भारत सरकार लगातार किसानों की आय को दोगुनी करने की बात कह रही है। अब किसान की आय को दोगुना करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन योजनाओं से किसान को भी लाभ मिल रहा है। आप सोच रहे होंगे कि इस लेख में किसी सरकारी योजना को लेकर चर्चा होने वाली है, लेकिन यहां बात हो रही है मुंजा घास की। मुंजा एक बहुवर्षीय घास है, जो कि गन्ना प्रजाति की होती है। यह घास ग्रेमिनी कुल से संबंध रखती है। इसके पौधे की लंबाई 5 मीटर तक होती है। मुंजा घास की खेती करने से किसान को एक अतिरिक्त फ़ायदा ये भी है कि किसान एक बार इसको लगा दे तो इसके पौधे की जड़ फैलने के बाद लगभग 24-30 साल तक नहीं मरती हैं। मरुस्थलीय प्रदेशों में मुंजा घास मिट्टी के कटाव को रोकने का काम करती है।
मूंजा घास किस परिस्थिति में पनपती है?
मुंजा घास नदियों, सड़कों, हाईवे, रेलवे लाइनों और तालाब के किनारे खाली जगह पर कुदरती रुप से उग आती है। यह घास भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में पाई जाती है। किसान इसको आसानी से लगा सकते हैं। भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में लगभग 33 फ़ीसदी लोगों को रोज़गार मिलता है।
मुंजा एक औषधीय पौधा
मुंजा की जड़ों का दवाई के रुप में उपयोग बताया गया है। इसके पौधे, पत्तियां, जड़ और तने इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके पौधे की जड़ों से दवाइयां भी बनाई जाती हैं। आपको बता दें कि पुराने समय में जब अंग्रेजी दवाइयां नहीं थी तो हकीम इसको उपयोग में लाते थे।
यह भी पढें: भेड़ पालन (Sheep Rearing): भेड़ की पांचाली नस्ल क्यों है ख़ास? जानिए कीमत और इसकी खूबियों के बारे में
मुंजा घास की खेती कैसे करें?
मुंजा घास रेतीली, ढलानदार और हल्की मिट्टी में उगाया जा सकती है। यह मुख्यतः जड़ों से रोपित की जाती है। एक पौधे (मदर प्लांट) से तैयार होने वाली 25 से 40 छोटी जड़ों के द्वारा इसको लगाया जाता है। जुलाई महीने में पौधों से नई जड़ें निकलने लगे तब इन्हें बोना चाहिए। इनको 30 बाय 30 सेंटीमीटर आकार के गड्ढों में 76 बाय 60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना चाहिए। इसकी 30,000 से 35,000 जड़ें प्रति हेक्टेयर लागाई जा सकती हैं। मुंजा को रासायनिक खाद की आवश्यकता नहीं पड़ती फिर भी यदि ज़रुरत हो तो 15-20 टन प्रति हेक्टेयर देसी खाद डालनी चाहिए। इसकी औसत पैदावर 350-400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त की जा सकती है।

इन बातों का रखें ध्यान
- जब किसान पौधे खेत में लगा दें तो उसके दो महीने बाद उनको जानवरों से बचाना चाहिए। इसको लगाने के बाद सूखाग्रस्त इलाके में किसानों को तुरंत पानी देना चाहिए। इससे पौधे हरे और स्वस्थ रहते हैं।
- किसान पानी देते समय ध्यान रखें कि पानी का जमाव पौधे की जड़ों के लिए हानिकारक होता है। इससे पौधों की जड़ों का विकास रुक जाता है।
- पहली बार लगभग 12 महीने के बाद मुंजा को जड़ों से 30 सेंटीमीटर ऊपर से काटना चाहिए। मुंजा के पौधों की कटाई हर साल करनी चाहिए।
कब और कैसे करें मुंजा घास की कटाई
मुंजा घास की कटाई हर साल अक्टूबर से नवंबर में करनी चाहिए। किसान को कटाई तब करनी चाहिए जब पौधे की ऊंचाई 10 से 12 फ़ीट हो जाए और पत्तियां सूखने लगे और पीली पड़ जाएं। कटाई के बाद सरकंडों को सूखने के लिये 5-8 दिनों तक खेत में इकट्ठा करके फूल वाला भाग ऊपर तथा जड़ वाला भाग नीचे करके खेत में मेड़ों के पास खड़ा करके सुखाना चाहिए। सूखने के बाद कल्लों से फूल वाला भाग अलग कर लें और बाजार में बेचने के लिये भेजना चाहिए। सूखने के बाद फूलों को अलग करके बाजार में बेचने के लिए भेज देना चाहिए। एक अनुमान के मुताबिक, इस फसल से 85,000 से 100,000 रुपये तक की कमाई की जा सकती है।
मुंजा के अलग-अलग उपयोग
• मुंजा को घरेलू सामान जैसे चारपाई, बीज साफ करने के लिए छाज, रस्सी, बच्चों का झूला, छप्पर आदि बनाने के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाता है।
• मुंजा का पौधा मृदा कटाव को 75 फ़ीसदी तक कम करता है।
• खेतों के चारों ओर मेड़ों पर मुंजा की फसल लगाने से अन्य फसलों को लू से बचा सकते हैं।
• मुंजा का प्रयोग ग्रीसिंग पेपर बनाने में भी किया जाता है।
• पशुओं के पैर की हड्डी टूट जाने पर इसके सरकंडों को मुंजा की रस्सी से चारों तरफ बांधने पर आराम मिलता है।
• पत्तियों की कुट्टी करके पशुओं को खिलाने से हरे चारे की पूर्ति हो जाती है।
