सहजन जिसे मोरिंगा और ड्रम स्टिक भी कहा जाता है, सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। शारीरिक कमज़ोरी दूर करने में सहजन का सूप बहुत फायदेमंद माना जाता है। दक्षिण भारत में सांभर बनाने में खासतौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। सहजन के फूल और फलियों का इस्तेमाल सब्ज़ी, अचार आदि बनाने में किया जाता है। इसकी पत्तियां भी खाई जाती है। ये पत्तियाँ डायबिटीज़ के मरीजों के लिए फायदेमंद होती हैं। सहजन में विटामिन सी, कैल्शियम, फाइबर, आयरन, फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व होते हैं। सहजन का इस्तेमाल कई तरह की दवाओं में भी किया जाता है। इसके बीज से तेल बनाया जाता है। कई कंपनियां अब सहजन की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी करवा रही है। सहजन की बढ़ती मांग को देखते हुए, इसकी खेती किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, अगर इसे सही तरीके से किया जाए तो।
मिट्टी और जलवायु
सहजन की खासियत ये है कि इसे हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है। यहां तक कि बंजर और कम उपजाऊ भूमि में भी इसकी खेती की जा सकती है। मिट्टी का pH 6.3 से 7 तक होना चाहिए। सहजन के पौधों को ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं होती है। सहजन का पौधा गर्म जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है। सहजन के फूल विकसित होने के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान ज़रूरी होता है। बहुत ज़्यादा ठंड और पाला गिरने वाले इलाकों में इसकी खेती नहीं की जा सकती है।

सहजन की पौध कैसे तैयार करें?
- सहजन की खेती के लिए आप सीधे बीज की बुवाई गड्ढों में कर सकते हैं या फिर नर्सरी में पहले इसकी पौध तैयार करें।
- पौध तैयार करने के लिए पॉलिथिन बैग में 1-2 से.मी. गहराई में बीज डालें।
एक बैग में 2-3 बीज डालें। - बीज 5-10 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं।
- जब पौध 60-90 सें.मी. लंबी हो जाए, तो इसकी खेत में रोपाई की जा सकती है।
- पौध या बीजों की बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह से तैयार किया जाता है।
- फिर गड्ढे बनाकर उसमें गोबर की खाद या कंपोस्ट डाला जाता है।
- सहजन के पौधों की रोपाई जून से लेकर सितंबर तक की जा सकती है।
- पौधों के अच्छे विकास के लिए इनकी कटाई भी ज़रूरी है।
- जब पौधे करीब 75 सेंमी के हो जाएं, तो इसके ऊपरी भाग को तोड़ देना चाहिए। इससे बगल से शाखाएं निकलती हैं।
- पौधों को 2.5 X 2.5 मीटर की दूरी पर 45 X 45 X 45 सेंमी. आकार का गड्ढा बनाकर रोपाई की जाती है।

खाद और सिंचाई
आमतौर पर बिना ज़्यादा खाद के इस्तेमाल के भी सहजन की अच्छी फसल मिल सकती है। खाद को आमतौर पर खेत तैयार करते समय मिट्टी में मिलाया जाता है और गड्ढे भरने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सहजन की जड़ों के लिए फॉस्फोरस और पत्तियों के विकास के लिए नाइट्रोजन की ज़रूरत होती है। सहजन के पौधों को ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं होती है। इसकी सिंचाई के लिए ड्रिप या फव्वारा सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल किया जा सकता है। 30 दिनों के अंतराल पर इसकी निराई गुड़ाई भी ज़रूरी है, क्योंकि खरपतवारों से पौधों का विकास प्रभावित होता है।

फलों की तुड़ाई
