बेटरमेंट चार्ज से छूट दी गई है। ग्राम पंचायतों के बराबर कम शुल्क पर मंज़ूरी मिलेगी।





