• इसकी राख से कीटनाशक जैविक उत्पाद बनाए जाते हैं।
ये भी पढ़ें- गाजर घास: मिट्टी और किसान के इस सबसे बड़े दुश्मन को फ़ौरन नष्ट करें
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- रांची में महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला से महिलाओं का बढ़ा आत्मविश्वासरांची में आयोजित महिला मत्स्य कृषक सशक्तिकरण कार्यशाला से महिलाओं को मत्स्य पालन के ज़रिए आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला।
- Drones for “Precision” Nutrition: कैसे स्मार्ट छिड़काव, मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग और खेत की मैपिंग भारतीय खेती में इनपुट के उपयोग को बदल रहे हैंप्रिसिजन खेती इस समस्या को इनपुट को जरूरत से जोड़कर हल करने की कोशिश करती है। इस काम में ड्रोन महत्वपूर्ण बन रहे हैं क्योंकि वे दो काम साथ कर सकते हैं
- Unseasonal Rain And Hailstorm: उत्तर प्रदेश के CM योगी ने जताई चिंता, सर्वे और मुआवज़े के निर्देशप्रकृति ने एक बार फिर किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि (Unseasonal Rain and Hailstorm) ने भले ही गर्मी से राहत दे दी हो, लेकिन गेहूं की फसल पर ऐसा कहर बरपाया कि किसानों की उम्मीदें चूर-चूर हो गईं। कई ज़िलों में हुई… Read more: Unseasonal Rain And Hailstorm: उत्तर प्रदेश के CM योगी ने जताई चिंता, सर्वे और मुआवज़े के निर्देश
- Vermicompost Business: जानिए वर्मीकम्पोस्ट बिज़नेस से जुड़े नोएडा के राम पांडे किन बातों का रखते हैं ध्यानवर्मीकम्पोस्ट जिसे केंचुआ खाद भी कहा जाता है, पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद होती है। जिसे गोबर और केंचुए की मदद से तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में केंचुए बहुत अहम होते हैं। इसलिए केंचुए की सही देखभाल करके बिज़नेस से अच्छा मुनाफ़ा कमाया जा सकता है।
- करनाल दौरे पर डॉ. मांगी लाल जाट ने कृषि अनुसंधान कार्यों की समीक्षा कीडॉ. मांगी लाल जाट ने करनाल में कृषि अनुसंधान की समीक्षा कर जलवायु अनुकूल खेती और नई तकनीकों पर ज़ोर दिया।
- बेबी कॉर्न की खेती से बदली किसानों की तकदीर, युवाओं के लिए बना मुनाफे़ का नया मॉडलपूर्णिया जिले के रानीपतरा के युवा किसान शशि भूषण ने खेती के क्षेत्र में एक नया उदाहरण पेश किया है। जहां अधिकांश किसान अभी भी पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं, वहीं शशि भूषण ने बेबी कॉर्न की खेती अपनाकर यह दिखाया है कि कम समय और कम लागत में भी बेहतर मुनाफ़ा कमाया जा सकता है।
- मध्यप्रदेश सरकार की बड़ी सौगात: Cage Culture Scheme से मछुआरों की कमाई होगी दोगुनी, लास्ट डेट से पहले करें अप्लाईमछुआरों की आय बढ़ाने के लिए Integrated Fisheries Policy 2026 के तहत केज कल्चर योजना (cage culture scheme) शुरू कर दी है।
- कैसे काम करता है किसानों के डिजिटल मित्र ‘एग्रीबॉट्स’? खेती को आसान बनाने वाले Agribotsएग्रीबॉट्स को ही कृषि रोबोट कहा जाता है। ये मूल रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी artificial intelligence पर आधारित रोबोट हैं, जो कृषि प्रथाओं के लिए उपयोगी हैं।
- नौकरी गई तो शुरू किया अंकुरित काजू का व्यवसाय और बन गए सफल कृषि उद्यमीजब दिल में कुछ करने की चाह हो तो रास्ते अपने आप ही बन जाते हैं, ऐस ही कुछ हुआ कुन्नूर के रहने वाले ब्रिजिथ कृष्णा के साथ। नौकरी खोने के बाद भी वह मायूस नहीं हुए और लगातार कुछ नया करने की कोशिश करते रहे। उन्हें एक नया आइडिया निकाला अंकुरित काजू का व्यवयास करने का और कुछ ही समय में यह आइडिया हिट भी हो गया।
- कोरबा में बदल रही खेती की तस्वीर, तिलहन–दलहन फसलों से बढ़ रही किसानों की आयदिलीप कुमार कंवर ने अपनी जमीन पर सूरजमुखी की खेती शुरू की है, जो कम लागत में अच्छी पैदावार देने वाली फसल मानी जाती है।
- छत्तीसगढ़ के खोरसी गांव में गेंदे की खेती से बदल रही आदिवासी महिलाओं की ज़िंदगीछत्तीसगढ़ के खोरसी गांव में गेंदे की खेती से आदिवासी महिलाएं अच्छी आमदनी कमा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
- Kharif Season 2026 के लिए NBS सब्सिडी तय, किसानों को अब मिलेगी सस्ती खादKharif Season 2026 (1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026) के दौरान फॉस्फेटिक और पोटाशिक (Phosphatic and Potassic) खादों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) की दरें तय कर दी गई हैं.