सहजन की फलियां आमतौर पर 160-170 दिनों में तैयार हो जाती है। साल में दो बार इसके पौधों में फलियां आती हैं और 4 बार इनकी तुड़ाई की जा सकती हैं। ज़रूरत के अनुसार अलग-अलग अवस्था में फलियों की तुड़ाई की जा सकती है। एक साल में सहजन के एक पौधे से करीब 200-400 (40-50 किलो) सहजन मिलते हैं। इससे साल में दो बार फल मिलते हैं। इसलिए इससे किसानों की अच्छी कमाई हो सकती है। एक एकड़ में सहजन की खेती से सालाना करीब 6 लाख तक का मुनाफा कमाया जा सकता है।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- India-US Trade Deal पर किसानों की चिंता के बीच PM Modi बोले- FTA में किसानों को नहीं होने देंगे कोई नुक़सानभारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित Trade Deal को लेकर देश में बहस तेज हो गई है। एक तरफ केंद्र सरकार का कहना है कि किसी भी Free Trade Agreement यानी FTA में भारत के किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, किसान संगठनों को डर है कि अगर अमेरिकी… Read more: India-US Trade Deal पर किसानों की चिंता के बीच PM Modi बोले- FTA में किसानों को नहीं होने देंगे कोई नुक़सान
- खाकी वर्दी के साथ प्राकृतिक खेती का जज़्बा: पुलिस अधिकारी जरनैल सिंह की “ऑर्गेनिक गोल्ड” क्रांतिपुलिस अधिकारी जरनैल सिंह ने प्राकृतिक खेती अपनाकर सफलता की मिसाल पेश की। उनकी ऑर्गेनिक गोल्ड पहल किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
- 5 हजार से 6 लाख पौधे तक का सफर तय करने वाली 8 Naturals Nursery ने कैसे खड़ा किया देसी बीज बैंक का सफल नर्सरी बिज़नेसअनंत तायडे की 8 Naturals Nursery देसी प्रजातियों के संरक्षण, 6 लाख पौधों और सस्टेनेबल ग्रीन बिज़नेस मॉडल की प्रेरक मिसाल है।
- IAS उमाकांत उमराव का ‘देवास मॉडल’ जिसने सूखा प्रभावित ज़िले को बना दिया खेती का हबIAS उमाकांत उमराव के नेतृत्व में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन से देवास ने सूखे से उबरकर देश-दुनिया के लिए सफल मॉडल ज़िला बनने की मिसाल पेश की।
- हिमाचल में सेब सीज़न की तैयारियां तेज़, जगत सिंह नेगी ने लॉन्च किए नए डिजिटल इंतज़ामजगत सिंह नेगी ने सेब सीज़न को लेकर मोबाइल ऐप लॉन्च किया। बागवानों के लिए डिजिटल सुविधा, एमआईएस खरीद और भुगतान व्यवस्था होगी आसान।
- शिवराज सिंह चौहान ने ICAR के जरिए विकसित भारत 2047 का कृषि रोडमैप किया पेशशिवराज सिंह चौहान ने ICAR के 98वें स्थापना दिवस पर 386 उन्नत फ़सल क़िस्मों, नई तकनीकों और किसान केंद्रित कृषि पर ज़ोर दिया।
- ICAR’s 98th Foundation Day पर शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के लिए किए कई बड़े ऐलानICAR’s 98th Foundation Day पर शिवराज सिंह चौहान ने 43 नई फ़सल क़िस्में, नई तकनीकों और किसानों के लिए कई बड़े लक्ष्य घोषित किए।
- शिवराज सिंह चौहान ने ICAR CSR Conclave 2026 में कॉर्पोरेट सेक्टर से किसानों के लिए आगे आने की अपील कीशिवराज सिंह चौहान ने ICAR CSR Conclave 2026 में कृषि अनुसंधान, महिला किसानों और ग्रामीण विकास के लिए CSR सहयोग बढ़ाने की अपील की।
- राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को कैबिनेट की मंज़ूरी, देश में बढ़ेगा यूरिया उत्पादन और घटेगी आयात पर निर्भरताराष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को कैबिनेट की मंज़ूरी मिली। नई नीति से यूरिया उत्पादन बढ़ेगा, निवेश आएगा और आयात पर निर्भरता घटेगी।
- El Niño की आशंका के बीच तेलंगाना सरकार ने किसानों को दी सलाह, कम पानी वाली फ़सलों की खेती पर दिया ज़ोरEl Niño की आशंका के बीच तेलंगाना सरकार ने किसानों को धान की जगह कम पानी वाली फ़सलें अपनाने और मौसम के अनुसार खेती की सलाह दी।
- शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल में कृषि और ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा की, किसानों के लिए कई बड़े फैसलेशिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल में कृषि, ग्रामीण विकास, जूट किसानों, आवास और किसान कल्याण योजनाओं की समीक्षा की।
- उत्तर प्रदेश सरकार की पशुपालकों के लिए ख़ास स्कीम, ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ को हरी झंडीसरकार ने 60 करोड़ रुपये की लागत से ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ (‘Chief Minister’s Risk Management and Livestock Insurance Scheme’) को हरी झंडी दे दी है। इस स्कीम के तहत प्रदेश के 2 लाख 28 हजार 350 से अधिक पशुओं को बीमा कवर मिलेगा।
- खरीफ 2026 की फसलों के लिए फसल बीमा योजना: किसान भाई जल्द करें अप्लाईफसल बीमा योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि Debt-free किसान और एनपीए किसान भी निर्धारित प्रीमियम जमा करके इस स्कीम का पूरा फायदा उठा सकते हैं, जिससे कर्ज की स्थिति में भी किसान अपनी फसल का बीमा करवा सकते हैं।
- सूखे इलाके में ज्ञान चंद की प्राकृतिक खेती बनी किसानों के लिए मिसालप्राकृतिक खेती अपनाकर ज्ञान चंद ने कम पानी में बेहतर खेती की, लागत घटाई और कई किसानों को नई राह दिखाई।
- Vriksh Mitra Abhiyan: पूसा में 17 हज़ार वृक्ष मित्रों ने ली धरती को हरा-भरा बनाने की शपथ, कृषि मंत्री ने दिया हरित भारत का संदेशकेंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन की शुरुआत पर्यावरण संकट की गंभीरता को बताते हुए की और साफ कहा कि यह केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का संकट है।
- India-New Zealand Agriculture Partnership: कृषि, बागवानी, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहयोग,किसानों की आमदनी बढ़ाने की नई पहलकृषि अनुसंधान, इनोवेशन, कौशल विकास और जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों पर मिलकर काम करने का भी फैसला हुआ है।
- अलवर के प्याज किसानों के लिए खुशख़बरी: 50 फीसदी अनुदान पर बनेगा Warehouse, जानें कैसे करें अप्लाईयोजना के तहत 25 मीट्रिक टन क्षमता वाली प्याज भंडारण संरचना बनाने पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी, जो अधिकतम 87,500 रुपये तक हो सकती है।
- बिहार के सारण में एसी रूम में मशरूम की खेती को मिलेगा रियायती बिजली का लाभबिहार के सारण जिले में में एसी रूम में मशरूम की खेती करने वाले किसानों को अब रियायती कृषि दर पर बिजली मिलेगी, जिससे लागत घटेगी और आय बढ़ेगी।
- हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए HP AgriStack Farmer Registry Portal पर रजिस्ट्रेशन हुआ अनिवार्य, जानें पूरी जानकारीHP AgriStack Farmer Registry Portal पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले हिमाचल प्रदेश के किसान कई सरकारी योजनाओं और लाभों से वंचित रह सकते हैं पढ़ें पूरी ख़बर।
- वर्षा जल को सहेजने और जल सुरक्षा के लिए ‘नेशनल वॉटर मिशन’ के तहत शुरू हुआ Catch the Rain अभियानप्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में भी Catch the Rain अभियान को गति देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि “हमें बारिश की एक-एक बूंद बचानी है, इस मुहिम की गति को कम नहीं पड़ने देना है”। ये कोई सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक ‘जन भागीदारी’ का आंदोलन है।





