- पॉलीहाउस तकनीक: वर्टिकल फ़ार्मिंग से कैसे मिलेगा अधिक उत्पादन, क्या है इसका सही तरीका? जानिए एक्सपर्ट सेबुंदेलखंड की सख्त ज़मीन पर पॉलीहाउस तकनीक से खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें बांदा कृषि विश्वविद्यालय अहम भूमिका निभा रहा है। मुश्किल परिस्थितियों में सब्ज़ियों का उत्पदान कैसे पूरे साल किया जाए, इसके लिए विश्वविद्यालय ने एक प्रोजेक्ट के तहत 200 स्क्वायर मीटर के छोटे एरिया में कई पॉलीहाउस लगाए हुए हैं। जानिए सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पॉलीहाउस तकनीक से खेती के बारे में विस्तार से।
- Backyard Poultry Farming: पोल्ट्री विशेषज्ञ डॉ. एल.सी. वर्मा से जानिए बैकयार्ड मुर्गी पालन का गणितअगर पोल्ट्री फ़ार्मिंग की बात करें तो बैकयार्ड मुर्गी पालन व्यवसाय कई मानकों में फ़ायदेमंद है। खेती करते हुए बैकयार्ड मुर्गी पालन व्यवसाय भी शुरू किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र मऊ के प्रमुख और पोल्ट्री विशेषज्ञ डॉ. एल.सी. वर्मा से किसान ऑफ़ इंडिया की विशेष बातचीत।
- ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र में नई फ़सल किस्में तैयार, किसानों में बढ़ी उत्सुकताढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिकों द्वारा तैयार नई फ़सल किस्में किसानों को बेहतर उत्पादन और कम नुकसान का विकल्प दे रही हैं।
- खेतों में शी-टेक: कैसे ग्रामीण महिलाएं ड्रोन और डेटा अपना रही हैं?खेतों में शी-टेक से ग्रामीण महिलाएं तकनीक अपनाकर खेती के फैसले ले रही हैं, वहीं FPO पहल उन्हें सशक्त और कृषि को समावेशी बना रही है।
- इन युवाओं ने तैयार किया जैविक खेती (Organic Farming) का आधुनिक फ़ार्मिंग मॉडल, हज़ारों की संख्या में किसानों को जोड़ाKisan of India से ख़ास बातचीत में दीपेश कुमार चौहान ने जैविक खेती और किसानों की आय में बढ़ोतरी जैसे विषयों पर हमसे बात की। साथ ही, गौपालन के क्षेत्र में लीक से हटकर उन्होंने कदम उठाया है।
- Paddy Cultivation: धान की खेती में रोपाई, खरपतवार नियंत्रण और सिंचाई प्रबंधन के उन्नत तरीके, जानिए डॉ. राजीव कुमार सिंह सेइस समय धान की रोपाई का कार्य तेज़ी से चल रहा है। धान की खेती में कई अहम बातों का ध्यान रखना ज़रूरी होता है। मसलन धान की फसल में खरपतवारों से होने वाले नुकसान को 5 से 85 प्रतिशत तक आंका गया है।जबकि कभी-कभी ये नुकसान 100 फ़ीसदी तक हो सकता है। कैसे करें धान की फसल का सही प्रबंधन? भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के एग्रोनॉमी डीवीजन के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार सिंह से ख़ास बातचीत।
- यूपी बना देश का नंबर-1 Milk Producer, सूबे की महिलाएं बनीं तकदीर बदलने वाली हीरोइनताजा आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश अब देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य (Uttar Pradesh is now the country’s largest milk-producing state) है। यूपी का दूध देश के कुल उत्पादन में 16 फीसदी हिस्सा है। यानी, आप जो भी दूध पीते हैं, हर छठा गिलास यूपी का है।
- कंप्रेसर स्प्रे पंप: जयपुर के किसान नयन पाल का इनोवेटिव आविष्कार, Compressor Spray Pump ने किसानों की समस्या हल कीनयन पाल जयपुर के आमेर तहसील के रहने वाले हैं।कहते हैं न ज़रूरत ही आविष्कार की जननी है, तो बस नयन पाल अपने साथी किसानों की ज़रूरत को देखते हुए अपने मिशन पर लग गए। उन्होंने ट्रैक्टर से चलने वाला कंप्रेसर स्प्रे पंप बना डाला।





















